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दुर्दशा पर आंसू बहा रहा रोडवेज बसअड्डा
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बिंदकी। कई वर्षों से नगर के रोडवेज बस अड्डे से बसों का संचालन बंद है। चालक सड़क पर ही बसों को खड़ी करके सवारियों को उतारते और बैठाते हैं।
अब यात्री भी सड़क पर ही खड़े होकर बसों का इंतजार करने लगे हैं। इससे बस अड्डा वीरान हो गया है।
नगर के महरहा रोड में रोडवेज बस अड्डा है। यहां से बांदा, कानपुर, घाटमपुर,
हमीरपुर, पुखरायां, उन्नाव, प्रयागराज रूट के लिए करीब 50 बसें चलती हैं। करीब एक हजार से अधिक मुसाफिर बसों से सफर करते हैं। परिवहन निगम के
अधिकारियों की अनदेखी के कारण एक-एक करके कर्मचारियों को हटा लिया गया है। अब बस अड्डा में कर्मचारी भी नहीं हैं। जिन यात्रियों को सफर करना होता है, उनको सड़क पर ही खड़े होकर बसों का इंतजार करना मजबूरी बन गई है।
अधिकारियों की अनेदखी से बस अड्डा परिसर के भवन जर्जर हो गए हैं, बाउंड्रीवाल टूट गई हैं। बिजली, शौचालय पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। व्यापारी
रामकिशन गुप्ता, सनद अवस्थी, नवीन तिवारी, सिद्धनाथ तिवारी, गोलू गुप्ता ने बताया कि शाम ढलते ही बस स्टॉप परिसर अंधेरे में डूब जाता है। कई बार बस
अड्डे के जीर्णोद्धार का मुद्दा उठाया गया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। एआरएम एमएल केशरवानी ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण बिंदकी बस
अड्डा में कर्मचारियों की तैनाती नहीं कराई जा रही है। बिंदकी बस अड्डा से फतेहपुर डिपो की बसें नहीं चलती हैं, जिस कारण से डिपो को राजस्व भी नहीं मिलता है।
व्यापारी संतोष कुमार ने बताया कि शाम ढलते ही बस अड्डा के अंदर अराजकतत्वों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। अधिकारी इसकी पूरी अनदेखी किए हैं। जबकि 50 से अधिक रोज बसों का आवागमन होता है।
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अनूप कुमार ने बताया कि सफर करने के लिए बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों को पीने के पानी, शौचालय की दिक्कत होती है। बस अड्डा में जो शौचालय बने हैं, वह खंडहर में बदल गए हैं।
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अब यात्री भी सड़क पर ही खड़े होकर बसों का इंतजार करने लगे हैं। इससे बस अड्डा वीरान हो गया है।
नगर के महरहा रोड में रोडवेज बस अड्डा है। यहां से बांदा, कानपुर, घाटमपुर,
हमीरपुर, पुखरायां, उन्नाव, प्रयागराज रूट के लिए करीब 50 बसें चलती हैं। करीब एक हजार से अधिक मुसाफिर बसों से सफर करते हैं। परिवहन निगम के
अधिकारियों की अनदेखी के कारण एक-एक करके कर्मचारियों को हटा लिया गया है। अब बस अड्डा में कर्मचारी भी नहीं हैं। जिन यात्रियों को सफर करना होता है, उनको सड़क पर ही खड़े होकर बसों का इंतजार करना मजबूरी बन गई है।
अधिकारियों की अनेदखी से बस अड्डा परिसर के भवन जर्जर हो गए हैं, बाउंड्रीवाल टूट गई हैं। बिजली, शौचालय पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। व्यापारी
रामकिशन गुप्ता, सनद अवस्थी, नवीन तिवारी, सिद्धनाथ तिवारी, गोलू गुप्ता ने बताया कि शाम ढलते ही बस स्टॉप परिसर अंधेरे में डूब जाता है। कई बार बस
अड्डे के जीर्णोद्धार का मुद्दा उठाया गया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। एआरएम एमएल केशरवानी ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण बिंदकी बस
अड्डा में कर्मचारियों की तैनाती नहीं कराई जा रही है। बिंदकी बस अड्डा से फतेहपुर डिपो की बसें नहीं चलती हैं, जिस कारण से डिपो को राजस्व भी नहीं मिलता है।
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व्यापारी संतोष कुमार ने बताया कि शाम ढलते ही बस अड्डा के अंदर अराजकतत्वों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। अधिकारी इसकी पूरी अनदेखी किए हैं। जबकि 50 से अधिक रोज बसों का आवागमन होता है।
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अनूप कुमार ने बताया कि सफर करने के लिए बसों का इंतजार करने वाले यात्रियों को पीने के पानी, शौचालय की दिक्कत होती है। बस अड्डा में जो शौचालय बने हैं, वह खंडहर में बदल गए हैं।