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Fatehpur News: गोधरौली समेत पांच गांवों के लोगों को क्रोमियम कर रहा बीमार
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फतेहपुर। जनपद के गोधरौली समेत पांच गांवों में क्रोमियम कचरा लोगों को बीमार कर रहा है।
गांव में दो साल पहले फैक्टरियों से निकलने वाले क्रोमियम को तालाबों में फेंका जाता था। इस रसायन के भूमिगत जल में मिलने से कई गांवों का पानी दूषित हो गया है। इससे कई लोग कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। यह मुद्दा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में उठाया गया है। मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) ने एनजीटी को रिपोर्ट सौंपी है।
26 नवंबर को एक अंतरिम रिपोर्ट में एमिकस क्यूरी कात्यायनी ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यूपी जल निगम व मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ उन्होंने जनपद के कई स्थानों का दौरा किया। इस दौरान जनपद में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं मिले। मिट्टी और भूजल में क्रोमियम प्रदूषण की समस्या पाई गई, जिसे तत्काल हल करने की आवश्यकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक जनपद कई पर्यावरणीय मुद्दों से जूझ रहा है। ठोस और प्लास्टिक कचरे की डंपिंग, बंद नालियां, खतरनाक रसायन और स्वच्छ पेयजल की कमी है। इससे निपटने के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा व बुनियादी ढांचे की कमी है। रिपोर्ट में जनपद में भारी धातुओं (क्रोमियम और राख) से दूषित स्थलों की मैपिंग और पहचान कराने समेत कई जरूरी मुद्दों पर कदम उठाने की सिफारिश की गई है।
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गांव में दो साल पहले फैक्टरियों से निकलने वाले क्रोमियम को तालाबों में फेंका जाता था। इस रसायन के भूमिगत जल में मिलने से कई गांवों का पानी दूषित हो गया है। इससे कई लोग कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। यह मुद्दा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में उठाया गया है। मामले में एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) ने एनजीटी को रिपोर्ट सौंपी है।
26 नवंबर को एक अंतरिम रिपोर्ट में एमिकस क्यूरी कात्यायनी ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यूपी जल निगम व मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ उन्होंने जनपद के कई स्थानों का दौरा किया। इस दौरान जनपद में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं मिले। मिट्टी और भूजल में क्रोमियम प्रदूषण की समस्या पाई गई, जिसे तत्काल हल करने की आवश्यकता है।
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रिपोर्ट के मुताबिक जनपद कई पर्यावरणीय मुद्दों से जूझ रहा है। ठोस और प्लास्टिक कचरे की डंपिंग, बंद नालियां, खतरनाक रसायन और स्वच्छ पेयजल की कमी है। इससे निपटने के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा व बुनियादी ढांचे की कमी है। रिपोर्ट में जनपद में भारी धातुओं (क्रोमियम और राख) से दूषित स्थलों की मैपिंग और पहचान कराने समेत कई जरूरी मुद्दों पर कदम उठाने की सिफारिश की गई है।
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