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कनाडा से छोड़ी पौने दो लाख रुपए की नौकरी, बने प्रधान
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खागा। कनाडा स्थित जेनेक्स कंपनी में कम्प्यूटर साफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी। महीने में एक लाख 75 हजार रुपए सैलरी होने के बावजूद युवक ने गांव वापस आकर प्रधान पद पर चुनाव लड़ा और विजयी भी हुआ। उन्होंने बताया कि उनके पिता गांव के प्रधान रह चुके हैं। अब वह इस दुनिया में नहीं है। इसलिए वह पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए नौकरी छोड़कर गांव आए हैं।
ऐरायां ब्लाक की ग्राम पंचायत ऐराया सादात ने फरमानुल हक ने 46 वोटों से जीत दर्ज की है। फरमानुल हक एमसीए व एमबीए करके कनाडा की जेनेक्स कंपनी में बतौर कंप्यूटर साफ्टवेयर इंजीनियर काम कर रहे थे। करीब 13 साल तक काम करने बाद पिछले साल ही वह लौटकर अपने गांव आ गए। उनकी पिता की मौत करीब तीन साल पहले हुई थी, जिसके बाद पारिवारिक जिम्मेदारी फरमानुल के ऊपर आ गई थी।
जीत हासिल करने के बाद उन्होंने बताया कि उनके पिता फिजाउल हक गांव के प्रधान रह चुके हैं। उनके निधन के बाद ऐसा लगा कि गांव आकर उनके अधूरे सपनों को पूरा करना चाहिए। पिता की अधूरी इच्छा के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ दी और गांव आकर लोगों से मिला और समर्थन मांगा। सकारात्मक विचार मिले तो वह चुनाव में आए और जनता ने उन्हें जीत दिलाई है।
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ऐरायां ब्लाक की ग्राम पंचायत ऐराया सादात ने फरमानुल हक ने 46 वोटों से जीत दर्ज की है। फरमानुल हक एमसीए व एमबीए करके कनाडा की जेनेक्स कंपनी में बतौर कंप्यूटर साफ्टवेयर इंजीनियर काम कर रहे थे। करीब 13 साल तक काम करने बाद पिछले साल ही वह लौटकर अपने गांव आ गए। उनकी पिता की मौत करीब तीन साल पहले हुई थी, जिसके बाद पारिवारिक जिम्मेदारी फरमानुल के ऊपर आ गई थी।
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जीत हासिल करने के बाद उन्होंने बताया कि उनके पिता फिजाउल हक गांव के प्रधान रह चुके हैं। उनके निधन के बाद ऐसा लगा कि गांव आकर उनके अधूरे सपनों को पूरा करना चाहिए। पिता की अधूरी इच्छा के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ दी और गांव आकर लोगों से मिला और समर्थन मांगा। सकारात्मक विचार मिले तो वह चुनाव में आए और जनता ने उन्हें जीत दिलाई है।
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