{"_id":"36-156620","slug":"Fatehpur-156620-36","type":"story","status":"publish","title_hn":"यहां प्याज के उत्पादन से किसान हो रहे मालामाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यहां प्याज के उत्पादन से किसान हो रहे मालामाल
Fatehpur
Updated Sat, 26 Oct 2013 05:41 AM IST
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अमन तिवारी
फतेहपुर। अपनी आसमान छूती कीमतों से पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा प्याज जिले में कुछ अन्य कारणों से महत्वपूर्ण है। इसकी वजह है, जिले में किसानों द्वारा बेमौसम जबरदस्त प्याज का उत्पादन। पूरे सूबे में रबी के मौसम में किसान प्याज का उत्पादन करते हैं, लेकिन जनपद में खरीफ के मौसम में प्याज का उत्पादन कर किसानों ने कृषि क्षेत्र में नया आयाम गढ़ दिया है। किसानों की हाड़तोड़ मेहनत ने खेती में ऐसा रंग जमाया कि बिना मौसम की फसल में सीजन की फसल से ज्यादा पैदावार हो रही है। आम तौर पर पूरे देश में किसान नवंबर-दिसंबर से मार्च-अप्रैल के बीच की रबी की फसल में प्याज की खेती करते हैं, लेकिन जनपद में खरीफ के मौसम में दो हजार से अधिक किसान 650 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की कृषि भूमि में प्याज की खेती करते हैं। किसान प्रति हेक्टेयर 10 से 12 किलो प्याज के बीज डालकर नर्सरी तैयार करते हैं और नर्सरी तैयार होने के बाद खेतों में बुआई करते हैं। प्रति हेक्टेयर 20 से 30 हजार रुपए की लागत लगाने के बाद प्याज चार माह में तैयार हो जाता है। इस तरह से औसतन प्रति हेक्टेयर खरीफ में तकरीबन 115 कुंतल प्याज की पैदावार होती है और प्याज की वर्तमान दरों के मुताबिक औसतन एक हेक्टेयर के उत्पादन में किसान को लगभग एक से सवा लाख रुपए की कमाई हो जाती है। हालांकि आम रेट होने पर औसतन यह बचत 50 से 60 हजार रुपए तक होती है। बेमौसम प्याज की कमाई का किसानों को ऐसा चस्का लगा है कि हंसवा, मलवां, बहुआ और तेलियानी विकास खंड के चुरियानी, सोनबरसा, मोहनखेड़ा, करसवां, डीघ, सुंधवा, बुधईयापुर, चंदनपुर, कोटिया, गुनीर और उसरैना सहित एक सैकड़ा से अधिक गांवों में खरीफ के प्याज की पूरी की पूरी बेल्ट तैयार हो गई है। इस वर्ष किसानों ने इन गांवों में 850 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्याज के बीज रोपित किए हैं। जिला उद्यान अधिकारी वी.के. सिंह कहते हैं कि बेमौसम प्याज की खेती करने की कई खास वजह हैं। दरअसल गंगा और यमुना का द्वोआबा क्षेत्र होने के कारण यहां की मिट्टी बलुई और दोमट है, जिसकी वजह से खेतों में पानी का जमाव नहीं होता और प्याज की खेती को उपयुक्त जलवायु मिलती है और उत्पादन उम्दा होता है।
प्याज के भंडारण की जिले में कोई व्यवस्था नहीं
- किसानों की कहानी, उन्हीं की जुबानी
फतेहपुर। खरीफ के सीजन में प्याज की खेती करने में पारंगत किसानों से अमर उजाला ने बातचीत की तो उन्हाेंने बेबाकी से अपने अनुभव साझा किए। किसान नरेश तिवारी कहते हैं कि बरसात के मौसम में प्याज की नर्सरी तैयार कर बाद में पौध की खेतों में बुआई करते हैं। बरसात के कारण इस खेती में सिंचाई नाममात्र की करनी होती है। वहीं रघुवीर कहते हैं कि कई बार बारिश अधिक हो जाने के कारण नर्सरी सड़ने का खतरा पैदा हो जाता है। जिसकी वजह मेड़ बनाकर प्याज को नए सिरे से रोपित करना पड़ता है। हालांकि ढाई से तीन माह में प्याज पैदा हो जाती है। महिला किसान केशकली कहती हैं कि शुरुआत में बिना मौसम की प्याज करने में डर लगता था, इसलिए कुछ पैसे जुटाकर जमीन के छोटे से टुकड़े में बुआई की थी, चूंकि प्याज हर मौसम में बिकता है, इसलिए अच्छी थोड़े में अच्छी आमदनी हुई और हौसला बढ़ गया। वहीं दूसरी ओर कृषक मैय्यादीन और शिवमंगल कहते हैं कि प्याज के भंडारण की जिले में कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे खेतों से निकलते ही मजबूरी में प्याज तुरंत बेंचनी पड़ती है। जिसका फायदा आढ़तिए उठाते हैं और स्टाक करते दो से तीन गुना तक मुनाफा कमाते हैं। उम्दा उत्पादन के सापेक्ष भंडारण की व्यवस्था शून्य है। बहरहाल हालात चाहे जो हाें तकरीबन पांच से सात वर्षों से खरीफ में प्याज की खेती कर रहे सैकड़ों किसानाें ने प्याज को ही आमदनी का मुख्य जरिया बना लिया है और प्याज के सहारे पूरे परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
फतेहपुर। प्याज की उन्नतशील खेती के बारे में विशेषज्ञ/जिला उद्यान सलाहकार/उद्यान निरीक्षक विजय किशोर सिंह से बातचीत की गई। जिसमें उन्हाेंने बताया कि फिलहाल जिले के किसान एनएचआरडीएफ प्रजाती का प्याज पैदा कर रहे हैं। प्याज की पौध के विकास के लिए और उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले उत्पादन के लिए में 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। अमूमन किसान नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और गंधक का प्रयोग करते हैं लेकिन शेष सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग नहीं करते।
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इंसेट
विभाग ने तैयार की दो करोड़ की परियोजना
फतेहपुर। खरीफ में प्याज की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाकर 1000 हेक्टेयर करने और उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 200 कुंतल तक पहुंचाने के लिहाज से उद्यान एवं खाद्य प्रस्संकरण विभाग ने पहली बार विशेष परियोजना तैयार की है। विभाग ने प्याज की खेती और किसानों को बढ़ावा देने के लिए दो करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजा है। जिसके अंतर्गत 200 हेक्टेयर रबी और 300 हेक्टेयर खरीफ को मिलाकर दोनो मौसमों में 500 हेक्टेयर का दायरा प्रस्तावित है। परियोजना अंतर्गत 750 किसानों को प्याज पर विशेष प्रशिक्षण दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
- बिना मौसम के प्याज का उत्पादन करना हैरत की बात है। किसानों को शीघ्र ही प्याज के भंडारण के लिए उत्तम प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर पर पैरवी की जाएगी।
- अभय, जिलाधिकारी फतेहपुर।
- किसानों के लिए 2 करोड़ 8 लाख 95 हजार की लागत का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। यदि शासन से स्वीकृति मिलती है तो यह प्रोजेक्ट प्याज की खेती की दिशा और किसानों की दशा बदलने में कारगर साबित होगा।
- वी.के.सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
- किसानों को किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी की आवश्यकता हो तो कि वह किसी भी कार्यदिवस में उद्यान कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। किसानों की हर संभव मदद की जा रही है।
- विजय किशोर सिंह, जिला उद्यान सलाहकार
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पांच वष में खरीफ में प्याज की पैदावार के आंकड़े
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वर्ष आच्छादन उत्पादन
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2008-09 580 105
2009-10 685 112
2010-11 710 113
2011-12 750 112
2012-13 810 121
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नोट: उत्पादन क्विंटल/हेक्टेयर में
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पश्चिम बंगाल तक जिले के प्याज की धूम
फतेहपुर। चार महीने में मेहनत करके किसान जो भी प्याज पैदा करते हैं। उसकी खरीद के लिए दूर-दूर से व्यापारी आते हैं। किसानों का उत्पादन आढ़तिए उनके खेतो से ही खरीद ले जाते हैं। प्याज पश्चिम बंगाल की कुछ छोटी बाजारों और कलकत्ता की बड़ी बाजार, कानपुर और इलाहाबाद की मुंडेरा मंडी तक बिकने जाता है। किसानाें के मुताबिक व्यापारी खुद गाड़ी और पैसा लेकर आते हैं और माल लदाकर चले जाते हैं।
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फतेहपुर। अपनी आसमान छूती कीमतों से पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा प्याज जिले में कुछ अन्य कारणों से महत्वपूर्ण है। इसकी वजह है, जिले में किसानों द्वारा बेमौसम जबरदस्त प्याज का उत्पादन। पूरे सूबे में रबी के मौसम में किसान प्याज का उत्पादन करते हैं, लेकिन जनपद में खरीफ के मौसम में प्याज का उत्पादन कर किसानों ने कृषि क्षेत्र में नया आयाम गढ़ दिया है। किसानों की हाड़तोड़ मेहनत ने खेती में ऐसा रंग जमाया कि बिना मौसम की फसल में सीजन की फसल से ज्यादा पैदावार हो रही है। आम तौर पर पूरे देश में किसान नवंबर-दिसंबर से मार्च-अप्रैल के बीच की रबी की फसल में प्याज की खेती करते हैं, लेकिन जनपद में खरीफ के मौसम में दो हजार से अधिक किसान 650 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की कृषि भूमि में प्याज की खेती करते हैं। किसान प्रति हेक्टेयर 10 से 12 किलो प्याज के बीज डालकर नर्सरी तैयार करते हैं और नर्सरी तैयार होने के बाद खेतों में बुआई करते हैं। प्रति हेक्टेयर 20 से 30 हजार रुपए की लागत लगाने के बाद प्याज चार माह में तैयार हो जाता है। इस तरह से औसतन प्रति हेक्टेयर खरीफ में तकरीबन 115 कुंतल प्याज की पैदावार होती है और प्याज की वर्तमान दरों के मुताबिक औसतन एक हेक्टेयर के उत्पादन में किसान को लगभग एक से सवा लाख रुपए की कमाई हो जाती है। हालांकि आम रेट होने पर औसतन यह बचत 50 से 60 हजार रुपए तक होती है। बेमौसम प्याज की कमाई का किसानों को ऐसा चस्का लगा है कि हंसवा, मलवां, बहुआ और तेलियानी विकास खंड के चुरियानी, सोनबरसा, मोहनखेड़ा, करसवां, डीघ, सुंधवा, बुधईयापुर, चंदनपुर, कोटिया, गुनीर और उसरैना सहित एक सैकड़ा से अधिक गांवों में खरीफ के प्याज की पूरी की पूरी बेल्ट तैयार हो गई है। इस वर्ष किसानों ने इन गांवों में 850 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्याज के बीज रोपित किए हैं। जिला उद्यान अधिकारी वी.के. सिंह कहते हैं कि बेमौसम प्याज की खेती करने की कई खास वजह हैं। दरअसल गंगा और यमुना का द्वोआबा क्षेत्र होने के कारण यहां की मिट्टी बलुई और दोमट है, जिसकी वजह से खेतों में पानी का जमाव नहीं होता और प्याज की खेती को उपयुक्त जलवायु मिलती है और उत्पादन उम्दा होता है।
प्याज के भंडारण की जिले में कोई व्यवस्था नहीं
- किसानों की कहानी, उन्हीं की जुबानी
फतेहपुर। खरीफ के सीजन में प्याज की खेती करने में पारंगत किसानों से अमर उजाला ने बातचीत की तो उन्हाेंने बेबाकी से अपने अनुभव साझा किए। किसान नरेश तिवारी कहते हैं कि बरसात के मौसम में प्याज की नर्सरी तैयार कर बाद में पौध की खेतों में बुआई करते हैं। बरसात के कारण इस खेती में सिंचाई नाममात्र की करनी होती है। वहीं रघुवीर कहते हैं कि कई बार बारिश अधिक हो जाने के कारण नर्सरी सड़ने का खतरा पैदा हो जाता है। जिसकी वजह मेड़ बनाकर प्याज को नए सिरे से रोपित करना पड़ता है। हालांकि ढाई से तीन माह में प्याज पैदा हो जाती है। महिला किसान केशकली कहती हैं कि शुरुआत में बिना मौसम की प्याज करने में डर लगता था, इसलिए कुछ पैसे जुटाकर जमीन के छोटे से टुकड़े में बुआई की थी, चूंकि प्याज हर मौसम में बिकता है, इसलिए अच्छी थोड़े में अच्छी आमदनी हुई और हौसला बढ़ गया। वहीं दूसरी ओर कृषक मैय्यादीन और शिवमंगल कहते हैं कि प्याज के भंडारण की जिले में कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे खेतों से निकलते ही मजबूरी में प्याज तुरंत बेंचनी पड़ती है। जिसका फायदा आढ़तिए उठाते हैं और स्टाक करते दो से तीन गुना तक मुनाफा कमाते हैं। उम्दा उत्पादन के सापेक्ष भंडारण की व्यवस्था शून्य है। बहरहाल हालात चाहे जो हाें तकरीबन पांच से सात वर्षों से खरीफ में प्याज की खेती कर रहे सैकड़ों किसानाें ने प्याज को ही आमदनी का मुख्य जरिया बना लिया है और प्याज के सहारे पूरे परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।
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फतेहपुर। प्याज की उन्नतशील खेती के बारे में विशेषज्ञ/जिला उद्यान सलाहकार/उद्यान निरीक्षक विजय किशोर सिंह से बातचीत की गई। जिसमें उन्हाेंने बताया कि फिलहाल जिले के किसान एनएचआरडीएफ प्रजाती का प्याज पैदा कर रहे हैं। प्याज की पौध के विकास के लिए और उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले उत्पादन के लिए में 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। अमूमन किसान नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और गंधक का प्रयोग करते हैं लेकिन शेष सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग नहीं करते।
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विभाग ने तैयार की दो करोड़ की परियोजना
फतेहपुर। खरीफ में प्याज की खेती का क्षेत्रफल बढ़ाकर 1000 हेक्टेयर करने और उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 200 कुंतल तक पहुंचाने के लिहाज से उद्यान एवं खाद्य प्रस्संकरण विभाग ने पहली बार विशेष परियोजना तैयार की है। विभाग ने प्याज की खेती और किसानों को बढ़ावा देने के लिए दो करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजा है। जिसके अंतर्गत 200 हेक्टेयर रबी और 300 हेक्टेयर खरीफ को मिलाकर दोनो मौसमों में 500 हेक्टेयर का दायरा प्रस्तावित है। परियोजना अंतर्गत 750 किसानों को प्याज पर विशेष प्रशिक्षण दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
- बिना मौसम के प्याज का उत्पादन करना हैरत की बात है। किसानों को शीघ्र ही प्याज के भंडारण के लिए उत्तम प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर पर पैरवी की जाएगी।
- अभय, जिलाधिकारी फतेहपुर।
- किसानों के लिए 2 करोड़ 8 लाख 95 हजार की लागत का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। यदि शासन से स्वीकृति मिलती है तो यह प्रोजेक्ट प्याज की खेती की दिशा और किसानों की दशा बदलने में कारगर साबित होगा।
- वी.के.सिंह, जिला उद्यान अधिकारी
- किसानों को किसी भी प्रकार की तकनीकी जानकारी की आवश्यकता हो तो कि वह किसी भी कार्यदिवस में उद्यान कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। किसानों की हर संभव मदद की जा रही है।
- विजय किशोर सिंह, जिला उद्यान सलाहकार
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पांच वष में खरीफ में प्याज की पैदावार के आंकड़े
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वर्ष आच्छादन उत्पादन
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2008-09 580 105
2009-10 685 112
2010-11 710 113
2011-12 750 112
2012-13 810 121
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नोट: उत्पादन क्विंटल/हेक्टेयर में
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पश्चिम बंगाल तक जिले के प्याज की धूम
फतेहपुर। चार महीने में मेहनत करके किसान जो भी प्याज पैदा करते हैं। उसकी खरीद के लिए दूर-दूर से व्यापारी आते हैं। किसानों का उत्पादन आढ़तिए उनके खेतो से ही खरीद ले जाते हैं। प्याज पश्चिम बंगाल की कुछ छोटी बाजारों और कलकत्ता की बड़ी बाजार, कानपुर और इलाहाबाद की मुंडेरा मंडी तक बिकने जाता है। किसानाें के मुताबिक व्यापारी खुद गाड़ी और पैसा लेकर आते हैं और माल लदाकर चले जाते हैं।