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Fatehpur News: बंद किया डेंगू वार्ड, प्लेटलेट्स व वेंटीलेटर की भी सुविधा नहीं

Sun, 10 Nov 2024 01:54 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2024 01:54 AM IST
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Dengue ward closed, no facilities for platelets and ventilator
फतेहपुर। जिला अस्पताल में डेंगू के इलाज की कोई सुविधा नहीं है। प्लेटलेट्स चढ़ाने के साथ हालत बिगड़ने पर रोगी को अस्पताल में वेंटीलेटर भी नहीं मिल सकता है। जुलाई में छह बेड वाला डेंगू वार्ड भी बंद कर दिया गया है। ऐसे में गंभीर डेंगू (डी-टू) रोगियों को जिला अस्पताल से कानपुर रेफर किया जा रहा है।
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डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। पिछले 10 दिन में 61 डेंगू रोगियों के साथ कुल संख्या 260 पहुंच गई। इनमें डी टू (गंभीर) डेंगू रोगियों की संख्या 25 है। डी टू डेंगू रोगियों को समय रहते बेहतर उपचार आवश्यक है। थोड़ी सी चूक भी जानलेवा बन सकती है। इसमें रोगी को जरूरत के हिसाब से प्लेटलेट्स और वेंटीलेटर की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन जिला अस्पताल में यह दोनों सुविधाएं नहीं हैं। वहीं डेंगू वार्ड भी बंद कर दिया गया है। ऐसे में डेंगू रोगियों को भर्ती करने से अस्पताल प्रशासन बचता है। मरीज भी जिला अस्पताल पर भरोसा नहीं करके निजी या कानपुर, रायबरेली (एम्स), प्रयागराज में उपचार कराना बेहतर समझते हैं।
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सामान्य डेंगू डी वन में बुखार कभी कम को कभी ज्यादा होता रहता है। आंखों के नीचे दर्द रहता है। इस स्टेज पर सही उपचार न होने पर डेंगू डी टू स्टेज पर पहुंच जाता है। इसमें तेज बुखार, शरीर में दर्द, उल्टियां, शरीर पर चकत्ते और कमजोरी महसूस होती है। हालांकि ये शुरुआत में ही ये लक्षण मिलने से डेंगू डी-टू हो सकता है। इसका उपचार अधिक से अधिक शरीर में पानी की मात्रा को बनाए रखना और डॉक्टर की सलाह लेकर दवा की डोज लेना है।
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डी वन डेंगू सामान्य बुखार के इलाज से ठीक हो सकता है, लेकिन डी टू डेंगू रोगी कुशल डाॅक्टरों व संसाधनों से उपचार आवश्यक है। ऐसे रोगियों को सबसे अधिक पानी की आवश्यकता है। किसी भी रूप में रोगी के पेट में पानी प्रचुर मात्रा में पहुंचना आवश्यक है, क्योंकि पानी की कमी होने से रोगी की जान जोखिम में पड़ सकती है।
राधेश्याम भारती, सीनियर सहायक मलेरिया अधिकारी
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