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पैदावार कम होने पर किसान ने फांसी लगाकर दी जान

Sat, 07 May 2016 12:40 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो अमर उजाला, फतेहपुर Updated Sat, 07 May 2016 12:40 AM IST
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Lower yields on farmer suicide by hanging
मृत किसान के रोते-बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला

चांदपुर थानाक्षेत्र के सिजौली गांव में भी पैदावार कम होने और कर्ज बढ़ने पर एक किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। सुबह घर के बाहर नीम के पेड़ पर शव लटकता देख परिजनों में कोहराम मच गया।

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किसान अनिल कुमार(50) के हिस्से में ढाई बीघे खेती थी। इसके अलावा उसने गांव के ही लववीर व बच्चन लाल की पांच बीघा खेत बटाई में ले रखे थे। मेहनत कर खेतों में उगने वाली फसल से वह अपनी पत्नी सदाप्यारी, पुत्र अमित, सुमित, नितेश व रमानंद का भरण पोषण करता था। अपनी दो पुत्रियों देवकी व प्रीती की शादी दो साल पहले कर चुका था।
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इधर, दो साल से पत्नी को कैंसर हो गया था। अनिल के भाई बाल गोंविंद ने बताया कि लगातार दैवी आपदा से बर्बाद हुई फसल के चलते अनिल कर्ज में डूबता जा रहा था। हालांकि कुछ दिन पहले ही भूसा, गेहूं बेचकर कुछ पुराना कर्ज अदा किया था। इसके बावजूद उस पर हजारों रुपये का कर्ज था। घर में केवल दो बोरियों में मात्र 50 किलो गेहूं था।
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अनिल इसी वजह से तीन चार दिन से मायूस व चिंतित रहता था। गुरुवार की रात जब परिजन सो गए तो उसने घर के पास लगे नीम के पेड़ में रस्सी से फांसी लगा कर जान दे दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने छानबीन कर परिवार से घटना के बारे में लिखित लिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इधर, राजस्व टीम भी किसान और उसके परिवार के बारे में छानबीन करा रही है।


अनिल का परिवार गरीबी रेखा के नीचे की श्रेणी में आता है। इसके बावजूद उसके नाम ग्राम पंचायत अधिकारी ने बीपीएल कार्ड नहीं बनवाया था। अगर कार्ड बना होता तो आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान के परिजनाें को भरण पोषण के लिए गेहूं, चावल तो कोटे से मिल जाता। अनिल के सामने यह भी एक बड़ा संकट था।

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