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दोपहर में मुर्झाएं पत्तियां तो करें सिंचाई 17-21-01
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फतेहपुर। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी व वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह का कहना है कि महामारी में पूरा देश गंभीर स्थिति से गुजर रहा है। कृषि देश की समृद्धि, रोजगार, खाद्य पूर्ति तथा जीवन को बनाए रखने का सशक्त माध्यम है। किसान सामाजिक दूरी का पालन करते हुए इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए अपने घरों में रहकर पशुओं और खेतों की देखरेख कर रहे हैं। खेत पर मूंग, उरद, टमाटर, तरबूज, मिर्च तथा कद्दू वर्गीय फसलें खड़ी हैं। जिनकी देखरेख आवश्यक है, जिससे किसान की मेहनत बर्बाद न हो।
डॉ. आरके सिंह ने बताया कि गर्मी में जायद की फसलें खड़ी हैं। कद्दू वर्गीय फसलों के साथ मूंग की फसल सबसे प्रमुख है। जब दोपहर के समय पत्तियां मुरझाना शुरू कर दें, तो समझ लेना चाहिए कि फसल को पानी की जरूरत है। किसान सुबह व शाम के समय ही फसलों में सिंचाई करें। कीट व रोग के प्रति निरंतर निगरानी रखने की जरूरत है। मूंग और उर्द की फसल में पहली सिंचाई बुआई के 25 दिन बाद की जानी चाहिए तथा अन्य सिंचाई जरूरत के अनुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर की जानी चाहिए। परंतु मूंग की फसल में फूल आते समय सिंचाई न करें अन्यथा उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा, इसलिए मूंग की दूसरी सिंचाई फूल आने के पहले अथवा फलियां बनते समय की जानी चाहिए। दोनों ही फसलों में फलियों में दाना भरते समय भूमि में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए।
कीट लगने पर यह करें उपचार
केवीके थरियांव के वैज्ञानिक डॉ. नौशाद आलम ने बताया कि मूंग तथा उर्द में फूल तथा फलियां आते समय कीटों का विशेष ध्यान देना चाहिए। फसल में थ्रिप्स तथा जैसिड के आक्रमण से फसल के उत्पादन पर बहुत अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है। खेत में घुसते ही यदि छोटे-छोटे भुनंगे या कीट उड़ने लगे तो इसका नियंत्रण इमिडाक्लोप्रिड 250 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 600 लीटर पानी में घोलकर शाम के समय छिड़काव किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर 15 दिनों के अंतराल पर दूसरा छिड़काव किया जा सकता है
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जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि जायद की फसल में 15361 हेक्टेयर फसलें बोई गई हैं। इसमें मक्का, उर्द, मूंग, सब्जियां और हरा चारा की फसलें हैं। जिले में इन फसलों का क्षेत्रफल निम्न है।
फसल का नाम-- क्षेत्रफल हेक्टेयर में
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मक्का-- 24
उर्द-- 793
मूंग-- 9175
सब्जियां--- 4322
हरा चारा-- 1035
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डॉ. आरके सिंह ने बताया कि गर्मी में जायद की फसलें खड़ी हैं। कद्दू वर्गीय फसलों के साथ मूंग की फसल सबसे प्रमुख है। जब दोपहर के समय पत्तियां मुरझाना शुरू कर दें, तो समझ लेना चाहिए कि फसल को पानी की जरूरत है। किसान सुबह व शाम के समय ही फसलों में सिंचाई करें। कीट व रोग के प्रति निरंतर निगरानी रखने की जरूरत है। मूंग और उर्द की फसल में पहली सिंचाई बुआई के 25 दिन बाद की जानी चाहिए तथा अन्य सिंचाई जरूरत के अनुसार 10 से 15 दिन के अंतराल पर की जानी चाहिए। परंतु मूंग की फसल में फूल आते समय सिंचाई न करें अन्यथा उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा, इसलिए मूंग की दूसरी सिंचाई फूल आने के पहले अथवा फलियां बनते समय की जानी चाहिए। दोनों ही फसलों में फलियों में दाना भरते समय भूमि में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए।
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कीट लगने पर यह करें उपचार
केवीके थरियांव के वैज्ञानिक डॉ. नौशाद आलम ने बताया कि मूंग तथा उर्द में फूल तथा फलियां आते समय कीटों का विशेष ध्यान देना चाहिए। फसल में थ्रिप्स तथा जैसिड के आक्रमण से फसल के उत्पादन पर बहुत अधिक बुरा प्रभाव पड़ता है। खेत में घुसते ही यदि छोटे-छोटे भुनंगे या कीट उड़ने लगे तो इसका नियंत्रण इमिडाक्लोप्रिड 250 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 600 लीटर पानी में घोलकर शाम के समय छिड़काव किया जाना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर 15 दिनों के अंतराल पर दूसरा छिड़काव किया जा सकता है
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जिला कृषि अधिकारी बृजेश सिंह ने बताया कि जायद की फसल में 15361 हेक्टेयर फसलें बोई गई हैं। इसमें मक्का, उर्द, मूंग, सब्जियां और हरा चारा की फसलें हैं। जिले में इन फसलों का क्षेत्रफल निम्न है।
फसल का नाम-- क्षेत्रफल हेक्टेयर में
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मक्का-- 24
उर्द-- 793
मूंग-- 9175
सब्जियां--- 4322
हरा चारा-- 1035
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