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Fatehpur News: बारिश के मौसम में चार महीने तक ठप रहती है एंबुलेंस सुविधा

Wed, 22 Feb 2023 01:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर Updated Wed, 22 Feb 2023 01:08 AM IST
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Ambulance facility remains stalled for four months in the rainy season
फतेहपुर। आजादी के बाद से अब तक सड़क नहीं बनने का दर्द बारिश में मौसम में ग्रामीणों के लिए और अधिक परेशानी पैदा करता है। यूं कहें कि बरसात के चार महीने तक रघुबर डेरा, पतरियन डेरा और बइहापुर समेत कई डेरों का संपर्क मार्ग सड़क से पूरी तरह से कट ही जाता है। इन महीनों में मजरों और गांवों तक एंबुलेंस की सेवा तक नहीं पहुंच पाती।
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ग्राम सभा रायपुर-भरसौल के रघुबर डेरा, पतरियन डेरा और बइहापुर समेत कई अन्य डेरों के मुख्य मार्ग अब तक कच्चे हैं। साल के आठ महीने तक ग्रामीण जैसे-तैसे सड़क से आवागमन कर लेते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में जून से लेकर अक्टूबर तक चार महीने रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है। इस वजह से मजरे और गांवों तक एंबुलेंस सेवा भी नहीं पहुंच पाती है। बरसात के महीने में एंबुलेंस आती भी है तो वह अंजना भैरव ग्रामसभा को जाने वाले आंजने मोड़ पर खड़ी हो जाती है। यहां तक मरीजों को पैदल, साइकिल या फिर चारपाई में लाने का विकल्प बचता है। महिलाओं को प्रसव पीड़ा होने पर खासी समस्या होती है। इससे कई आशंकाएं भी बनी रहती हैं। रायपुर-भरसौल की ग्राम प्रधान किरण यादव का कहना है कि समस्या से अधिकारियों से कई बार अवगत कराया गया पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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रिश्तेदार भी आने से घबराते हैं
ग्रामीणों का कहना है कि कच्ची सड़क होने से रिश्तेदारी में भी फर्क पड़ने लगा है। रिश्तेदारों का आना-जाना बहुत कम हो गया है। वे सड़क की दिक्कत बताकर नहीं आते हैं। इसका असर अब शादी-ब्याह में भी देखने को मिल रहा है। लड़का और लड़की की शादियों में परेशानी होने लगी है।
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- पतरियन डेरा निवासी सुखराज निषाद (63) बोलीं कि बीमारी पर एंबुलेंस को फोन करते हैं, तो वह आंजने मोड़ में खड़ी हो जाती है। कभी-कभी बइयापुर तक आती है, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए साइकिल या पैदल जाना ही मजबूरी होती है। ये अब आदत में शामिल हो गया है, लेकिन समस्या दर्द दे रही है।
- पतरियन डेरा निवासी रूपरानी ने कहा कि शादी के बाद गांव आए। तभी से सड़क की समस्या बनी हुई है। बरसात के दौरान प्रसव के लिए महिलाएं अपने मायके चली जाती हैं। यहां कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। उपचार के लिए बाहर जाओ तो दलदल बन चुकी सड़क से गुजर के जाना पड़ता है।
- कुम्हारन डेरा निवासी सविता निषाद का कहना है कि बरसात के दौरान इलाज में बड़ी दिक्कत उठानी पड़ती है। इन दिनों एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती है। एंबुलेंस तक पैदल या साइकिल से जाना मजबूरी होती है। किशनपुर-नरैनी दोनों जगह जाने में दिक्कत होती है। ये समस्या अब आदत में आ गई है।

कई सड़कों का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसमें ये सड़कें भी शामिल हैं। प्रस्ताव पास होते ही सभी सड़कों का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। -कृष्णा पासवान, विधायक, खागा
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