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बेटियां होने के कारण श्यामा को ताना देता था पति
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फतेहपुर। शहर के शांतिनगर इलाके में मां और चार बेटियों के आत्महत्या की हृदयविदारक घटना के बाद इलाके में मातम का माहौल छाया रहा है। दस फिट की पक्की कोठरी में खाली पड़ी रही। तोड़े गए दरवाजे पर ताला लगा हुआ था। कमरे में परिवार की सारी गृहस्थी जैसे के तैसे पड़ी रही। कोठरी में कनस्टर की तली में चावल और दूसरे में आटा भरा हुआ था। यह देखते ही आर्थिक स्थित का अंदाजा लगाया जा सकता है। कोठरी में सब्जी नहीं दिखी। परिवार का कोई शख्स रविवार को कोठरी में गृहस्थी की ताकझांक को नहीं घुसा। महिला के मायके से आए लोग शनिवार शाम को ही लौट गए थे।
शांतिनगर फायर स्टेशन के पीछे रहने वाले रामभरोसे की प्रताड़ना से तंग आकर पत्नी श्यामा (40) ने बेटी पिंकी (21), प्रियंका(14), वर्षा (13)और रूबी (10) ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। उनके दो दिन बाद शनिवार को शव निकाले गए थे। छोटे से कमरे में एक दूसरे पर शव लिपटे मिले थे। मोहल्ले में घटना के
दूसरे सन्नाटे का माहौल रहा। पुलिस की मौजूदगी में शनिवार रात साढ़े आठ बजे परिवार के लोग भिटौरा घाट से अंतिम संस्कार के बाद वापस लौटे। उसके बाद शनिवार सुबह श्यामा के ससुर रामसागर, देवर रामआसरे, दिनेश, बबलू अस्थियां विसर्जन को भिटौरा करने पहुंचे। परिवार के लोग शाम को वापस आए। परिवार की महिलाएं
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दरवाजे पर बैठी दिखी। मौसिया सास गायत्री ने बताया कि श्यामा को सबसे पहले दो बेटे पैदा हुए थे। उनकी बीमारी से कुछ दिनों में ही मौत हो गई थी। उसके बाद दो जुड़वा बेटियां हुई थी। वह भी मर गई थी। जिसके बाद चार बेटियां हुई थी। बेटियां होने के कारण रामभरोसे अक्सर श्यामा को प्रताड़ित करता था। बेटियों समेत मर जाने
की बात कहता था। एक दशक से रामभरोसे ने कामकाज करना बंद कर दिया था। वह नशे की लत पूरी करने के लिए कबाड़ बीनता था। उससे मिलने वाले रुपयों से नशा करता था। घर आने पर पत्नी से गाली गलौज करता था। कमरे को श्यामा अंदर से बंद कर लेती थी। कभी रात को रामभरोसे पहुंचता था तो बाहर छप्पर के नीचे सो जाता
था। मोहल्ले की रहने वाली भाजपा नेत्री वंदना द्विवेदी ने बताया कि परिवार को गैस चूल्हा योजना के तहत दिलाया था। वह श्यामा की हर तरीके से मदद करने की कोशिश करती थी। मोहल्ले में आर्थिक रूप से सबसे तंगहाली में श्यामा गुजर बसर करती थी। उसे अब जान देने की जरूरत नहीं थी। अब उसकी बेटियां सब कुछ संभालने वाली थी। उसकी बेटियां होनाहार थी। वह पढ़ाई में अव्वल थी। बेटियों की प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रमाण पत्र, मार्कशीट सब कुछ बिखरा हुआ था।
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शांतिनगर फायर स्टेशन के पीछे रहने वाले रामभरोसे की प्रताड़ना से तंग आकर पत्नी श्यामा (40) ने बेटी पिंकी (21), प्रियंका(14), वर्षा (13)और रूबी (10) ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। उनके दो दिन बाद शनिवार को शव निकाले गए थे। छोटे से कमरे में एक दूसरे पर शव लिपटे मिले थे। मोहल्ले में घटना के
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दूसरे सन्नाटे का माहौल रहा। पुलिस की मौजूदगी में शनिवार रात साढ़े आठ बजे परिवार के लोग भिटौरा घाट से अंतिम संस्कार के बाद वापस लौटे। उसके बाद शनिवार सुबह श्यामा के ससुर रामसागर, देवर रामआसरे, दिनेश, बबलू अस्थियां विसर्जन को भिटौरा करने पहुंचे। परिवार के लोग शाम को वापस आए। परिवार की महिलाएं
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दरवाजे पर बैठी दिखी। मौसिया सास गायत्री ने बताया कि श्यामा को सबसे पहले दो बेटे पैदा हुए थे। उनकी बीमारी से कुछ दिनों में ही मौत हो गई थी। उसके बाद दो जुड़वा बेटियां हुई थी। वह भी मर गई थी। जिसके बाद चार बेटियां हुई थी। बेटियां होने के कारण रामभरोसे अक्सर श्यामा को प्रताड़ित करता था। बेटियों समेत मर जाने
की बात कहता था। एक दशक से रामभरोसे ने कामकाज करना बंद कर दिया था। वह नशे की लत पूरी करने के लिए कबाड़ बीनता था। उससे मिलने वाले रुपयों से नशा करता था। घर आने पर पत्नी से गाली गलौज करता था। कमरे को श्यामा अंदर से बंद कर लेती थी। कभी रात को रामभरोसे पहुंचता था तो बाहर छप्पर के नीचे सो जाता
था। मोहल्ले की रहने वाली भाजपा नेत्री वंदना द्विवेदी ने बताया कि परिवार को गैस चूल्हा योजना के तहत दिलाया था। वह श्यामा की हर तरीके से मदद करने की कोशिश करती थी। मोहल्ले में आर्थिक रूप से सबसे तंगहाली में श्यामा गुजर बसर करती थी। उसे अब जान देने की जरूरत नहीं थी। अब उसकी बेटियां सब कुछ संभालने वाली थी। उसकी बेटियां होनाहार थी। वह पढ़ाई में अव्वल थी। बेटियों की प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रमाण पत्र, मार्कशीट सब कुछ बिखरा हुआ था।