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फतेहपुर में बड़ा हादसा, मां-बेटी समेत सात की मौत
Mon, 14 Jan 2019 12:31 AM IST
gaurav gaurav
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: gaurav gaurav
Updated Mon, 14 Jan 2019 12:31 AM IST
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ROADWAYS BUS DEVIDED
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कानपुर-इलाहाबाद हाईवे के किनारे बसे मौहार गांव के लोग रविवार सुबह जिस वक्त गुनगुनी धूप सेंक रहे थे उसी समय कुछ सेकेंड के अंतर से दो जोरदार धमाकों की आवाज से दहल गए। पहली गूंज हाईवे से कानपुर की ओर जा रहे ट्रक का टायर फटने की थी तो दूसरी तेज आवाज थी फटे टायर के कारण बेकाबू हुए तेज रफ्तार ट्रक के डिवाइडर पार कर कानपुर की ओर से आ रही बस में टकराने की। टक्कर इतनी तेज थी कि बस का अगला हिस्सा चकनाचूर हो गया और पिछला भाग बुरी तरह पिचक जाने से उसमें सवार यात्री कुचली हुई हालत में भीतर फंस गए। धमाकों की गूंज थमने से पहले दूर-दराज तक चीख-पुकार फैल गई।
हादसा मौहार गांव के राजकिशोर सिंह के घर के पास हुआ। राजकिशोर ने बताया कि सुबह 11.15 बजे वह घर के बाहर धूप में बैठे थे। हाईवे की ओर से दो तेज धमाकों की आवाज से हादसे का अहसास होते ही मौके की ओर दौड़े। तकरीबन यही स्थिति उन अन्य लोगों की भी थी, जो रविवार की छुट्टी का कुछ वक्त धूप में बिताकर ठंड दूर करने की जुगत में थे। हाईवे पर पहुंचे तो बस में फंसे मुसाफिरों की चीख-पुकार के दबाव ने सभी को कार सेवक बनने पर मजबूर कर दिया। पास बड़ी लोहे की रॉड को कहीं हथौड़े की तरह इस्तेमाल किया तो कहीं जैक जैसी भूमिका में लाकर बस के पिचके भाग को फैलाकर फंसे लोगों को बाहर निकालने की राह बनाई।
ग्रामीणों की सूचना पर चौडगरा पुलिस चौकी के इंचार्ज आर के यादव भी मय फोर्स बिना देरी पहुंच गए। डायल 100 पर दी सूचना से पीआरवी पहुंचने में भी ज्यादा वक्त नहीं लगा। पीआरवी की पुलिस टीम गोपालगंज पीएचसी सबसे पहले पांच घायलों को लेकर पहुंची। बाकी फंसे लोगों को निकालने के लिए राहुल सिंह, शिवम सिंह, रोहित, शालू, गोलू समेत दो दर्जन ग्रामीण जुटे रहे। करीब आधे घंटे में घायल बस सवारों को बाहर निकाल लिया गया। एंबुलेंस का इंतजार न कर पुलिस चौडगरा से लोडर, मैजिक से भी करीब 10 घायलों को अस्पताल पहुंचाया। गोपालगंज पीएचसी में डॉक्टर अमलेश जोशी की टीम ने घायलों का प्राथमिक इलाज किया। पीएचसी में इंतजाम नाकाफी रहे। घायलों को जिला अस्पताल जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां से यादा गंभीर कानपुर रेफर किए गए। इस बीच हाईवे से लेकर अस्पताल तक घायलों की चीत्कार गूंजती रही।
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हादसा मौहार गांव के राजकिशोर सिंह के घर के पास हुआ। राजकिशोर ने बताया कि सुबह 11.15 बजे वह घर के बाहर धूप में बैठे थे। हाईवे की ओर से दो तेज धमाकों की आवाज से हादसे का अहसास होते ही मौके की ओर दौड़े। तकरीबन यही स्थिति उन अन्य लोगों की भी थी, जो रविवार की छुट्टी का कुछ वक्त धूप में बिताकर ठंड दूर करने की जुगत में थे। हाईवे पर पहुंचे तो बस में फंसे मुसाफिरों की चीख-पुकार के दबाव ने सभी को कार सेवक बनने पर मजबूर कर दिया। पास बड़ी लोहे की रॉड को कहीं हथौड़े की तरह इस्तेमाल किया तो कहीं जैक जैसी भूमिका में लाकर बस के पिचके भाग को फैलाकर फंसे लोगों को बाहर निकालने की राह बनाई।
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ग्रामीणों की सूचना पर चौडगरा पुलिस चौकी के इंचार्ज आर के यादव भी मय फोर्स बिना देरी पहुंच गए। डायल 100 पर दी सूचना से पीआरवी पहुंचने में भी ज्यादा वक्त नहीं लगा। पीआरवी की पुलिस टीम गोपालगंज पीएचसी सबसे पहले पांच घायलों को लेकर पहुंची। बाकी फंसे लोगों को निकालने के लिए राहुल सिंह, शिवम सिंह, रोहित, शालू, गोलू समेत दो दर्जन ग्रामीण जुटे रहे। करीब आधे घंटे में घायल बस सवारों को बाहर निकाल लिया गया। एंबुलेंस का इंतजार न कर पुलिस चौडगरा से लोडर, मैजिक से भी करीब 10 घायलों को अस्पताल पहुंचाया। गोपालगंज पीएचसी में डॉक्टर अमलेश जोशी की टीम ने घायलों का प्राथमिक इलाज किया। पीएचसी में इंतजाम नाकाफी रहे। घायलों को जिला अस्पताल जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां से यादा गंभीर कानपुर रेफर किए गए। इस बीच हाईवे से लेकर अस्पताल तक घायलों की चीत्कार गूंजती रही।
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