{"_id":"60281e0a8ebc3ee9372c8000","slug":"electicity-not-available-fathepur-news-distrit-hospital-24-hour-fatehpur-news-knp611701785","type":"story","status":"publish","title_hn":"साल भर से नहीं मिल रही 24 घंटे बिजली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साल भर से नहीं मिल रही 24 घंटे बिजली
विज्ञापन
सदर अस्पताल के पुरुष वार्ड में बत्ती न होने से छाया अंधेरा
- फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को बिजली कटौती रुला रही है। आठ साल पहले जिले में 86 लाख रुपये खर्च करके जिले के सबसे बड़े अस्पताल को 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने के लिए विद्युत लाइन तैयार की गई लेकिन इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस कारण अस्पताल की सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। बिजली न रहने से अल्ट्रासाउंड से लेकर सीटी स्कैन सेवा बाधित हो रही हैं। ओटी के आपरेशन तक रोकने पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल की बिजली व्यवस्था पर फोकस करती खबर।
अब डिवाइडर सड़क का निर्माण बन गया अड़ंगा
जिला अस्पताल में वर्ष 2011-12 में राधा नगर ट्रांसमिशन से अलग फीडर का लाभ दिया गया था। यह लाइन रेलवे लाइन पार करते हुए जेल रोड से वीआईपी रोड होते हुए जिला अस्पताल तक बनाई गई थी। अलग लाइन होने के बावजूद अक्सर इसमें फाल्ट रहते हैं।
विज्ञापन
इधर साल भर से अलग लाइन से आपूर्ति इसलिए बंद है क्योंकि डाकबंगला से वीआईपी रोड पर काम चल रहा है।
अलग फीडर के काम न करने से जिला अस्पताल को मुराइनटोला उपकेंद्र के बाकरगंज फीडर से जोड़ा गया है। इस फीडर के उपभोक्ताओं को 18 से 19 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
बिजली न होने से बाहर रोक दिया स्ट्रेचर
जिला अस्पताल में चौबीस घंटे की निर्बाध बिजली आपूर्ति ठप होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शनिवार दोपहर बिजली गुल रहने की सच्चाई आपरेशन थियेटर के बाहर आइना बनी नजर आई। एक मरीज को स्ट्रेचर पर इसलिए लिटा रखा गया था क्योंकि अंदर आपरेशन को पहले से ही तीन मरीज मौजूद थे और बिजली न होने के कारण आपरेशन रुके हुए थे।
हर रोज 60 लीटर तक डीजल की खपत
स्वतंत्र फीडर सेवा बंद होने से बिजली आपूर्ति बंद होने पर जेनरेटर का सहारा लिया जा रहा है। यहां पर 125 केवीए के दो जेनरेटर की व्यवस्था है।
एक घंटे जेनरेटर चलाने में 18 से 20 लीटर डीजल लगता है। इस लिहाज से अगर तीन घंटे भी जेनरेटर चलते हैं तो 50 से 60 लीटर डीजल खर्च हो रहा है।
जिला अस्पताल होने के नाते बिजली की कटौती नहीं होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। प्रशासनिक अफसर भी अस्पताल की इस समस्या को लेकर संजीदा नहीं है। - राजू, मुराइनटोला
बिजली की दिन में चार से पांच घंटे तक कटौती की जाती है। इससे मरीज की जांच का काम नहीं हो पा रहा है। अल्टासाउंड कराने के लिए तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। - सुशील कुमार, कल्याणपुर
बिजली की समस्या वह अस्पताल में तीन दिन से देख रहे हैं। उन्हें अपने मरीज का डिजिटल एक्सरे कराना था। बिजली गुल होने से दोपहर दो बजे तक इंतजार करना पड़ा। - शमीम, मुराइनटोला
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में बिजली की समस्या नहीं होनी चाहिए। यहां पर कई कई घंटे बिजली गुल रहती है। वार्ड अंधेरे में डूब जाते हैं। रात में समस्या और बढ़ जाती है। - तन्नू, गाजीपुर
स्वतंत्र फीडर बंद होने से रोजाना कम से कम तीन घंटे जनरेटर चलाने पड़ रहे हैं। रोजाना बिजली की खपत 100 किलोवाट के आसपास रहती है। कई बार बिजली विभाग के अफसरों से इस बारे में बात की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। - डॉ. प्रभाकर, सीएमएस, सदर अस्पताल
मुराइनटोला से अस्पताल तक अंडरग्राउंड लाइन डाली जा रही है। जैसे ही लाइन का काम पूरा हो जाएगा। अस्पताल की समस्या दूर हो जाएगी। काम प्रक्रिया में है। - विनय कुमार, एसडीओ
विज्ञापन
इस कारण अस्पताल की सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। बिजली न रहने से अल्ट्रासाउंड से लेकर सीटी स्कैन सेवा बाधित हो रही हैं। ओटी के आपरेशन तक रोकने पड़ रहे हैं। जिला अस्पताल की बिजली व्यवस्था पर फोकस करती खबर।
विज्ञापन
अब डिवाइडर सड़क का निर्माण बन गया अड़ंगा
जिला अस्पताल में वर्ष 2011-12 में राधा नगर ट्रांसमिशन से अलग फीडर का लाभ दिया गया था। यह लाइन रेलवे लाइन पार करते हुए जेल रोड से वीआईपी रोड होते हुए जिला अस्पताल तक बनाई गई थी। अलग लाइन होने के बावजूद अक्सर इसमें फाल्ट रहते हैं।
विज्ञापन
इधर साल भर से अलग लाइन से आपूर्ति इसलिए बंद है क्योंकि डाकबंगला से वीआईपी रोड पर काम चल रहा है।
अलग फीडर के काम न करने से जिला अस्पताल को मुराइनटोला उपकेंद्र के बाकरगंज फीडर से जोड़ा गया है। इस फीडर के उपभोक्ताओं को 18 से 19 घंटे ही बिजली मिल पा रही है।
बिजली न होने से बाहर रोक दिया स्ट्रेचर
जिला अस्पताल में चौबीस घंटे की निर्बाध बिजली आपूर्ति ठप होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शनिवार दोपहर बिजली गुल रहने की सच्चाई आपरेशन थियेटर के बाहर आइना बनी नजर आई। एक मरीज को स्ट्रेचर पर इसलिए लिटा रखा गया था क्योंकि अंदर आपरेशन को पहले से ही तीन मरीज मौजूद थे और बिजली न होने के कारण आपरेशन रुके हुए थे।
हर रोज 60 लीटर तक डीजल की खपत
स्वतंत्र फीडर सेवा बंद होने से बिजली आपूर्ति बंद होने पर जेनरेटर का सहारा लिया जा रहा है। यहां पर 125 केवीए के दो जेनरेटर की व्यवस्था है।
एक घंटे जेनरेटर चलाने में 18 से 20 लीटर डीजल लगता है। इस लिहाज से अगर तीन घंटे भी जेनरेटर चलते हैं तो 50 से 60 लीटर डीजल खर्च हो रहा है।
जिला अस्पताल होने के नाते बिजली की कटौती नहीं होनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। प्रशासनिक अफसर भी अस्पताल की इस समस्या को लेकर संजीदा नहीं है। - राजू, मुराइनटोला
बिजली की दिन में चार से पांच घंटे तक कटौती की जाती है। इससे मरीज की जांच का काम नहीं हो पा रहा है। अल्टासाउंड कराने के लिए तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। - सुशील कुमार, कल्याणपुर
बिजली की समस्या वह अस्पताल में तीन दिन से देख रहे हैं। उन्हें अपने मरीज का डिजिटल एक्सरे कराना था। बिजली गुल होने से दोपहर दो बजे तक इंतजार करना पड़ा। - शमीम, मुराइनटोला
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में बिजली की समस्या नहीं होनी चाहिए। यहां पर कई कई घंटे बिजली गुल रहती है। वार्ड अंधेरे में डूब जाते हैं। रात में समस्या और बढ़ जाती है। - तन्नू, गाजीपुर
स्वतंत्र फीडर बंद होने से रोजाना कम से कम तीन घंटे जनरेटर चलाने पड़ रहे हैं। रोजाना बिजली की खपत 100 किलोवाट के आसपास रहती है। कई बार बिजली विभाग के अफसरों से इस बारे में बात की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। - डॉ. प्रभाकर, सीएमएस, सदर अस्पताल
मुराइनटोला से अस्पताल तक अंडरग्राउंड लाइन डाली जा रही है। जैसे ही लाइन का काम पूरा हो जाएगा। अस्पताल की समस्या दूर हो जाएगी। काम प्रक्रिया में है। - विनय कुमार, एसडीओ

सदर अस्पताल के आपरेशन थ्रेटर के बाहर स्ट्रेचर पर लेटा मरीज- फोटो : FATEHPUR