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सिपाही आरमोरर को दस साल कैद
Fatehpur
Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। पुलिस लाइन शस्त्रागार से सरकारी शस्त्र,कारतूस और कलपुर्जों की अपराधियों को आपूर्ति करने वाले सिपाही आरमोरर को टेम्प्रेरेरी एक्स कैडर पोस्ट द्वितीय की अदालत ने गुरुवार को दस वर्ष कैद-ए-बामशक्कत की सजा सुनाई है। सिपाही आरमोरर को सरकारी कारतूस असलहों के पुर्जों सहित पुलिस लाइन के पास से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के वक्त काफी मात्रा में नगदी भी उसके पास से बरामद हुई थी।
मामला 10 अक्तूबर वर्ष 2003 को दोपहर पौने दो बजे पुलिस लाइन गेट के पास का है। पुलिस लाइन में बतौर कांस्टेबल आरमोरर (असलहों का रखरखाव करने वाले) पद पर तैनात रहे सिपाही माधवचंद्र शुक्ल पुत्र कृष्णलाल शुक्ल निवासी नींबी कला, सरांय इनायत थाना झूंसी जिला इलाहाबाद को सदर कोतवाली पुलिस ने सरकारी असलहाें की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय सिपाही आरमोरर के पास से 7.62 एसएलआर प्रतिबंधित बोर की पांच कारतूस, एक लाख दस हजार रुपया नगद, तमंचा और दो 38 बोर की देशी नाल, प्रतिबंधित एसएलआर के कारतूस और खोखे तथा भारी मात्रा में सरकारी असलहों के पुर्जे और सोलह हजार रुपए नगद बरामद किया था। यह बरामदगी तत्काल और पूछताछ के बाद हुई थी। इस पर अलग-अलग मुकदमा दर्ज हुआ था। तत्कालीन प्रतिसार निरीक्षक पुलिस लाइन जगदीश सिंह और प्रभारी निरीक्षक सदर कोतवाली राकेश कुमार सिंह ने कांस्टेबल आरमोरर माधव चंद्र शुक्ल के विरुद्ध धारा 409 और 414 आईपीसी एवं आयुध अधिनियम की दफा 25,26, और 27 के तहत मुकदमा दर्ज करवा कर जेल भेजा था। हालांकि कुछ ही दिनाें में वह जमानत पर रिहा हो गया और पुन: नौकरी करने लगा था। मामला नौ वर्ष से अदालत में विचाराधीन था। गुरुवार को टेम्प्रेरेरी एक्स कैडर पोस्ट द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार की अदालत ने सहायक शासकीय अधिवक्ता ऋषि मिश्र की ओर से पेश दलीलाें और साक्ष्य को सुनते हुए आरोपी सिपाही आरमोरर को दस वर्ष सश्रम कारावास और 25 हजार हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड का भुगतान न करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत के आदेश के बाद आरोपी सिपाही को जेल भेज दिया गया है।
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मामला 10 अक्तूबर वर्ष 2003 को दोपहर पौने दो बजे पुलिस लाइन गेट के पास का है। पुलिस लाइन में बतौर कांस्टेबल आरमोरर (असलहों का रखरखाव करने वाले) पद पर तैनात रहे सिपाही माधवचंद्र शुक्ल पुत्र कृष्णलाल शुक्ल निवासी नींबी कला, सरांय इनायत थाना झूंसी जिला इलाहाबाद को सदर कोतवाली पुलिस ने सरकारी असलहाें की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय सिपाही आरमोरर के पास से 7.62 एसएलआर प्रतिबंधित बोर की पांच कारतूस, एक लाख दस हजार रुपया नगद, तमंचा और दो 38 बोर की देशी नाल, प्रतिबंधित एसएलआर के कारतूस और खोखे तथा भारी मात्रा में सरकारी असलहों के पुर्जे और सोलह हजार रुपए नगद बरामद किया था। यह बरामदगी तत्काल और पूछताछ के बाद हुई थी। इस पर अलग-अलग मुकदमा दर्ज हुआ था। तत्कालीन प्रतिसार निरीक्षक पुलिस लाइन जगदीश सिंह और प्रभारी निरीक्षक सदर कोतवाली राकेश कुमार सिंह ने कांस्टेबल आरमोरर माधव चंद्र शुक्ल के विरुद्ध धारा 409 और 414 आईपीसी एवं आयुध अधिनियम की दफा 25,26, और 27 के तहत मुकदमा दर्ज करवा कर जेल भेजा था। हालांकि कुछ ही दिनाें में वह जमानत पर रिहा हो गया और पुन: नौकरी करने लगा था। मामला नौ वर्ष से अदालत में विचाराधीन था। गुरुवार को टेम्प्रेरेरी एक्स कैडर पोस्ट द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश प्रमोद कुमार की अदालत ने सहायक शासकीय अधिवक्ता ऋषि मिश्र की ओर से पेश दलीलाें और साक्ष्य को सुनते हुए आरोपी सिपाही आरमोरर को दस वर्ष सश्रम कारावास और 25 हजार हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड का भुगतान न करने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत के आदेश के बाद आरोपी सिपाही को जेल भेज दिया गया है।
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