जानलेवा साबित हो सकती है उमसभरी गर्मी
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उमसभरी गर्मी जानलेवा साबित हो सकती है। आद्रता बढ़ने के साथ एलर्जी से संबंधित रोगियों की संख्या में खासी बढ़ोतरी हो रही है। बुधवार को अकेले जिला अस्पताल मेें आधे से ज्यादा त्वचा संबंधी रोगों के पीड़ित मरीज आए। चिकित्सकों के मुताबिक इस समय, हाईब्लडप्रेशर, डायबिटीज, कार्डिएक मरीजों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। बढ़ती आद्रता के कारण अधिक पसीना बहने से शरीर में चीनी और पानी की मात्रा कम हो जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के साथ ही संक्रामक बीमारियों का खतरा पैदा हो सकता है। इसके साथ एलर्जी से संबंधित रोगियों की संख्या में खासी बढ़ोतरी हो रही है। जिला अस्पताल में एलर्जिक रोगियों की लाइन लग रही है। संक्रामक रोगियों का आना भी शुरू हो चुका है।
वर्तमान समय में आद्रता चरम पर है। ऐसे मौसम में सभी तरह के वैक्टीरिया अधिक प्रभावी हो जाते हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वैक्टीरिया प्रभावी होने से टायफायड, वायरल, मलेरिया, डायरिया, उल्टी-दस्त जैसी बीमारियां फैलने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें, तो यह मौसम एलर्जी से पैदा होने वाले चर्मरोगों को भी जन्म देता है। ऐसे में खुजली, एक्जिमा, चकत्ते पड़ना, लाल दाने निकलना आम बात होती है। थोड़ी सी चूक होने पर कोई भी व्यक्ति एलर्जिक या संक्रामक बीमारी की गिरफ्त में आ सकता है। ऐसे मौसम में शरीर से अधिक पसीना निकलता है, जिससे शरीर में चीनी और पानी की मात्रा कम हो जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक है।
इस तरह बरतें सावधानी
डाक्टरों का कहना है कि किसी भी हालत में शरीर में पानी की कमी न होने दें। वरिष्ठ फिजीशियन डा. एसके सिंह का कहना है कि आद्रता बढ़ने के साथ सभी तरह के वैक्टीरिया प्रभावी हो जाते हैं, जिससे तरह-तरह की संक्रामक बीमारियां फै लने की आशंका प्रबल हो जाती है। उनका कहना कि ऐसे मौसम में अधिक से अधिक पानी पीएं, शाम और सुबह स्नान करें, साफ सुथरे कपड़े पहनें, धूप में कम से कम निकलने का प्रयास करें। साफ सुथरे फल, ताजा भोजन का सेवन करें। बासी और कटे, सड़े फलों के सेवन से बचें। धूम में निकले से बचने का प्रयास करें।