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Fatehpur News: गंदगी देखकर भड़के उप मुख्यमंत्री
Fri, 19 Jul 2024 02:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Fri, 19 Jul 2024 02:29 AM IST
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फतेहपुर। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण की शुरुआत में इमरजेंसी चिकित्सा कक्ष में गंदगी देख भड़क गए।
उन्होंने सीएमएस को फटकार लगाते हुए सफाई कराने वाली संस्था का एक दिन का पारिश्रमिक भुगतान रोकने का निर्देश दिया। उन्हें हर जगह कमियां मिलीं। वे सुधार की हिदायत देकर चले गए।
उप मुख्यमंत्री ने गुरुवार सुबह लगभग सवा दस बजे सबसे पहले इमरजेंसी चिकित्सा कक्ष का निरीक्षण किया। यहां गंदगी देख कर नाराजगी जताने के बाद आगे बढ़े। उन्हें अस्पताल का एक उपकरण खुले आसमान के नीचे पड़ा दिखा। इस पर सीएमएस पूछताछ की। सीएमएस ने दो दिन पहले उपकरण आने की बात कहकर टालमटोल किया।
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इस पर डिप्टी सीएम ने उपकरण पर जमी धूल देखकर ही महीनों से पड़े होने का अंदाजा लगा लिया। सीएमएस के जवाब से नाराज डिप्टी सीएम ने ओपीडी में तैनात डाॅक्टरों के ड्यूटी रजिस्टर की मांग की। वे उसे देखने सीएमएस के कार्यालय पहुंचे। इस बीच गलियारे और सीढ़ी में गंदगी व नीचे वायरिंग को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए। डॉक्टर ड्यूटी रजिस्टर में कई डॉक्टरों के हस्ताक्षर नहीं मिले।
एक के जेल में ड्यूटी होने की बात सामने आई, लेकिन जेल रजिस्टर सीएमएस नहीं दिखा सके। इसके बाद वह ओपीडी पहुंचे, जहां पर सिर्फ जूनियर डाॅक्टर मिले। पूछने पर बताया कि मेडिकल काॅलेज के प्रोफेसर अस्पताल नहीं आते। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। जनरल वार्ड में उप मुख्यमंत्री ने मरीजों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
यहां पर डाॅक्टरों के बाजार की दवा लिखने की शिकायत मिली। उन्होंने सीएमएस से डॉक्टरों के बाजार की दवाएं लिखने पर कड़ाई से पाबंदी लगाने के लिए कहा। अस्पताल पर्चा काउंटर में भीड़ देखकर एक और पंजीयन कक्षा स्थापित करने के निर्देश दिए।
इसके बाद दवा वितरण काउंटर देखने के बाद अस्पताल के बाहर वाहन खड़े होने पर आपत्ति की। कहा कि किसी का भी वाहन अस्पताल गेट पर खड़ा नहीं होना चाहिए। इसके बाद डि़प्टी सीएम महोबा के लिए रवाना हो गया। पूरे 26 मिनट 30 सेकेंड तक डिप्टी सीएम अस्पताल में रहे, तब तक अस्पताल प्रशासन की सांसें रुकी रहीं।
इस मौके पर विधायक अयाहशाह विकास गुप्ता, जिलाधिकारी सी इंदुमती, पुलिस अधीक्षक उदय शंकर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी पवन कुमार मीना, अपर जिलाधिकारी राजस्व अविनाश त्रिपाठी, अपर पुलिस अधीक्षक विजय शंकर मिश्रा, जिला विकास अधिकारी प्रमोद सिंह चंद्रौल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सीएमएस डॉ. पीके सिंह आदि मौजूद रहे।
बेड पर मिला खून
उप मुख्यमंत्री ने भर्ती मरीजों से बातचीत करके उपचार की जानकारी ली। उन्हें किसी भी बेड पर तकिया नहीं मिला। वहीं एक दुर्घटना में घायल मरीज भर्ती किया गया। उस बेड की चादर में खून लगा था।
जानकारी मिली कि पुराने मरीज का खून चादर में लगा है। इस पर उप मुख्यमंत्री ने मरीज के भर्ती होते ही नए चादर देने का निर्देश दिया और हर मरीज को तकिया देने के लिए सीएमएस को जिम्मेदारी का अहसास कराया।
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उन्होंने सीएमएस को फटकार लगाते हुए सफाई कराने वाली संस्था का एक दिन का पारिश्रमिक भुगतान रोकने का निर्देश दिया। उन्हें हर जगह कमियां मिलीं। वे सुधार की हिदायत देकर चले गए।
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उप मुख्यमंत्री ने गुरुवार सुबह लगभग सवा दस बजे सबसे पहले इमरजेंसी चिकित्सा कक्ष का निरीक्षण किया। यहां गंदगी देख कर नाराजगी जताने के बाद आगे बढ़े। उन्हें अस्पताल का एक उपकरण खुले आसमान के नीचे पड़ा दिखा। इस पर सीएमएस पूछताछ की। सीएमएस ने दो दिन पहले उपकरण आने की बात कहकर टालमटोल किया।
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इस पर डिप्टी सीएम ने उपकरण पर जमी धूल देखकर ही महीनों से पड़े होने का अंदाजा लगा लिया। सीएमएस के जवाब से नाराज डिप्टी सीएम ने ओपीडी में तैनात डाॅक्टरों के ड्यूटी रजिस्टर की मांग की। वे उसे देखने सीएमएस के कार्यालय पहुंचे। इस बीच गलियारे और सीढ़ी में गंदगी व नीचे वायरिंग को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए। डॉक्टर ड्यूटी रजिस्टर में कई डॉक्टरों के हस्ताक्षर नहीं मिले।
एक के जेल में ड्यूटी होने की बात सामने आई, लेकिन जेल रजिस्टर सीएमएस नहीं दिखा सके। इसके बाद वह ओपीडी पहुंचे, जहां पर सिर्फ जूनियर डाॅक्टर मिले। पूछने पर बताया कि मेडिकल काॅलेज के प्रोफेसर अस्पताल नहीं आते। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई। जनरल वार्ड में उप मुख्यमंत्री ने मरीजों से व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
यहां पर डाॅक्टरों के बाजार की दवा लिखने की शिकायत मिली। उन्होंने सीएमएस से डॉक्टरों के बाजार की दवाएं लिखने पर कड़ाई से पाबंदी लगाने के लिए कहा। अस्पताल पर्चा काउंटर में भीड़ देखकर एक और पंजीयन कक्षा स्थापित करने के निर्देश दिए।
इसके बाद दवा वितरण काउंटर देखने के बाद अस्पताल के बाहर वाहन खड़े होने पर आपत्ति की। कहा कि किसी का भी वाहन अस्पताल गेट पर खड़ा नहीं होना चाहिए। इसके बाद डि़प्टी सीएम महोबा के लिए रवाना हो गया। पूरे 26 मिनट 30 सेकेंड तक डिप्टी सीएम अस्पताल में रहे, तब तक अस्पताल प्रशासन की सांसें रुकी रहीं।
इस मौके पर विधायक अयाहशाह विकास गुप्ता, जिलाधिकारी सी इंदुमती, पुलिस अधीक्षक उदय शंकर सिंह, मुख्य विकास अधिकारी पवन कुमार मीना, अपर जिलाधिकारी राजस्व अविनाश त्रिपाठी, अपर पुलिस अधीक्षक विजय शंकर मिश्रा, जिला विकास अधिकारी प्रमोद सिंह चंद्रौल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, सीएमएस डॉ. पीके सिंह आदि मौजूद रहे।
बेड पर मिला खून
उप मुख्यमंत्री ने भर्ती मरीजों से बातचीत करके उपचार की जानकारी ली। उन्हें किसी भी बेड पर तकिया नहीं मिला। वहीं एक दुर्घटना में घायल मरीज भर्ती किया गया। उस बेड की चादर में खून लगा था।
जानकारी मिली कि पुराने मरीज का खून चादर में लगा है। इस पर उप मुख्यमंत्री ने मरीज के भर्ती होते ही नए चादर देने का निर्देश दिया और हर मरीज को तकिया देने के लिए सीएमएस को जिम्मेदारी का अहसास कराया।