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Fatehpur News: ठंड में बच्चों की बढ़ेगी परेशानी, निमोनिया का खतरा

Mon, 11 Nov 2024 12:26 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 11 Nov 2024 12:26 AM IST
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Children's problems will increase in cold, risk of pneumonia
फतेहपुर। सर्दी आते ही बच्चों में निमोनिया का खतरा बढ़ गया है। यही वजह है कि ठंड की शुरुआत होते ही जिला अस्पताल में निमोनिया के केस आने लगे हैं। नवंबर में सर्दी की शुरुआत में ही दो केस आ चुके हैं। दिसंबर और जनवरी के दिनों में यह संख्या बढ़ने की पूरी आशंका है।
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इस साल भी ज्यादा ठंड के दौरान रोजाना औसतन एक-दो केस आ सकते हैं। यानी पूरे सीजन में यह आंकड़ा 50-60 पहुंच सकता है। समय से इलाज न मिलने पर यह प्राणघातक हो सकता है। धाता में गुरुवार को निमोनिया से डेढ़ साल की एक बच्ची की मौत हुई है।
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मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि सर्दी के मौसम में बच्चों ही नहीं, बड़ों को भी निमोनिया की दिक्कत हो सकती है। हालांकि बड़ों में रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है। इसलिए बड़ों में बहुत कम और बच्चों में ज्यादा होता है। इस समय वायु में आद्रता होती है। इससे सर्दी-जुकाम ज्यादा होता है। सर्दी-जुकाम से इंफेक्शन फेफड़ों तक पहुंच जाता है। इससे निमोनिया होने की आशंका बन जाती है। बच्चों में वायरल, आरएसवी और बैक्टीरियल इंफेक्शन ज्यादा होता है। वहीं बड़ों में टीबी के मरीजों को फंगल और एचआईवी, लीवर व स्वास के मरीजों को पैरासिटिक इंफेक्शन होता है। निमोनिया होने पर सर्दी-जुकाम के साथ गले में खरास, छींक आना व नाक से पानी आने जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे लक्षण होने पर तत्काल डॉक्टर से तत्काल परामर्श लेना चाहिए। अनदेखी करने पर यह जान के लिए खतरनाक हो सकता है।
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इनसेट--
थोेड़ी सी चूक बच्चों के लिए पड़ सकती है भारी
डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि ठंड के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही बच्चों के लिए भारी पड़ सकती है। सर्दियों में बच्चों को छह लेयर कपड़े पहनाना चाहिए। उनके हाथ, पैर और सिर पूरी तरह से ढके होने चाहिए। बच्चों के लिए ठंड से ज्यादा हवा नुकसानदायक है। इसलिए बच्चों को बंद कमरे में बिना पंखा चलाए सुलाना चाहिए। हवा दरवाजे और खिड़की कहीं से भी नहीं आनी चाहिए। हो सके तो बच्चों के कमरे में स्लाइडर वाले दरवाजे और खिड़की लगवानी चाहिए। क्योंकि दरवाजे और खिड़की खोलने से लगने वाली हवा तक नुकसानदायक है। इस तरह हल्की सी हवा लगने से भी बच्चों को निमोनिया हो सकता है।



निमोनिया रोकने में वैक्सीन कारगर, फिर भी बचाव जरूरी
बच्चों के जन्म के बाद लगने वाली पेंटावैलेंट वैक्सीन में निमोनिया की वैक्सीन शामिल होती है। या अलग से हिब वैक्सीन लगवाई जा सकती है। जिन बच्चों को वैक्सीन लगती है उन्हें वायरल इंफेक्शन से होने वाली निमोनिया होने की संभावना 99 फीसदी कम हो जाती है। हालांकि अन्य कारकों से होने वाली निमोनिया फिर भी हो सकती है। आरएसवी (रेस्पेरेटरी सिंसियल वायरस) से होने वाली निमोनिया का दुनिया में कहीं इलाज नहीं है। इसमें कुछ ही घंटों में मौत की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए वैक्सीन लगने के बाद भी सावधानी जरूरी है।

- बरतें ये सावधानियां
1. बच्चों को ठंड से बचाएं, उन्हें सात लेयर कपड़े पहनाकर रखें।
2. बच्चों को ठंडे पानी से न नहलाएं, उन्हें हवा के संपर्क से भी बचाएं।
3. जन्म के बाद ही बच्चों का टीकाकरण जरूर करवाएं।
4. सर्दी-जुकाम होने पर डॉक्टर को तत्काल दिखाएं और परामर्श लें।
5. ठंड के मौसम में बच्चों को बंद कमरे में रखें और सुलाएं।
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