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जलवायु के मुताबिक फसलों का करें ट्रीटमेंट
Fatehpur
Updated Thu, 21 Feb 2013 05:30 AM IST
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फतेहपुर। बुधवार को उपनिदेशक कृषि प्रसार कार्यालय में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय समन्वित कृषि मौसम परियोजना, नेशनल इनीसिएटिव आन क्लाइमेट रिसिलिएंट एग्रीकल्चर परियोजना एवं सस्य विज्ञान विभाग, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वैज्ञानिक-कृषक गोष्ठी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन का कृषि पर पड़ने वाले प्रभाव पर चरचा की गई। कृषि वैज्ञानियों ने इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कृषकों को जलवायु के अनुकूल स्वयं को कृषि के लिए तैयार करने हेतु प्रेरित किया। बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए निदेशक शोध, कृषि मौसम विज्ञानी डाक्टर अनिरुद्ध दुबे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन तेजी हो रहा है। असंयमित जलवायु में बेहतर कृषि के लिए किसानों को इस दिशा में हो रहे अनुसंधान एवं अद्यतन तकनीकों के बारे में जानकारी रखनी होगी। डाक्टर एसएन तिवारी ने गेहूं पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के बारे में जानकारी दी। पशु चिकित्साधिकारी पीके उपाध्याय ने बदलते मौसम में पशु प्रबंधन के बारे में बताया। तकनीकी अधिकारी राजबीर सिंह ने मौसम उपकरणों के बारे में बताया। डाक्टर अखिलेश मिश्र ने दलहनी फसलों के कीटो के प्रभाव एवं निदान के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डाक्टर नौशाद खान ने जलवायु परिवर्तन से फसलों में होने वाले खरपतवार की समस्या के बारे में बताया। डाक्टर मनोज मिश्र ने किसानों की तकनीकी समस्याओं का फीड बैक लेते हुए उनका निदान सुझाया। डाक्टर सीबी सिंह ने आभार ज्ञापित किया।
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