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ग्राम प्रधान की हत्या में दोषी को आजीवन कारावास
fatehpur
Updated Fri, 20 Apr 2018 11:17 PM IST
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फतेहपुर। ललौली थाने के मुत्तौर में करीब दो दशक पहले हुई ग्राम प्रधान की हत्या में दोषी को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जनपद न्यायाधीश ने मुआवजे की रकम का आधा हिस्सा मृतक की पत्नी को देने का भी आदेश दिया है।
घटना एक जनवरी 1999 की है। ललौली थाने के ओती गांव निवासी ग्राम प्रधान रामशरन सिंह बेटे धर्मेंद्र सिंह और भाई दीवान सिंह के साथ गांव से फतेहपुर के लिए निकले थे। तीनों मुत्तौर में एक पान की दुकान के पास खड़े हुए। अधिवक्ता के मुताबिक, वहां अभियुक्त शिवकरन सिंह, जय करन सिंह, दयाराम, लंबू यादव और एक अज्ञात पहले से घात लगाए मौजूद थे। मौका मिलते ही इन लोगों ने गोली चला दी। रामशरन सिंह के सीने में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। भीड़ ने अभियुक्तों को दौड़ा लिया। लंबू यादव और एक अज्ञात पकड़े गए और शिवकरन सिंह और जयकरन सिंह फरार हो गए। भीड़ से मारपीट में लंबू यादव और अज्ञात शख्स की मौत हो गई। इससे लंबू यादव व अज्ञात को चार्जशीट में नहीं रखा गया। एक अन्य अभियुक्त दयाराम की मुकदमे के विचारण के दौरान मौत हो गई।
यह मामला जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में विचाराधीन था। सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता ब्रजेश कुमार शुक्ल, सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल दुबे और पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बलिराज उमराव ने दलीलें पेश कीं। बहस को सुनते हुए और साक्ष्यों को मद्देनजर रखते हुए जनपद न्यायाधीश नीरज निगम ने शुक्रवार को जयकरन सिंह को आजीवन कारावास और एक लाख तीन हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुना दी। इसके साथ ही उन्होंने मुआवजे की रकम से आधी धनराशि मृतक रामशरन सिंह की पत्नी उर्मिला सिंह को देने का भी आदेश दिया। अधिवक्ता ने बताया कि इनमें चुनाव की रंजिश थी। दोषी पक्ष चुनाव हार गया था।
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घटना एक जनवरी 1999 की है। ललौली थाने के ओती गांव निवासी ग्राम प्रधान रामशरन सिंह बेटे धर्मेंद्र सिंह और भाई दीवान सिंह के साथ गांव से फतेहपुर के लिए निकले थे। तीनों मुत्तौर में एक पान की दुकान के पास खड़े हुए। अधिवक्ता के मुताबिक, वहां अभियुक्त शिवकरन सिंह, जय करन सिंह, दयाराम, लंबू यादव और एक अज्ञात पहले से घात लगाए मौजूद थे। मौका मिलते ही इन लोगों ने गोली चला दी। रामशरन सिंह के सीने में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। भीड़ ने अभियुक्तों को दौड़ा लिया। लंबू यादव और एक अज्ञात पकड़े गए और शिवकरन सिंह और जयकरन सिंह फरार हो गए। भीड़ से मारपीट में लंबू यादव और अज्ञात शख्स की मौत हो गई। इससे लंबू यादव व अज्ञात को चार्जशीट में नहीं रखा गया। एक अन्य अभियुक्त दयाराम की मुकदमे के विचारण के दौरान मौत हो गई।
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यह मामला जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में विचाराधीन था। सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता ब्रजेश कुमार शुक्ल, सहायक शासकीय अधिवक्ता अनिल दुबे और पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बलिराज उमराव ने दलीलें पेश कीं। बहस को सुनते हुए और साक्ष्यों को मद्देनजर रखते हुए जनपद न्यायाधीश नीरज निगम ने शुक्रवार को जयकरन सिंह को आजीवन कारावास और एक लाख तीन हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुना दी। इसके साथ ही उन्होंने मुआवजे की रकम से आधी धनराशि मृतक रामशरन सिंह की पत्नी उर्मिला सिंह को देने का भी आदेश दिया। अधिवक्ता ने बताया कि इनमें चुनाव की रंजिश थी। दोषी पक्ष चुनाव हार गया था।
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