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दोहरे हत्याकांड में तीन को आजीवन कारावास
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फतेहपुर। मलवां थानाक्षेत्र के मीरपुर कुरुस्ती गांव में 10 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड में दोषियों को सजा सुना दी गई। प्रकरण में न्यायालय के समक्ष एक के बाद एक 12 गवाहों ने बयान दर्ज कराए। मंगलवार को अपर जिला जज विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने तीन मुख्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
मीरपुर कुरुस्ती गांव के ज्ञान सिंह की जमीन पर गांव के कुछ लोग कब्जा करना चाहते थे। पांच मार्च 2011 की शाम पौने पांच बजे जगरूप, सूर्यभान, राजाराम, महाबीर, रामसागर, वीरन, धनराज और कुलदीप ज्ञान सिंह की जमीन पर पहुंचे और नींव खोदकर कब्जा करने लगे।
ज्ञान सिंह के परिजन ने विरोध किया तो गोलियां चला दीं। जिसमें ज्ञान सिंह की मां सितलिया और भाई राम सिंह की मौत हो गई थी। परिवार की चंद्र रेखा, किरन देवी और अर्चना गंभीर रूप से घायल हो गईं थीं। पुलिस ने मौके से आरोपियों की लाइसेंसी बंदूक और कट्टा बरामद कर जेल भेजा था। तबसे प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था।
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वादी को न्याय दिलाने के लिए सहायक शासकीय अधिवक्ता कल्पना पांडेय और अपर सहायक शासकीय अधिवक्ता रघुराज सिंह पैरवी कर रहे थे। उन्होंने अदालत के समक्ष 12 गवाह प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान आरोपियों में से कुलदीप के नाबालिग होने से उसका प्रकरण जुवेनाइल कोर्ट को स्थानांतरित कर दिया गया।
वहीं, साक्ष्यों के अभाव में दोषसिद्घ न होने पर वीरन और धनराज को रिहा कर दिया। जबकि महाबीर और रामसागर को दो-दो साल और छह-छह महीने के सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया गया है।
वहीं, हत्याकांड के मुख्य मुल्जिम साबित हुए जगरूप, सूर्यभान और राजाराम को उम्रकैद और 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने जुर्माने की रकम वादी को दिए जाने का आदेेेश दिया। अधिवक्ता कल्पना पांडेय ने बताया कि मुल्जिम घटना के बाद से जेल में बंद थे, हाईकोर्ट से भी इनकी जमानत नहीं हुई थी।
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मीरपुर कुरुस्ती गांव के ज्ञान सिंह की जमीन पर गांव के कुछ लोग कब्जा करना चाहते थे। पांच मार्च 2011 की शाम पौने पांच बजे जगरूप, सूर्यभान, राजाराम, महाबीर, रामसागर, वीरन, धनराज और कुलदीप ज्ञान सिंह की जमीन पर पहुंचे और नींव खोदकर कब्जा करने लगे।
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ज्ञान सिंह के परिजन ने विरोध किया तो गोलियां चला दीं। जिसमें ज्ञान सिंह की मां सितलिया और भाई राम सिंह की मौत हो गई थी। परिवार की चंद्र रेखा, किरन देवी और अर्चना गंभीर रूप से घायल हो गईं थीं। पुलिस ने मौके से आरोपियों की लाइसेंसी बंदूक और कट्टा बरामद कर जेल भेजा था। तबसे प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन था।
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वादी को न्याय दिलाने के लिए सहायक शासकीय अधिवक्ता कल्पना पांडेय और अपर सहायक शासकीय अधिवक्ता रघुराज सिंह पैरवी कर रहे थे। उन्होंने अदालत के समक्ष 12 गवाह प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान आरोपियों में से कुलदीप के नाबालिग होने से उसका प्रकरण जुवेनाइल कोर्ट को स्थानांतरित कर दिया गया।
वहीं, साक्ष्यों के अभाव में दोषसिद्घ न होने पर वीरन और धनराज को रिहा कर दिया। जबकि महाबीर और रामसागर को दो-दो साल और छह-छह महीने के सश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया गया है।
वहीं, हत्याकांड के मुख्य मुल्जिम साबित हुए जगरूप, सूर्यभान और राजाराम को उम्रकैद और 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने जुर्माने की रकम वादी को दिए जाने का आदेेेश दिया। अधिवक्ता कल्पना पांडेय ने बताया कि मुल्जिम घटना के बाद से जेल में बंद थे, हाईकोर्ट से भी इनकी जमानत नहीं हुई थी।