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सजायाफ्ता रामफल पर इनाम बढ़कर हुआ 25 हजार
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फतेहपुर। दो दशक पहले के दोहरा हत्याकांड में हाईकोर्ट से वांछित रामफल सिंह पर इनाम की राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। कुछ दिन बाद दोबारा जिले के कप्तान को हाईकोर्ट में पेश होना है। वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका है।
असोथर थाने के कुसुंभी निवासी नरेंद्र सिंह चौहान और उनके साथी अवधेश सिंह उर्फ उजा की 11 दिसंबर 2000 को गोली मारकर हत्या की गई थी। हत्याकांड थरियांव थाने के रमवां के पास हुआ था। इस मामले में सात आरोपियों में एक बिंदकी कोतवाली क्षेत्र का अलियाबाद गांव निवासी रामफल सिंह है। जिला कोर्ट से 2008 में
आजीवन कारावास होने के बाद 2009 में वह हाईकोर्ट से जमानत पर छूटा था। हाईकोर्ट ने बाद में जमानत का विरोध होने पर जमानत कैंसिल कर दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत को नामंजूर किया। जिला पुलिस को
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2015 में हाईकोर्ट ने आरोपी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। पर, चार साल बाद भी पुलिस रामफल तक पहुंच पाने में नाकाम है। इसके चलते तीन दिन पहले कप्तान को कोर्ट में पेश होना पड़ा था। कोर्ट से एसपी को एक हफ्ते का मौका मिला है।
बता दें कि रामफल पर पहली बार इनाम की घोषणा 31 अक्तूबर 2017 को हुई थी। उसके बाद राशि बढ़ती चली गई। अब उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित हुआ है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्त में लेने का दबाव बनाया है। उसके भाई मान सिंह को पुलिस ने मुठभेड़ में गिरफ्तार किया। उसके भाई ने जुबान तक नहीं खोली। जबकि
कई साल मान सिंह भाई रामफल के साथ गैरप्रांत में रहा है। सूत्रों के मुताबिक रामफल को एनकाउंटर का भय सता रहा है। उसे लगता है कि सरेंडर करने की भनक लगते ही पुलिस उसका एनकाउंटर कर देगी।
जिले की कई टीमें सालों से रामफल सिंह की खोज में लगी है। मामले को हाईकोर्ट ने संज्ञान में ले रखा है। इसी वजह से रामफल पुलिस अधिकारियों के गले की फांस बना है। आरोपी के गिरफ्तार न होने पर थानेदारों और टीम प्रभारियों की कुर्सी छिनने की घंटी बज रही है। सूत्रों के मुताबिक रामफल की लोकेशन देकर पकड़ाने वाले को पुलिस मनचाही रकम देने को तैयार है।
दोहरे हत्याकांड के पैरोकार वीरेंद्र सिंह चौहान (पूर्व अध्यक्ष छात्र संघ एमजी कालेज और कांग्रेस नेता) को जिले की पुलिस पर भरोसा नहीं है। उसने अपराधी को पकड़ने के लिए एसटीएफ लगाने की सिफारिश की है। उन्होंने बताया कि एसटीएफ के लिए डीजीपी को प्रार्थना पत्र दिया है।
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असोथर थाने के कुसुंभी निवासी नरेंद्र सिंह चौहान और उनके साथी अवधेश सिंह उर्फ उजा की 11 दिसंबर 2000 को गोली मारकर हत्या की गई थी। हत्याकांड थरियांव थाने के रमवां के पास हुआ था। इस मामले में सात आरोपियों में एक बिंदकी कोतवाली क्षेत्र का अलियाबाद गांव निवासी रामफल सिंह है। जिला कोर्ट से 2008 में
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आजीवन कारावास होने के बाद 2009 में वह हाईकोर्ट से जमानत पर छूटा था। हाईकोर्ट ने बाद में जमानत का विरोध होने पर जमानत कैंसिल कर दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत को नामंजूर किया। जिला पुलिस को
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2015 में हाईकोर्ट ने आरोपी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। पर, चार साल बाद भी पुलिस रामफल तक पहुंच पाने में नाकाम है। इसके चलते तीन दिन पहले कप्तान को कोर्ट में पेश होना पड़ा था। कोर्ट से एसपी को एक हफ्ते का मौका मिला है।
बता दें कि रामफल पर पहली बार इनाम की घोषणा 31 अक्तूबर 2017 को हुई थी। उसके बाद राशि बढ़ती चली गई। अब उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित हुआ है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्त में लेने का दबाव बनाया है। उसके भाई मान सिंह को पुलिस ने मुठभेड़ में गिरफ्तार किया। उसके भाई ने जुबान तक नहीं खोली। जबकि
कई साल मान सिंह भाई रामफल के साथ गैरप्रांत में रहा है। सूत्रों के मुताबिक रामफल को एनकाउंटर का भय सता रहा है। उसे लगता है कि सरेंडर करने की भनक लगते ही पुलिस उसका एनकाउंटर कर देगी।
जिले की कई टीमें सालों से रामफल सिंह की खोज में लगी है। मामले को हाईकोर्ट ने संज्ञान में ले रखा है। इसी वजह से रामफल पुलिस अधिकारियों के गले की फांस बना है। आरोपी के गिरफ्तार न होने पर थानेदारों और टीम प्रभारियों की कुर्सी छिनने की घंटी बज रही है। सूत्रों के मुताबिक रामफल की लोकेशन देकर पकड़ाने वाले को पुलिस मनचाही रकम देने को तैयार है।
दोहरे हत्याकांड के पैरोकार वीरेंद्र सिंह चौहान (पूर्व अध्यक्ष छात्र संघ एमजी कालेज और कांग्रेस नेता) को जिले की पुलिस पर भरोसा नहीं है। उसने अपराधी को पकड़ने के लिए एसटीएफ लगाने की सिफारिश की है। उन्होंने बताया कि एसटीएफ के लिए डीजीपी को प्रार्थना पत्र दिया है।