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आधा दर्जन मजरे बने टापू, लोगों ने छोड़ा घर
Updated Sat, 01 Sep 2018 11:48 PM IST
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औंग। क्षेत्र में बाढ़ का पानी लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। देवमई और मलवां विकास खंड के गलाथा, आशा और अभयपुर के आधा दर्जन मजरे बाढ़ के चलते टापू बन गए हैं। घरों में पानी भर जाने से लोग दूसरे स्थानों पर डेरा जमा रहे हैं। जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सीिंह ने शनिवार देर शाम वहां पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सुनी और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का भरोसा दिया।
आशापुर के मजरा बेनी खेड़ा, गलाथा के मजरा बेरीनारी, अभयपुर के मजरा जाड़े का पुरवा, बिंदकी फार्म, सदनहा, काली कुंडी, बड़ाखेड़ा बाढ़ के चलते टापू बन गए हैं। यहां के लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है। शनिवार को जाड़े का पुरवा के श्रवण, रामकरन, सुखलाल, प्रकाश, मनीराम, ननका, विजय कुमार, ओम प्रकाश, दिनेश, सुरेश, रामपाल, धनीराम समेत एक दर्जन परिवार के लोग घर छोड़कर दूसरी जगह आ गए और स्वयं तंबू तिरपाल
लगाकर रह रहे हैं। प्रशासन स्तर से इन्हें अभी तक कोई सहायता नही मिली है। क्षेत्र में बनी बाढ़ चौकियां खाली रहती हैं। बिंदकी फार्म और बेनीखेड़ा के लोग निकलना शुरू कर देंगे। जिलाधिकारी जाड़े का पुरवा तक पहुंचे इसके आगे नहीं पहुंच पाए। डीएम बाढ़ पीड़ितों से मिले यहां पर लोगों ने ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान पर जगह उपलब्ध कराने की मांग की। बताया कि बाढ़ से क्षेत्र के नौ विद्यालयों में पानी भर गया है जिससे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। डीएम ने तहसीलदार प्रमेश श्रीवास्तव, हलका लेखपाल शुभम सिंह, सहायक लेखपाल अभिषेक गुप्ता, ग्राम प्रधान पुत्र संजय सिंह, आशापुर के प्रधान राजेश सिंह को आदेशित किया कि बाढ़ पीड़ितों को सुनिश्चित बाहर निकालने की व्यवस्था करें।
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5- बाढ़ का हाल देखने देर शाम पहुंचे डीएम
46- बाढ़ के पानी से घिरा तंबू, खेलते बच्चे
आधा दर्जन मजरे बने टापू, लोगों ने छोड़े घर
जिलाधिकारी ने बाढ़ पीड़ितों की सुनी समस्याएं
अमर उजाला ब्यूरो
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आशापुर के मजरा बेनी खेड़ा, गलाथा के मजरा बेरीनारी, अभयपुर के मजरा जाड़े का पुरवा, बिंदकी फार्म, सदनहा, काली कुंडी, बड़ाखेड़ा बाढ़ के चलते टापू बन गए हैं। यहां के लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है। शनिवार को जाड़े का पुरवा के श्रवण, रामकरन, सुखलाल, प्रकाश, मनीराम, ननका, विजय कुमार, ओम प्रकाश, दिनेश, सुरेश, रामपाल, धनीराम समेत एक दर्जन परिवार के लोग घर छोड़कर दूसरी जगह आ गए और स्वयं तंबू तिरपाल
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लगाकर रह रहे हैं। प्रशासन स्तर से इन्हें अभी तक कोई सहायता नही मिली है। क्षेत्र में बनी बाढ़ चौकियां खाली रहती हैं। बिंदकी फार्म और बेनीखेड़ा के लोग निकलना शुरू कर देंगे। जिलाधिकारी जाड़े का पुरवा तक पहुंचे इसके आगे नहीं पहुंच पाए। डीएम बाढ़ पीड़ितों से मिले यहां पर लोगों ने ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान पर जगह उपलब्ध कराने की मांग की। बताया कि बाढ़ से क्षेत्र के नौ विद्यालयों में पानी भर गया है जिससे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। डीएम ने तहसीलदार प्रमेश श्रीवास्तव, हलका लेखपाल शुभम सिंह, सहायक लेखपाल अभिषेक गुप्ता, ग्राम प्रधान पुत्र संजय सिंह, आशापुर के प्रधान राजेश सिंह को आदेशित किया कि बाढ़ पीड़ितों को सुनिश्चित बाहर निकालने की व्यवस्था करें।
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5- बाढ़ का हाल देखने देर शाम पहुंचे डीएम
46- बाढ़ के पानी से घिरा तंबू, खेलते बच्चे
आधा दर्जन मजरे बने टापू, लोगों ने छोड़े घर
जिलाधिकारी ने बाढ़ पीड़ितों की सुनी समस्याएं
अमर उजाला ब्यूरो