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फतेहपुरः चर्च की जमीन पर इस तरह हुआ खेल, अफसर और भूमाफियाओं की अटकी सांसें
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 09 Jun 2018 10:36 PM IST
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चर्च की जमीन पर बनी बस्ती
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के फतेहपुर जिले में शहर के देवीगंज में चर्च की बेशकीमती जमीन को मनमाने तरीके से बेचने-खरीदने के मामले में अफसर और भूमाफिया दोनों की सांसें अटक गई हैं। कोतवाली में एफआईआर के बाद अब अफसरों के निलंबन का सिलसिला शुरू है। अब तक कोतवाल, कानूनगो, दो लेखपाल निलंबित हो चुके हैं। तत्कालीन सब रजिस्ट्रार के निलंबन की संस्तुति की गई है।
नायब तहसीलदार रमेश चंद्र पांडेय की ओर से दी गई तहरीर पर रिपोर्ट लिखी गई है। उसमें कहा गया है कि यूनियन मिशनरी सोसाइटी व एहतमाम उत्तर प्रदेश सरकार जरिए फतेहपुर कलेक्टर के नाम अंकित जमीन पर भूमाफिया फर्जी तरीके से काबिज हैं। अधिकारियों की मिलीभगत से इसे बेचा व खरीदा गया। जमीन के अभिलेखों के हेराफेरी के दौरान जिले में तैनात रहे उपनिबंधक सदर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, 19 क्रेता, विक्रेता और अन्य दोषी कर्मी जो मामले में लिप्त हैं, सभी पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
कोतवाली में एफआईआर दर्ज होने के बाद इस मामले में शहर कोतवाल आरके सिंह, कानूनगो राजेंद्र सिंह पटेल, लेखपाल राजेंद्र प्रसाद सिंह यादव व लेखपाल ओम प्रकाश विश्वकर्मा को निलंबित कर दिया गया है। तत्कालीन सब रजिस्ट्रार धर्मेंद्र चौधरी के निलंबन की संस्तुति उनके विभाग को की गई है। जिले में 55 वर्ष में सदर तहसील में तैनात हुए लेखपाल, कानूनगो, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और उपजिलाधिकारियों की सूची बनाई जा रही है।
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नायब तहसीलदार रमेश चंद्र पांडेय की ओर से दी गई तहरीर पर रिपोर्ट लिखी गई है। उसमें कहा गया है कि यूनियन मिशनरी सोसाइटी व एहतमाम उत्तर प्रदेश सरकार जरिए फतेहपुर कलेक्टर के नाम अंकित जमीन पर भूमाफिया फर्जी तरीके से काबिज हैं। अधिकारियों की मिलीभगत से इसे बेचा व खरीदा गया। जमीन के अभिलेखों के हेराफेरी के दौरान जिले में तैनात रहे उपनिबंधक सदर, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, 19 क्रेता, विक्रेता और अन्य दोषी कर्मी जो मामले में लिप्त हैं, सभी पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
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कोतवाली में एफआईआर दर्ज होने के बाद इस मामले में शहर कोतवाल आरके सिंह, कानूनगो राजेंद्र सिंह पटेल, लेखपाल राजेंद्र प्रसाद सिंह यादव व लेखपाल ओम प्रकाश विश्वकर्मा को निलंबित कर दिया गया है। तत्कालीन सब रजिस्ट्रार धर्मेंद्र चौधरी के निलंबन की संस्तुति उनके विभाग को की गई है। जिले में 55 वर्ष में सदर तहसील में तैनात हुए लेखपाल, कानूनगो, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और उपजिलाधिकारियों की सूची बनाई जा रही है।
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बेघर होने के डर से बाशिंदे परेशान
चर्च की जमीन पर बस्ती
- फोटो : अमर उजाला
प्रथम दृष्टया प्रशचासन की ओर से कोतवाली में एफआईआर कराने के बाद ऐसे दागी अफसरों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन्होंने भूमाफियाओं से सांठगांठ करके चर्च की जमीन का बंदरबांट किया। प्रकरण में शनिवार को भी दागी अधिकारियों और कर्मचारियों की तलाश जारी रही। विभागीय सूत्रों की मानें तो तकरीबन 27 नायब, 33 तहसीलदार, सात उपजिलाधिकारी और लगभग दो दर्जन से अधिक उप निबंधक कार्रवाई की जद में है। अधिकारी पड़ताल में लगे हैं ताकि 1963 से अब तक तैनात अधिकारियों के चर्च की जमीन के संबंध में उत्तरदायित्व निर्धारित किए जा सकें। पुलिस की विवेचना भी इन्हीं बिंदुओं तक पहुंचनी है, जिससे पता चल सके, किस अधिकारी की जमीन के मसले में क्या भूमिका रही।
इन आरोपों में दर्ज हुई रिपोर्ट
चर्च की विवादित जमीन के प्रकरण में पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराएं 419 व 420 तथा कूटरचना की धाराएं 467, 468 व 471 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज की है।
यह थी शिकायत
कृषि राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप उर्फ धुन्नी सिंह ने मुख्यमंत्री को शिकायत कर बताया था कि शहर के देवीगंज में मिशनरी की जमीन कस्बा फतेहपुर की खाता संख्या 576 के गाटा संख्या 2244 और 2252 और भिखारीपुर खाता संख्या 10 के गाटा नंबर 20 की भूमि को राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर बेच दिया गया है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि यह जमीन वूमेंस यूनियन मिशनरी सोसाइटी ए एहतमाम उत्तर प्रदेश सरकार जरिए कलेक्टर फतेहपुर के अधिकार में थी। जिसे अफसरों व भूमाफिया ने सांठगांठ करके बेचा।
बेघर होने के डर से बाशिंदे परेशान
चर्च की जमीन विवादित होने का प्रकरण उजागर होने और इससे जुड़े लोगों पर कार्रवाई होने से स्थानीय बाशिंदे चिंतित हैं। यहां के बाशिंदे इस बात से चिंतित हैं कि उनके साथ क्या होने वाला है। जिस विवादित जमीन की बता हो रही है मौजूदा समय यहां कई हास्पिटल, होटल और कार्मिशियल भवन संचालित हैं। साथ ही तकरीबन डेढ़ सौ से अधिक घर बने हैं। कार्रवाई के मुताबिक चर्च की जमीन के सभी अवैध कब्जे हटाए जाएंगे। जिससे कई लोग घर से बेघर हो सकते हैं। स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।
डीएम ने विवेचना में संबंधित अभिलेख मांगे
समीक्षा बैठक में डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने एसडीएम सदर प्रेम प्रकाश तिवारी और एडीएम जेपी गुप्ता से चर्च प्रकरण में पूछताछ की। डीएम ने कहा कि यदि निर्माण अवैध हैं और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत है तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने चर्च प्रकरण को समझने के बाद एफआईआर में पुलिस का सहयोग करने के निर्देश दिए और विवेचना में संबंधित अभिलेख देने को कहा।
इन आरोपों में दर्ज हुई रिपोर्ट
चर्च की विवादित जमीन के प्रकरण में पुलिस ने धोखाधड़ी की धाराएं 419 व 420 तथा कूटरचना की धाराएं 467, 468 व 471 आईपीसी के तहत एफआईआर दर्ज की है।
यह थी शिकायत
कृषि राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप उर्फ धुन्नी सिंह ने मुख्यमंत्री को शिकायत कर बताया था कि शहर के देवीगंज में मिशनरी की जमीन कस्बा फतेहपुर की खाता संख्या 576 के गाटा संख्या 2244 और 2252 और भिखारीपुर खाता संख्या 10 के गाटा नंबर 20 की भूमि को राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर बेच दिया गया है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि यह जमीन वूमेंस यूनियन मिशनरी सोसाइटी ए एहतमाम उत्तर प्रदेश सरकार जरिए कलेक्टर फतेहपुर के अधिकार में थी। जिसे अफसरों व भूमाफिया ने सांठगांठ करके बेचा।
बेघर होने के डर से बाशिंदे परेशान
चर्च की जमीन विवादित होने का प्रकरण उजागर होने और इससे जुड़े लोगों पर कार्रवाई होने से स्थानीय बाशिंदे चिंतित हैं। यहां के बाशिंदे इस बात से चिंतित हैं कि उनके साथ क्या होने वाला है। जिस विवादित जमीन की बता हो रही है मौजूदा समय यहां कई हास्पिटल, होटल और कार्मिशियल भवन संचालित हैं। साथ ही तकरीबन डेढ़ सौ से अधिक घर बने हैं। कार्रवाई के मुताबिक चर्च की जमीन के सभी अवैध कब्जे हटाए जाएंगे। जिससे कई लोग घर से बेघर हो सकते हैं। स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।
डीएम ने विवेचना में संबंधित अभिलेख मांगे
समीक्षा बैठक में डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने एसडीएम सदर प्रेम प्रकाश तिवारी और एडीएम जेपी गुप्ता से चर्च प्रकरण में पूछताछ की। डीएम ने कहा कि यदि निर्माण अवैध हैं और अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत है तो नियमानुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने चर्च प्रकरण को समझने के बाद एफआईआर में पुलिस का सहयोग करने के निर्देश दिए और विवेचना में संबंधित अभिलेख देने को कहा।
कृषि राज्यमंत्री ने विरोधी पक्ष के आरोपों को बताया काल्पनिक
चर्च के बीच की टूटी बाउंड्री
- फोटो : अमर उजाला
विवादित जमीन की गाटा संख्या-20 की शिकायत पर हुई कार्रवाइयों के बाद विक्रेता पक्ष शनिवार को सामने आया है। मीडिया के सामने अपने साक्ष्य प्रस्तुत कर कार्रवाई को गलत ठहराया है।
यूनाइटेड चर्च ऑफ नार्दन इंडिया की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र कुमार मिश्र और सुशील मिश्र ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गाटा संख्या 20 पर अधिकार उन्हें न्यायालय ने दिया है। आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप धुन्नी सिंह अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। कहा कि जिन लोगों के आधार पर यह कार्रवाई बताई जा रही है, वही लोग अदालत में उनके पक्ष में समझौते का हलफनामा दे चुके हैं। कहा कि एफआईआर गलत की गई है। इस संबंध में हाईकोर्ट जाएंगे।
अधिवक्ता राजेंद्र कुमार मिश्रा के मुताबिक
- 1940 में बोर्ड ऑफ फॉरेन मिशन और इंडियन प्रेस बिटेरियन चर्च के बीच मुकदमा चला, जिसमें फॉरेन मिशन को जमीन का मालिक घोषित किया गया।
- 1946 में बोर्ड ऑफ फॉरेन मिशन ने डब्लू ई सी संस्था को जमीन बेची। संस्था ने 1963 में पारसी एडबिल लियॉल को जमीन बेची। लियॉल ने एसडीएम से 10 बीघा 8 बिस्वा जमीन का दाखिल खारिज करा लिया।
- 1963 में ही चर्च ने लियॉल पर डब्लू ई सी से गलत जमीन लेने का मुकदमा किया। जिसमें 1964 में फैसला सुनाते हुए अदालत ने लियॉल को सही ठहराया।
- 1975 में बोर्ड ऑफ फॉरेन मिशन ने एसडीएम की अदालत में 33/49 का मुकदमा किया। जिसमें बोल्डन ऑफ साहब बहादुर का नाम हटाकर अपना नाम दर्ज कराने की अपील की।
- चार अगस्त 1975 को एसडीएम की अदालत ने नाम बदलने के आदेश दिए।
- 1978 में फॉरेन मिशन ने अदालत में दीवानी वाद कर उनके विरुद्ध लड़ रहे सभी पक्षों के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत किया। चर्च के लोगों ने 1995 में मिशन के पक्ष में हलफनामा लगा दिया।
- 2005 में न्यायालय ने बोर्ड ऑफ फॉरेन मिशन के पक्ष में फैसला करते हुए उसे जमीन का हकदार घोषित कर दिया।
कृषि राज्यमंत्री ने विरोधी पक्ष के आरोपों को बताया काल्पनिक
विरोधी पक्ष जो भी आरोप लगा रहा है, वह काल्पनिक आरोप हैं। ‘मेरे पास इस प्रकरण से जुड़े लोग शिकायत करने आए थे, इस वजह से तहकीकात के बाद मैंने शासन में इसकी शिकायत की। अब जो कार्रवाई हो रही है कि वह शासन स्तर से गठित कमेटी की जांच के बाद हो रही है। इसमें उनका कोई हस्तक्षेप नहीं है।
यूनाइटेड चर्च ऑफ नार्दन इंडिया की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र कुमार मिश्र और सुशील मिश्र ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गाटा संख्या 20 पर अधिकार उन्हें न्यायालय ने दिया है। आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप धुन्नी सिंह अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। कहा कि जिन लोगों के आधार पर यह कार्रवाई बताई जा रही है, वही लोग अदालत में उनके पक्ष में समझौते का हलफनामा दे चुके हैं। कहा कि एफआईआर गलत की गई है। इस संबंध में हाईकोर्ट जाएंगे।
अधिवक्ता राजेंद्र कुमार मिश्रा के मुताबिक
- 1940 में बोर्ड ऑफ फॉरेन मिशन और इंडियन प्रेस बिटेरियन चर्च के बीच मुकदमा चला, जिसमें फॉरेन मिशन को जमीन का मालिक घोषित किया गया।
- 1946 में बोर्ड ऑफ फॉरेन मिशन ने डब्लू ई सी संस्था को जमीन बेची। संस्था ने 1963 में पारसी एडबिल लियॉल को जमीन बेची। लियॉल ने एसडीएम से 10 बीघा 8 बिस्वा जमीन का दाखिल खारिज करा लिया।
- 1963 में ही चर्च ने लियॉल पर डब्लू ई सी से गलत जमीन लेने का मुकदमा किया। जिसमें 1964 में फैसला सुनाते हुए अदालत ने लियॉल को सही ठहराया।
- 1975 में बोर्ड ऑफ फॉरेन मिशन ने एसडीएम की अदालत में 33/49 का मुकदमा किया। जिसमें बोल्डन ऑफ साहब बहादुर का नाम हटाकर अपना नाम दर्ज कराने की अपील की।
- चार अगस्त 1975 को एसडीएम की अदालत ने नाम बदलने के आदेश दिए।
- 1978 में फॉरेन मिशन ने अदालत में दीवानी वाद कर उनके विरुद्ध लड़ रहे सभी पक्षों के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत किया। चर्च के लोगों ने 1995 में मिशन के पक्ष में हलफनामा लगा दिया।
- 2005 में न्यायालय ने बोर्ड ऑफ फॉरेन मिशन के पक्ष में फैसला करते हुए उसे जमीन का हकदार घोषित कर दिया।
कृषि राज्यमंत्री ने विरोधी पक्ष के आरोपों को बताया काल्पनिक
विरोधी पक्ष जो भी आरोप लगा रहा है, वह काल्पनिक आरोप हैं। ‘मेरे पास इस प्रकरण से जुड़े लोग शिकायत करने आए थे, इस वजह से तहकीकात के बाद मैंने शासन में इसकी शिकायत की। अब जो कार्रवाई हो रही है कि वह शासन स्तर से गठित कमेटी की जांच के बाद हो रही है। इसमें उनका कोई हस्तक्षेप नहीं है।