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नौ दिन से ताले में बंद हैं भूखे भगवान
Fatehpur
Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। शहर के बाबा नारायण दास की कुटी में मौजूद भगवान नौ दिन से भूखे हैं। मंदिर में बिहारी जी सहित मौजूद देवी-देवताओं की न तो पूजा-अर्चना हो पा रही है और न ही उन्हें भोग लग पा रहा है। कारण पुजारी अपना और मंदिर का कुछ सामान समेटकर भगवान को ताले में बंद कर भाग गया है। मंदिर का सर्वराकार प्रशासन है किंतु जानकारी के बावजूद प्रशासन की ओर से मंदिर में पूजा-अर्चना की शुक्र्रवार तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
एएस इंटर कालेज के सामने बाबा नारायण दास की कुटी प्राचीन स्थान है जहां बिहारी जी मोटेश्वर महादेव जी का मंदिर है। इस मंदिर में राधाकृष्ण की दो जोड़ी प्रतिमाएं एक पीतल और दूसरी संगमरमर की विराजमान हैं। साथ हैं भगवान राम, लक्ष्मण और जानकी की बड़ी एवं छोटी जोड़ी में मूर्तियां। कहते हैं कि राम दरबार की बड़ी प्रतिमाएं अष्टधातु की हैं और छोटी पीतल की। इसके साथ ही मंदिर के अंदर लड्डू गोपाल, रामगोपाल, गरुण भगवान, शेष शय्या पर लेटे भगवान विष्णु, भगवान वामन, सालिगराम की कई प्रतिमाएं हैं। मंदिर के बाहर सैकड़ों बरस पुराना एक शिवालय है तो बगल में देवी दुर्गा का मंदिर। इस प्राचीन मंदिर में सालाना बावन द्वादशी में भगवान बावन का वार्षिक पर्व मनाया जाता है।
यह मंदिर काफी अर्से तक विवादित रहा जिसके बाद मंदिर का सर्वराकार तत्कालीन महंत ने जिलाधिकारी को बना दिया। महंत की मृत्यु के उपरांत तहसील प्रशासन की ओर से पुजारी की नियुक्ति की जाती रही है। करीब ढाई साल पहले अनिल कुमार तिवारी नामक एक पुजारी को रखा गया था। वह परिवार समेत यहां रहता था लेकिन पिछले दिनों चुपचाप खिसक गया। तब से कुटी के हर मंदिर में ताला बंद है। कुटी परिसर में रहने वाले किराएदारों के साथ ही पहुंचने वाले भक्त आदि पूजा-अर्चना नहीं कर पा रहे। भगवान को नौ दिन से भोग भी नहीं लगा। इससे मंदिर में रहने वाले लोगों में रोष है। किराएदारों की ओर से इसकी जानकारी प्रशासन को दी गई किंतु ताले में बंद भगवान की पूजा-अर्चना और भोग की व्यवस्था शुरू नहीं हो पा रही।
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एएस इंटर कालेज के सामने बाबा नारायण दास की कुटी प्राचीन स्थान है जहां बिहारी जी मोटेश्वर महादेव जी का मंदिर है। इस मंदिर में राधाकृष्ण की दो जोड़ी प्रतिमाएं एक पीतल और दूसरी संगमरमर की विराजमान हैं। साथ हैं भगवान राम, लक्ष्मण और जानकी की बड़ी एवं छोटी जोड़ी में मूर्तियां। कहते हैं कि राम दरबार की बड़ी प्रतिमाएं अष्टधातु की हैं और छोटी पीतल की। इसके साथ ही मंदिर के अंदर लड्डू गोपाल, रामगोपाल, गरुण भगवान, शेष शय्या पर लेटे भगवान विष्णु, भगवान वामन, सालिगराम की कई प्रतिमाएं हैं। मंदिर के बाहर सैकड़ों बरस पुराना एक शिवालय है तो बगल में देवी दुर्गा का मंदिर। इस प्राचीन मंदिर में सालाना बावन द्वादशी में भगवान बावन का वार्षिक पर्व मनाया जाता है।
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यह मंदिर काफी अर्से तक विवादित रहा जिसके बाद मंदिर का सर्वराकार तत्कालीन महंत ने जिलाधिकारी को बना दिया। महंत की मृत्यु के उपरांत तहसील प्रशासन की ओर से पुजारी की नियुक्ति की जाती रही है। करीब ढाई साल पहले अनिल कुमार तिवारी नामक एक पुजारी को रखा गया था। वह परिवार समेत यहां रहता था लेकिन पिछले दिनों चुपचाप खिसक गया। तब से कुटी के हर मंदिर में ताला बंद है। कुटी परिसर में रहने वाले किराएदारों के साथ ही पहुंचने वाले भक्त आदि पूजा-अर्चना नहीं कर पा रहे। भगवान को नौ दिन से भोग भी नहीं लगा। इससे मंदिर में रहने वाले लोगों में रोष है। किराएदारों की ओर से इसकी जानकारी प्रशासन को दी गई किंतु ताले में बंद भगवान की पूजा-अर्चना और भोग की व्यवस्था शुरू नहीं हो पा रही।
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