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पहले दिन गेहूं खरीद की बोहनी तक नहीं
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बहुआ क्रय केंद्र का निरीक्षण करते डिप्टी आरएमओ अविनाश झा। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। आधी-अधूरी व्यवस्थाओं के बीच शुक्रवार से 45 केंद्रों पर गेहूूं की खरीद शुरू हो गई है। ज्यादातर क्रय केंद्रों पर अव्यवस्थाएं देखने को मिलीं। केंद्र प्रभारियों ने गेहूं खरीद के बैनर तो लगा दिए हैं, लेकिन बोरियां व इलेक्ट्रानिक कांटा कई केंद्रों पर नहीं हैं। हालांकि पहले दिन किसी भी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए किसान नहीं आए।
गेहूं खरीद के लिए विपणन शाखा के 17 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें थोड़ी-थोड़ी बोरियां भेेज दी गई हैं। पीसीएफ और भारतीय खाद्य निगम के किसी भी क्रय केंद्र पर बोरियां नहीं है। केंद्र प्रभारी बैनर लगाकर गेहूं खरीदने की तैयारी पूरी होने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन जब बोरियों की बात की जाती है तो कहते हैं कि अभी क्रय केंद्र पर गेहूं आने में समय है, तब तक बोरियां आ जाएंगी। पीसीएफ के 26 क्रय केंद्र हैं। एक भी क्रय केंद्र पर बोरियां नहीं हैं। भारतीय खाद्य निगम के दो क्रय केंद्रों पर भी धान की बोरियां नहीं हैं।
जिले में गेहूं कटाई अब यदाकदा शुरू हुई है। इन दिनों बाजार में गेहूं की कीमत सरकारी रेट के बराबर ही है। पिछले महीने गेहूं के दाम 2250 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। अब समर्थन मूल्य 2015 रुपये के आसपास ही बाजार में व्यापारी तौल करा रहे हैं। इसका असर इस बार सरकारी खरीद केंद्रों में पड़ सकता है। क्रय केंद्र में गेहूं बेचने के बाद किसानों को हफ्ते भर से अधिक रुपये के लिए इंतजार करना पड़ता है। वहीं मंडी में गेहूं की तौल कराने वाले आढ़ती किसानों को तुरंत रुपये देते हैं।
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गेहूं खरीद के लिए विपणन शाखा के 17 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें थोड़ी-थोड़ी बोरियां भेेज दी गई हैं। पीसीएफ और भारतीय खाद्य निगम के किसी भी क्रय केंद्र पर बोरियां नहीं है। केंद्र प्रभारी बैनर लगाकर गेहूं खरीदने की तैयारी पूरी होने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन जब बोरियों की बात की जाती है तो कहते हैं कि अभी क्रय केंद्र पर गेहूं आने में समय है, तब तक बोरियां आ जाएंगी। पीसीएफ के 26 क्रय केंद्र हैं। एक भी क्रय केंद्र पर बोरियां नहीं हैं। भारतीय खाद्य निगम के दो क्रय केंद्रों पर भी धान की बोरियां नहीं हैं।
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जिले में गेहूं कटाई अब यदाकदा शुरू हुई है। इन दिनों बाजार में गेहूं की कीमत सरकारी रेट के बराबर ही है। पिछले महीने गेहूं के दाम 2250 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। अब समर्थन मूल्य 2015 रुपये के आसपास ही बाजार में व्यापारी तौल करा रहे हैं। इसका असर इस बार सरकारी खरीद केंद्रों में पड़ सकता है। क्रय केंद्र में गेहूं बेचने के बाद किसानों को हफ्ते भर से अधिक रुपये के लिए इंतजार करना पड़ता है। वहीं मंडी में गेहूं की तौल कराने वाले आढ़ती किसानों को तुरंत रुपये देते हैं।
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