{"_id":"7f123dab6b806f5e4a35df5b79bdcdff","slug":"barkat-and-pray-for-the-happiness-sought-by-iftar-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इफ्तार कर मांगी बरकत और खुशहाली की दुआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इफ्तार कर मांगी बरकत और खुशहाली की दुआ
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
Updated Sat, 20 Jun 2015 12:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अल्लाहताला की रजा के लिए रोजेदारों ने शुक्रवार को पहला रोजा रखा और 15 घंटे से ज्यादा भूखे प्यासे रहकर फर्ज इबादत को पूरा किया। शाम को इफ्तार के पहले अल्लाहताला का शुक्र अदा किया और बरकत और खुशहाली की दुआ की। रोजेदारों ने इफ्तार के वक्त मुल्क में अमन चैन की भी अल्लाहताला से दुआ की। मगरिब की अजान होते ही शाम के वक्त सुन्नी और शिया हजरात ने इफ्तार किया। मुसाफिरों और गरीबों के लिए इफ्तार के इंतजाम मस्जिदों में भी किए गए। मस्जिदों में रोजेदारों ने अपने घरों से इफ्तारी (पकवान) भेजे।
विज्ञापन
रोजेदारों ने दस्तरख्वान बिछाकर सुन्नत तरीके से खजूर और पानी से रोजा खोला। इफ्तार के वक्त दस्तरख्वान को वसी किया गया। रमजान के दिन पांचों फर्ज नमाज के दौरान मस्जिदों में नमाजियों का हुजूम उमड़ा। पहला रोजा जुमे के दिन पड़ने की वजह मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भरी रहीं। मस्जिदों में इमामों ने रमजान की फजीलतें बयान कीं। रहमतों के पहले अशरे के बारे में बताया गया कि खुशनसीब हैं जो मुसलमान रमजान का महीना पा रहे हैं और रोजा रखकर अपने गुनाहों को माफ करा रहे हैं। अल्लाहताला के इस बेशुमार रहमतों, बरकतों और करामतों वाले महीने का फायदा जो न उठा सका, वह बदनसीब ही है। इस महीने में एक नेकी का सवाब 70 नेकियों के बराबर हो जाता है। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं।
विज्ञापन
इफ्तारी के वक्त बच्चों को खाने पीने का सामान देखकर जबरदस्त उत्साह देखा गया। सभी बच्चे बड़ों की तरफ टोपी लगाकर और बच्चियां मुसल्ला बांधकर दस्तरख्वान पर बैठीं और सुन्नत तरीके से इफ्तार किया। बच्चे अपने मां-बाप से रोजा रखने की जिद करते रहे लेकिन मां-बाप ने 10 वर्ष से ज्यादा उम्र वाले बच्चों को ही रोजा रखने की इजाजत दी। इफ्तार के वक्त बेशुमार पकवानों का रोजेदारों ने मजा लिया और उसके बाद मगरिब की नमाज अदा की। रात में इशा की नमाज पढ़कर तरावीह की विशेष नमाज अदा की और अगले दिन की सहरी की तैयारियों में जुट गए।
विज्ञापन