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फतेहपुर: मंत्री की संस्थाओं का जवाब, आवंटन की अब हुई जानकारी
Mon, 20 Feb 2023 01:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Mon, 20 Feb 2023 01:36 AM IST
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फतेहपुर। उद्योग विभाग की ओर से जारी की गई नोटिस का जवाब अभिनव शिक्षा और सीमा शिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान कानपुर ने दिया है।
अभिनव शिक्षा और सीमा शिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान कानपुर के अध्यक्ष उदय नारायण सचान ने जवाब में कहा कि शैक्षणिक संस्थान खोलने के लिए भूखंड आवंटन का आवेदन 11 वर्ष पहले किया था। उसके बाद अब 15 फरवरी को भूखंड आवंटन की जानकारी हुई है। यह दोनों संस्थाएं कैबिनेट मंत्री राकेश सचान की हैं। बताया कि सीमा शिक्षण संस्थान की ओर से सधुवापुर (पौली) में आवंटित मिनी औद्योगिक के 40 भूखंडों और चकहाता फतेहपुर के 32 भूखंडों को रद्द करने का जवाब दिया है।
अध्यक्ष ने बताया कि आवंटन पत्र में भूखंड की संपूर्ण एकमुश्त धनराशि 15 दिन में जमा करती थी। इसकी जानकारी हो जाती तो भूखंड की धनराशि जमा कराकर शिक्षण संस्थान संचालित कर दिया जाता। 10 वर्ष बाद सूचना मिली है, ऐसे में कई शिक्षण संस्थान खुल चुके हैं। अब नए शिक्षण संस्थान की कोई उपयोगिता नहीं है।
उन्होंने बताया कि पहले भूखंड की निर्धारित दर 105 रुपये थी, जिसको बढ़ाकर 880 रुपये कर दिया गया है। ऐसे में इस भूमि पर शैक्षणिक संस्थान न खोलने और आवंटित भूमि को उपायुक्त उद्योग विभाग के समर्पित करने का निर्णय लिया है।
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अभिनव शिक्षा और सीमा शिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान कानपुर के अध्यक्ष उदय नारायण सचान ने जवाब में कहा कि शैक्षणिक संस्थान खोलने के लिए भूखंड आवंटन का आवेदन 11 वर्ष पहले किया था। उसके बाद अब 15 फरवरी को भूखंड आवंटन की जानकारी हुई है। यह दोनों संस्थाएं कैबिनेट मंत्री राकेश सचान की हैं। बताया कि सीमा शिक्षण संस्थान की ओर से सधुवापुर (पौली) में आवंटित मिनी औद्योगिक के 40 भूखंडों और चकहाता फतेहपुर के 32 भूखंडों को रद्द करने का जवाब दिया है।
अध्यक्ष ने बताया कि आवंटन पत्र में भूखंड की संपूर्ण एकमुश्त धनराशि 15 दिन में जमा करती थी। इसकी जानकारी हो जाती तो भूखंड की धनराशि जमा कराकर शिक्षण संस्थान संचालित कर दिया जाता। 10 वर्ष बाद सूचना मिली है, ऐसे में कई शिक्षण संस्थान खुल चुके हैं। अब नए शिक्षण संस्थान की कोई उपयोगिता नहीं है।
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उन्होंने बताया कि पहले भूखंड की निर्धारित दर 105 रुपये थी, जिसको बढ़ाकर 880 रुपये कर दिया गया है। ऐसे में इस भूमि पर शैक्षणिक संस्थान न खोलने और आवंटित भूमि को उपायुक्त उद्योग विभाग के समर्पित करने का निर्णय लिया है।
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