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Fatehpur News: खजाने में ही पड़ी रह गई 65 करोड़ की धनराशि
Tue, 19 Mar 2024 12:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Tue, 19 Mar 2024 12:32 AM IST
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फोटो-20
फोटो-21
- विकास कार्यों की धनराशि होने के बावजूद नहीं कराए जा सके निर्माण कार्य
- पीडब्ल्यूडी, जलनिगम, सिंचाई, स्वास्थ्य विभाग समेत कई विभागों का सुस्त रवैया
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। जिले में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि विभागों के पास होने के बावजूद अधिकारी खर्च करने में कंजूसी कर गए। पीडब्ल्यूडी, जल निगम, स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई समेत कई विभागों ने इस मद का एक रुपया भी नहीं खर्च किया।
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में बिल जमा नहीं करनी की स्थिति में धनराशि सरेंडर करने की नौबत बन जाएगी। जल निगम को सीवर लाइन का 41 करोड़ रुपये सरेंडर करना ही पड़ेगा।
शहर में तीन चरणों में सीवर लाइन बिछाई जानी है। पहले चरण में 311.40 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी। उसकी पहली 41 करोड़ रुपये की किश्त भी जारी कर दी गई। मामला टेंडर में ही अब तक अटका हुआ है। ऐसे में यह धनराशि शासन को वापस करनी पड़ेगी। सीवरेज लाइन के लिए अगले वित्तीय वर्ष का इंतजार होगा। जबकि ये शहर की समसे बड़ी समस्या दशकों से चली आ रही है।
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इसके अलावा छोटी-बड़ी सड़कों के निर्माण, मरम्मत के लिए लगभग 76 करोड़ रुपये की धनराशि लोक निर्माण विभाग को भेजी गई। इसमें विभाग आधी रकम भी विकास कार्यों के लिए खर्च नहीं कर पाया।
इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में मशीनरी व सीएचसी बनवाने के लिए अलग-अलग मद में करीब सवा करोड़ रुपये भेजे गए। इसमें मशीनरी खरीदी व मरम्मत के नाम पर 43 प्रतिशत खर्च किया जा सका। वहीं सीएचसी निर्माण के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं खर्च की गई। किसानों के नाम पर भी सिंचाई विभाग ने जबरदस्त कंजूसी दिखाई। विभाग को एक करोड़ की राशि सिंचाई से संबंधित कार्य के लिए भेजी गई।
वहीं, बड़े स्तर पर निर्माण के लिए 74 लाख से अधिक दिए गए। इसमें विभाग एक रुपये भी खर्च नहीं कर पाया। वहीं मरम्मत व सुधार के कार्यों के लिए 2 करोड़ 61 लाख से अधिक भेजे गए। इसमें भी विभाग एक करोड़ 74 लाख रुपये ही खर्च कर पाया। कमोबेश यही हालात दूसरे विभागों के भी हैं। ऐसे में लगभग 65 करोड़ की राशि विभागों को सरेंडर करनी पड़ सकती है।
-- आचार संहिता लागू होने के बाद
विभागों के मदों में करोड़ों रुपये पड़े हैं, लेकिन अफसरों की अनदेखी में विकास कार्य नहीं हो पाए। वित्तीय वर्ष खत्म होने के नजदीक आते ही अफसर बजट खपाने में लगे थे, लेकिन 16 मार्च को आचार संहिता लग जाने के बाद एक भी कार्य नहीं हो पाएंगे। ऐसे में अफसर खर्च बिल जुटाने में लगे हैं कि कैसे बजट की धनराशि रोकी जाए।
-- विभाग-- मद-- -बजट-- खर्च धनराशि (लाख में)
-स्वास्थ्य विभाग-- सीएचसी-19.92 -शून्य
-स्वास्थ्य विभाग-- मशीनरी-95.90-52.73
- जलनिगम-- सीवर लाइन-- 41 करोड़- शून्य
- पीडब्ल्यूडी-निर्माण कार्य-- 3 करोड़ -1 करोड़ 48 लाख
- पीडब्ल्यूडी-अनुक्षरण कार्य-11 करोड़ 20 लाख- 7करोड़ 91 लाख
- सिंचाई विभाग-सिंचाई-- एक करोड़ -- शून्य
- सिंचाई विभाग-मरम्मत-- 2 करोड़ 61लाख -- 1 करोड़ 74 लाख
-सिंचाई विभाग-वृहद निर्माण-- 74 लाख 73 हजार-- शून्य
- पीडब्ल्यूडी-वृहद निर्माण-61 करोड़ 70 लाख-- 23 करोड़ 25 लाख
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फोटो-21
- विकास कार्यों की धनराशि होने के बावजूद नहीं कराए जा सके निर्माण कार्य
- पीडब्ल्यूडी, जलनिगम, सिंचाई, स्वास्थ्य विभाग समेत कई विभागों का सुस्त रवैया
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। जिले में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि विभागों के पास होने के बावजूद अधिकारी खर्च करने में कंजूसी कर गए। पीडब्ल्यूडी, जल निगम, स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई समेत कई विभागों ने इस मद का एक रुपया भी नहीं खर्च किया।
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में बिल जमा नहीं करनी की स्थिति में धनराशि सरेंडर करने की नौबत बन जाएगी। जल निगम को सीवर लाइन का 41 करोड़ रुपये सरेंडर करना ही पड़ेगा।
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शहर में तीन चरणों में सीवर लाइन बिछाई जानी है। पहले चरण में 311.40 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली थी। उसकी पहली 41 करोड़ रुपये की किश्त भी जारी कर दी गई। मामला टेंडर में ही अब तक अटका हुआ है। ऐसे में यह धनराशि शासन को वापस करनी पड़ेगी। सीवरेज लाइन के लिए अगले वित्तीय वर्ष का इंतजार होगा। जबकि ये शहर की समसे बड़ी समस्या दशकों से चली आ रही है।
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इसके अलावा छोटी-बड़ी सड़कों के निर्माण, मरम्मत के लिए लगभग 76 करोड़ रुपये की धनराशि लोक निर्माण विभाग को भेजी गई। इसमें विभाग आधी रकम भी विकास कार्यों के लिए खर्च नहीं कर पाया।
इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में मशीनरी व सीएचसी बनवाने के लिए अलग-अलग मद में करीब सवा करोड़ रुपये भेजे गए। इसमें मशीनरी खरीदी व मरम्मत के नाम पर 43 प्रतिशत खर्च किया जा सका। वहीं सीएचसी निर्माण के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं खर्च की गई। किसानों के नाम पर भी सिंचाई विभाग ने जबरदस्त कंजूसी दिखाई। विभाग को एक करोड़ की राशि सिंचाई से संबंधित कार्य के लिए भेजी गई।
वहीं, बड़े स्तर पर निर्माण के लिए 74 लाख से अधिक दिए गए। इसमें विभाग एक रुपये भी खर्च नहीं कर पाया। वहीं मरम्मत व सुधार के कार्यों के लिए 2 करोड़ 61 लाख से अधिक भेजे गए। इसमें भी विभाग एक करोड़ 74 लाख रुपये ही खर्च कर पाया। कमोबेश यही हालात दूसरे विभागों के भी हैं। ऐसे में लगभग 65 करोड़ की राशि विभागों को सरेंडर करनी पड़ सकती है।
विभागों के मदों में करोड़ों रुपये पड़े हैं, लेकिन अफसरों की अनदेखी में विकास कार्य नहीं हो पाए। वित्तीय वर्ष खत्म होने के नजदीक आते ही अफसर बजट खपाने में लगे थे, लेकिन 16 मार्च को आचार संहिता लग जाने के बाद एक भी कार्य नहीं हो पाएंगे। ऐसे में अफसर खर्च बिल जुटाने में लगे हैं कि कैसे बजट की धनराशि रोकी जाए।
-स्वास्थ्य विभाग
-स्वास्थ्य विभाग
- जलनिगम
- पीडब्ल्यूडी-निर्माण कार्य
- पीडब्ल्यूडी-अनुक्षरण कार्य-11 करोड़ 20 लाख- 7करोड़ 91 लाख
- सिंचाई विभाग-सिंचाई
- सिंचाई विभाग-मरम्मत
-सिंचाई विभाग-वृहद निर्माण
- पीडब्ल्यूडी-वृहद निर्माण-61 करोड़ 70 लाख