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अंतर्मन बोला चरै वेति...चरै वेति, और फिर चल पड़े दिव्यांशु
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फतेहपुर। दिव्यांशु पर यूपीएससी परीक्षा 2020 देने का दबाव नहीं था। उनकी पिछली सफलता से ही पूरा परिवार खुश था। लेकिन दिव्यांशु को आसमान छूना था। उन्होंने खुद की इच्छा से दर्शनशास्त्र विषय से फिर परीक्षा दी और पिछली 323वीं रैंक से आगे बढ़कर 198वां स्थान हासिल किया।
2018 की यूपीएससी परीक्षा में दिव्यांशु तिवारी ने सहायक आयकर आयुक्त का पद हासिल किया था। लेकिन दिव्यांशु ने उसी दिन फिर से परीक्षा में बैठने का संकल्प किया था। वह और ऊंचे शिखर पर जाना चाहते थे। नौकरी मिलने के बाद उनका इंटीरियर डिजाइनर के साथ विवाह हो गया। हाल ही में एक वर्ष के हुए बेटे ने जीवन में आकर घर को खुशियों को भर दिया।
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सहायक आयकर आयुक्त की जिम्मेदारी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई के लिए समय निकाला। दिन में दफ्तर में कामकाज निपटाते और रात में पढ़ाई के लिए समय निकालते। कुछ रातें बिना सोए भी निकल गईं। पत्नी और परिजनों ने इतनी मेहनत करने से मना किया लेकिन वह नहीं माने। आज नतीजा सबके सामने है।
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दिव्यांशु के पिता राजेंद्र प्रसाद तिवारी और मां सविता तिवारी बताते हैं कि वे बचपन से ही पढ़ाई के प्रति बेहद गंभीर थे। वह कहते हैं कि अभी भी दिव्यांशु के मन में और अधिक ऊंचाई पर जाने का विचार होगा। अचरज न होगा, अगर अगली परीक्षा में भी दिव्यांशु शिरकत करते मिल जाएं। जो भी हो लेकिन दिव्यांशु की सफलता दोआबा की माटी के लिए अत्यंत प्रेरक है।
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2018 की यूपीएससी परीक्षा में दिव्यांशु तिवारी ने सहायक आयकर आयुक्त का पद हासिल किया था। लेकिन दिव्यांशु ने उसी दिन फिर से परीक्षा में बैठने का संकल्प किया था। वह और ऊंचे शिखर पर जाना चाहते थे। नौकरी मिलने के बाद उनका इंटीरियर डिजाइनर के साथ विवाह हो गया। हाल ही में एक वर्ष के हुए बेटे ने जीवन में आकर घर को खुशियों को भर दिया।
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सहायक आयकर आयुक्त की जिम्मेदारी के बावजूद उन्होंने पढ़ाई के लिए समय निकाला। दिन में दफ्तर में कामकाज निपटाते और रात में पढ़ाई के लिए समय निकालते। कुछ रातें बिना सोए भी निकल गईं। पत्नी और परिजनों ने इतनी मेहनत करने से मना किया लेकिन वह नहीं माने। आज नतीजा सबके सामने है।
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दिव्यांशु के पिता राजेंद्र प्रसाद तिवारी और मां सविता तिवारी बताते हैं कि वे बचपन से ही पढ़ाई के प्रति बेहद गंभीर थे। वह कहते हैं कि अभी भी दिव्यांशु के मन में और अधिक ऊंचाई पर जाने का विचार होगा। अचरज न होगा, अगर अगली परीक्षा में भी दिव्यांशु शिरकत करते मिल जाएं। जो भी हो लेकिन दिव्यांशु की सफलता दोआबा की माटी के लिए अत्यंत प्रेरक है।