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Fatehpur News: नैनो डीएपी, यूरिया से किसानों ने बनाई है दूरी
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फतेहपुर। नैनो डीएपी और यूरिया से किसान दूरी बनाए हुए हैं। किसानों का विश्वास जीतने के लिए कृषि विभाग के साथ इफको के अधिकारी पसीना बहा रहे हैं।
सहकारी समितियों के साथ इफको खाद बिक्री केंद्र संचालक किसानों में नैनो उर्वरक को लेकर विश्वास पैदा करने में अभी दूर खड़े हैं। हालांकि, इस बार दोनों विभागों ने नैनो के प्रयोग विधि में संशोधन भी किया है। अधिकारियों का दावा है कि नैनो के उपयोग से अच्छी पैदावार के साथ खर्च में बचत की जा सकती है।
जिले में गेहूं की फसल का क्षेत्रफल दो लाख 19 हजार 908 हेक्टेयर है। इसमें उपयोग के लिए कृषि विभाग ने 4,197 मीट्रिक टन डीएपी का लक्ष्य रखा है, जिसके सापेक्ष अब तक 4,000 मीट्रिक टन डीएपी और पांच हजार मीट्रिक टन एनपीके का स्टॉक जिले में आ चुका है। इसके बावजूद किसानों को नैनो डीएपी के जाल में फंसाने के लिए पर्याप्त डीएपी नहीं दी जा रही है। किसानों को नैनो डीएपी और यूरिया में अभी तक विश्वास नहीं है। यही कारण है कि सहकारी समितियों में डीएपी के लिए किसानों की भीड़ कम नहीं हो रही है।
50 किलो गेहूं के बीज में एक लीटर पानी, 250 ग्राम नैनो डीएपी मिलाकर शोधित करना है। इसके बाद बीज को आधा घंटे छाया में सुखाने के बाद किसान अपने मानक से आधी डीएपी यानी साढ़े 12 किलो के साथ शोधित बीज की बुआई करें। इससे गेहूं की फसल का मजबूत अंकुरण होगा। पहले पानी के बाद दानेदार यूरिया का छिड़काव करें। दूसरी और तीसरी बार सिर्फ नैनो यूरिया का छिड़काव करने से लागत में कमी आने के साथ अच्छा उत्पाद होगा। अभी तक प्रचार-प्रसार की कमी के कारण किसान नैनो डीएपी और यूरिया पर विश्वास नहीं कर रहा है। इसके लिए गांव-गांव में डेमो कराने की तैयारी है। -अतर सिंह, अधिकारी इफको
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एक बीघे खेत में गेहूं के बीज के साथ 25 किलो डीएपी की जरूरत होती है। पहले पानी के बाद प्रति बीघे 30 किलो दानेदार यूरिया, तीसरे पानी के बाद प्रति बीघे 10 किलो यूरिया तथा बाली आने से पहले पांच किलो प्रति बीघा यूरिया का छिड़काव क्षेत्रीय किसान करते हैं। इस पर आठ क्विंटल प्रति बीघे गेहूं का उत्पादन आसानी से होता है।
नैनो डीएपी और यूरिया मानक के अनुसार उपयोग करने से किसान कम खर्च में अच्छी उपज ले सकते हैं। इसके लिए गांव-गांव हो रहे डेमो में देखने के बाद किसान बुआई करें और अच्छी पैदावार लें। -नरोत्तम कुमार, जिला कृषि अधिकारी
कठौता गांव निवासी किसान रमेश का कहना है कि किसान फसल तैयार करने में किसी तरह का कोई जुआ खेलना पसंद नहीं करता है। ऐसे में नैनो डीएपी का बुआई के समय कैसे प्रयोग कर सकता है। अगर बोई गई फसल सही तैयार नहीं हुई तो किसान का पूरा साल बेकार हो जाएगा। इसका खामियाजा परिवार को भुगतना पड़ सकता है।
सरकंड़ी निकाली भूरा निषाद का कहना है कि नैनो की अगर अच्छी गुणवत्ता है तो कृषि विभाग अपने फार्मों में क्यों नहीं उपयोग करता है। सरकारी फार्मों में प्रयोग कर किसानों का विश्वास जीते और इसके बाद किसान स्वयं उपयोग करना शुरू कर देगा। ऐसे में किसान नैनो डीएपी और यूरिया पर विश्वास करने वाले नहीं हैं।
किसान एक बीघा खेत में गेहूं की बुआई में 25 किलो डीएपी का इस्तेमाल करते हैं। इसकी कीमत लगभग 700 रुपये होती है। इसी तरह 45 किलो की एक बोरी यूरिया लगती है। इसकी कीमत लगभग साढ़े 600 रुपये है। इस तरह प्रति बीघा 1,350 रुपये खर्च आएगा। वहीं, नैनो डीएपी व यूरिया का इस्तेमाल करने पर प्रति बीघा कीमत आधी हो जाती है। आधा लीटर नैनो डीएपी की कीमत 240 रुपये है। एक बीघे में 250 मिली नैनो डीएपी और दानेदार डीएपी साढ़े 12 किलो का इस्तेमाल होता है। इस तरह से नैनो डीएपी का खर्च 120 रुपये और दानेदार डीएपी 350 रुपये खर्च आएगा। वहीं, इसी मात्रा में नैनो यूरिया 120 रुपये और दानेदार यूरिया करीब 200 रुपये कीमत की पड़ेगी। इस तरह से एक बीघा में 790 रुपये खर्च आता है। ये लगभग आधा है। वहीं, कृषि विभाग का दावा है कि उत्पादन में वृद्धि होगी।
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सहकारी समितियों के साथ इफको खाद बिक्री केंद्र संचालक किसानों में नैनो उर्वरक को लेकर विश्वास पैदा करने में अभी दूर खड़े हैं। हालांकि, इस बार दोनों विभागों ने नैनो के प्रयोग विधि में संशोधन भी किया है। अधिकारियों का दावा है कि नैनो के उपयोग से अच्छी पैदावार के साथ खर्च में बचत की जा सकती है।
जिले में गेहूं की फसल का क्षेत्रफल दो लाख 19 हजार 908 हेक्टेयर है। इसमें उपयोग के लिए कृषि विभाग ने 4,197 मीट्रिक टन डीएपी का लक्ष्य रखा है, जिसके सापेक्ष अब तक 4,000 मीट्रिक टन डीएपी और पांच हजार मीट्रिक टन एनपीके का स्टॉक जिले में आ चुका है। इसके बावजूद किसानों को नैनो डीएपी के जाल में फंसाने के लिए पर्याप्त डीएपी नहीं दी जा रही है। किसानों को नैनो डीएपी और यूरिया में अभी तक विश्वास नहीं है। यही कारण है कि सहकारी समितियों में डीएपी के लिए किसानों की भीड़ कम नहीं हो रही है।
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50 किलो गेहूं के बीज में एक लीटर पानी, 250 ग्राम नैनो डीएपी मिलाकर शोधित करना है। इसके बाद बीज को आधा घंटे छाया में सुखाने के बाद किसान अपने मानक से आधी डीएपी यानी साढ़े 12 किलो के साथ शोधित बीज की बुआई करें। इससे गेहूं की फसल का मजबूत अंकुरण होगा। पहले पानी के बाद दानेदार यूरिया का छिड़काव करें। दूसरी और तीसरी बार सिर्फ नैनो यूरिया का छिड़काव करने से लागत में कमी आने के साथ अच्छा उत्पाद होगा। अभी तक प्रचार-प्रसार की कमी के कारण किसान नैनो डीएपी और यूरिया पर विश्वास नहीं कर रहा है। इसके लिए गांव-गांव में डेमो कराने की तैयारी है। -अतर सिंह, अधिकारी इफको
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एक बीघे खेत में गेहूं के बीज के साथ 25 किलो डीएपी की जरूरत होती है। पहले पानी के बाद प्रति बीघे 30 किलो दानेदार यूरिया, तीसरे पानी के बाद प्रति बीघे 10 किलो यूरिया तथा बाली आने से पहले पांच किलो प्रति बीघा यूरिया का छिड़काव क्षेत्रीय किसान करते हैं। इस पर आठ क्विंटल प्रति बीघे गेहूं का उत्पादन आसानी से होता है।
नैनो डीएपी और यूरिया मानक के अनुसार उपयोग करने से किसान कम खर्च में अच्छी उपज ले सकते हैं। इसके लिए गांव-गांव हो रहे डेमो में देखने के बाद किसान बुआई करें और अच्छी पैदावार लें। -नरोत्तम कुमार, जिला कृषि अधिकारी
कठौता गांव निवासी किसान रमेश का कहना है कि किसान फसल तैयार करने में किसी तरह का कोई जुआ खेलना पसंद नहीं करता है। ऐसे में नैनो डीएपी का बुआई के समय कैसे प्रयोग कर सकता है। अगर बोई गई फसल सही तैयार नहीं हुई तो किसान का पूरा साल बेकार हो जाएगा। इसका खामियाजा परिवार को भुगतना पड़ सकता है।
सरकंड़ी निकाली भूरा निषाद का कहना है कि नैनो की अगर अच्छी गुणवत्ता है तो कृषि विभाग अपने फार्मों में क्यों नहीं उपयोग करता है। सरकारी फार्मों में प्रयोग कर किसानों का विश्वास जीते और इसके बाद किसान स्वयं उपयोग करना शुरू कर देगा। ऐसे में किसान नैनो डीएपी और यूरिया पर विश्वास करने वाले नहीं हैं।
किसान एक बीघा खेत में गेहूं की बुआई में 25 किलो डीएपी का इस्तेमाल करते हैं। इसकी कीमत लगभग 700 रुपये होती है। इसी तरह 45 किलो की एक बोरी यूरिया लगती है। इसकी कीमत लगभग साढ़े 600 रुपये है। इस तरह प्रति बीघा 1,350 रुपये खर्च आएगा। वहीं, नैनो डीएपी व यूरिया का इस्तेमाल करने पर प्रति बीघा कीमत आधी हो जाती है। आधा लीटर नैनो डीएपी की कीमत 240 रुपये है। एक बीघे में 250 मिली नैनो डीएपी और दानेदार डीएपी साढ़े 12 किलो का इस्तेमाल होता है। इस तरह से नैनो डीएपी का खर्च 120 रुपये और दानेदार डीएपी 350 रुपये खर्च आएगा। वहीं, इसी मात्रा में नैनो यूरिया 120 रुपये और दानेदार यूरिया करीब 200 रुपये कीमत की पड़ेगी। इस तरह से एक बीघा में 790 रुपये खर्च आता है। ये लगभग आधा है। वहीं, कृषि विभाग का दावा है कि उत्पादन में वृद्धि होगी।