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देहात के अस्पताल वीरान, भटक रहे मरीज
Fatehpur
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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फतेहपुर। स्वास्थ्य विभाग में संविदा डाक्टर समेत कर्मचारियों के पद समाप्त होने का असर दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी से ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में सन्नाटा दिखाई दे रहा है। महिला डाक्टर और कर्मचारियों की कमी से चिकित्सा व्यवस्था पंगु होने से मरीजों के इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। खास तौर पर प्रसव के लिए महिलाओं को जिला महिला अस्पताल के चक्कर लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में महिला डाक्टर और अन्य कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन साल पहले संविदा पर कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया था। इसके तहत जिले में तीन एमबीबीएस महिला डाक्टर दीपिका सिंह, डा. लक्ष्मी सिंह, डा. एनके त्रिपाठी की नियुक्ति की थी। इनके अलावा आयुष डाक्टर तस्लीम फात्मा, डा. ज्योति द्विवेदी, डा. वंदना यादव, डा. श्वेता पांडेय, डा. आभा श्रीवास्तव, डा. अर्चना सिंह, डा. अनीता सिंह, डा. नीलम प्रधान, डा. कहकहा परवीन को भी संविदा पर नियुक्ति की गई थी। इनके अलावा स्टाफ नर्स कुं. किरन, शमा परवीन, सपना मौर्य, अनीता सिंह, कु. सबानाज, सरिता लोधी, कु. पुनीता पांडेय तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पद पर रामश्री, आमनी कुट्टी, श्यामकली, प्रेमा पांडेय, शीला विल्सन, हेमलता गिरि, शैलकुमारी गुप्ता, सावित्री देवी की भी नियुक्ति हुई थी। इनके अलावा सोमेंद्र मणि त्रिपाठी को डिप्लोमा आप्टोमेट्रिस्ट तथा सुशील कुमार मौर्यो की संविदा पर कोल्डचेन हैंडलर पर नियुक्त किया गया था।
डाक्टर समेत इन सभी कर्मचारियों की नियुक्ति ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में रही है। इन सभी की सेवाएं 31 मार्च से खतम कर दी गई हैं। इससे इनके नियुक्त वाले अस्पताल वीरान हो गए हैं। खास तौर पर महिला डाक्टर और कर्मचारियों का पूरी तरह टोटा हो गया है। ग्रामीण क्षेत्र में इससे चिकित्सीय सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। उधर सीएमओ केएल वर्मा का कहना है अभी तक संविदा डाक्टर और अन्य कर्मचारियों के नवीनीकरण के लिए शासन से कोई आदेश नहीं प्राप्त हुआ है। इससे चिकित्सीय सेवाओं का प्रभावित होना स्वाभाविक है।
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ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में महिला डाक्टर और अन्य कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन साल पहले संविदा पर कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया था। इसके तहत जिले में तीन एमबीबीएस महिला डाक्टर दीपिका सिंह, डा. लक्ष्मी सिंह, डा. एनके त्रिपाठी की नियुक्ति की थी। इनके अलावा आयुष डाक्टर तस्लीम फात्मा, डा. ज्योति द्विवेदी, डा. वंदना यादव, डा. श्वेता पांडेय, डा. आभा श्रीवास्तव, डा. अर्चना सिंह, डा. अनीता सिंह, डा. नीलम प्रधान, डा. कहकहा परवीन को भी संविदा पर नियुक्ति की गई थी। इनके अलावा स्टाफ नर्स कुं. किरन, शमा परवीन, सपना मौर्य, अनीता सिंह, कु. सबानाज, सरिता लोधी, कु. पुनीता पांडेय तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पद पर रामश्री, आमनी कुट्टी, श्यामकली, प्रेमा पांडेय, शीला विल्सन, हेमलता गिरि, शैलकुमारी गुप्ता, सावित्री देवी की भी नियुक्ति हुई थी। इनके अलावा सोमेंद्र मणि त्रिपाठी को डिप्लोमा आप्टोमेट्रिस्ट तथा सुशील कुमार मौर्यो की संविदा पर कोल्डचेन हैंडलर पर नियुक्त किया गया था।
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डाक्टर समेत इन सभी कर्मचारियों की नियुक्ति ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में रही है। इन सभी की सेवाएं 31 मार्च से खतम कर दी गई हैं। इससे इनके नियुक्त वाले अस्पताल वीरान हो गए हैं। खास तौर पर महिला डाक्टर और कर्मचारियों का पूरी तरह टोटा हो गया है। ग्रामीण क्षेत्र में इससे चिकित्सीय सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। उधर सीएमओ केएल वर्मा का कहना है अभी तक संविदा डाक्टर और अन्य कर्मचारियों के नवीनीकरण के लिए शासन से कोई आदेश नहीं प्राप्त हुआ है। इससे चिकित्सीय सेवाओं का प्रभावित होना स्वाभाविक है।
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