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Fatehpur News: नौ करोड़ की प्रतिबंधित दवाएं खपाने के लिए चाहिए 90 दिन
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फतेहपुर। जिले में नौ करोड़ कीमत की प्रतिबंधित दवाओं का मेडिकल स्टोरों में स्टाक है। उन्हें खपाने के लिए केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने 90 दिन का समय मांगा है। केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित 156 दवाओं की सूची जारी की है। इनमें टैबलेट, सीरप, इंजेक्शन और आईड्राॅप्स शामिल हैं। बड़ी संख्या में दवाएं प्रतिबंधित होने से दवा बाजार में हलचल मची है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने सोमवार को प्रतिबंधित 156 दवाओं की सूची जारी कर दी। प्रतिबंधित दवाओं में ज्यादातर कांबिनेशन वाली टैबलेट, इंजेक्शन, सीरप और आईड्राप्स हैं। कांबिनेशन वाली दवाएं ज्यादातर निजी अस्पतालों में मरीजों को लिखी जाती हैं या झोलाछाप उपयोग में लाते हैं। ऐसे में प्रतिबंधित दवाओं का खासा स्टाॅक होलसेल मेडिकल स्टोरों में है। अगर तत्काल प्रभाव से दवाओं पर रोक लगी, तो दो होलसेल दवा विक्रेताओं को करोड़ों का नुकसान होना तय है। इसी लिए प्रतिबंध लागू होते ही दवा विक्रेता सड़क पर निकल आए हैं। सोमवार को केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बीरेंद्र कुमार गुप्ता, महामंत्री सुनीत सिंह उर्फ डब्बू के साथ अन्य दवा विक्रेताओं ने दवा की दुकानों में प्रतिबंधित दवाओं की सूची बांटी।
प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री रोकने में सहयोग करने में दवा व्यापारी सरकार के साथ हैं, लेकिन दुकानों में प्रतिबंधित दवाओं का खासा स्टाक है। अगर यह दवाएं खराब हुई, तो मेडिकल स्टोर संचालक फुटपाथ पर खड़े हो जाएंगे। इस लिए स्टाक की दवाओं को खपाने के लिए होलसेलरों को 45 दिन और रिटेलरों को 90 दिन समय दिया जाएगा। वर्तमान समय में प्रतिदिन यह दवाएं करीब 10 लाख कीमत की खपत हो रही हैं।
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बीरेंद्र कुमार गुप्ता, अध्यक्ष केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
प्रतिबंधित प्रमुख दवाएं:-
पैरासिटामाल ट्रामाडोल टारिन और कैफीन का संयोजन। इसमें किडऩी और लीवर के साथ अन्य अंगों को नुकसान होता है। कांबिफ्लेम पैनाडोल एक्स्ट्रा, वोलिनी, निमोसुलाइड, पैरासिटामाल सिरप, सुक्रेलफेट असेलोफेंस, एजिथ्रोमाइसिन व एडाप्लेन, क्लोरोफेनेसिन व जिंक आक्साइड, माइकोनाजोल व ट्रिनिडोजोल, टेट्रासाइक्लिन व कोलिस्टीन सल्फेट, लिवोसिट्राजिन व पेनाइलेप्रिन आदि।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने सोमवार को प्रतिबंधित 156 दवाओं की सूची जारी कर दी। प्रतिबंधित दवाओं में ज्यादातर कांबिनेशन वाली टैबलेट, इंजेक्शन, सीरप और आईड्राप्स हैं। कांबिनेशन वाली दवाएं ज्यादातर निजी अस्पतालों में मरीजों को लिखी जाती हैं या झोलाछाप उपयोग में लाते हैं। ऐसे में प्रतिबंधित दवाओं का खासा स्टाॅक होलसेल मेडिकल स्टोरों में है। अगर तत्काल प्रभाव से दवाओं पर रोक लगी, तो दो होलसेल दवा विक्रेताओं को करोड़ों का नुकसान होना तय है। इसी लिए प्रतिबंध लागू होते ही दवा विक्रेता सड़क पर निकल आए हैं। सोमवार को केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बीरेंद्र कुमार गुप्ता, महामंत्री सुनीत सिंह उर्फ डब्बू के साथ अन्य दवा विक्रेताओं ने दवा की दुकानों में प्रतिबंधित दवाओं की सूची बांटी।
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प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री रोकने में सहयोग करने में दवा व्यापारी सरकार के साथ हैं, लेकिन दुकानों में प्रतिबंधित दवाओं का खासा स्टाक है। अगर यह दवाएं खराब हुई, तो मेडिकल स्टोर संचालक फुटपाथ पर खड़े हो जाएंगे। इस लिए स्टाक की दवाओं को खपाने के लिए होलसेलरों को 45 दिन और रिटेलरों को 90 दिन समय दिया जाएगा। वर्तमान समय में प्रतिदिन यह दवाएं करीब 10 लाख कीमत की खपत हो रही हैं।
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बीरेंद्र कुमार गुप्ता, अध्यक्ष केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
प्रतिबंधित प्रमुख दवाएं:-
पैरासिटामाल ट्रामाडोल टारिन और कैफीन का संयोजन। इसमें किडऩी और लीवर के साथ अन्य अंगों को नुकसान होता है। कांबिफ्लेम पैनाडोल एक्स्ट्रा, वोलिनी, निमोसुलाइड, पैरासिटामाल सिरप, सुक्रेलफेट असेलोफेंस, एजिथ्रोमाइसिन व एडाप्लेन, क्लोरोफेनेसिन व जिंक आक्साइड, माइकोनाजोल व ट्रिनिडोजोल, टेट्रासाइक्लिन व कोलिस्टीन सल्फेट, लिवोसिट्राजिन व पेनाइलेप्रिन आदि।
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