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पर्दानसीन महिलाओं ने घर के अंदर रह खोजा आय का जरिया
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फतेहपुर। शहर की पर्दानसीन 10 महिलाओं ने घर की दहलीज के अंदर रहकर आय का जरिया खोज निकाला है। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के माध्यम से पाकीजा नाम से महिला स्वयं सहायता समूह का गठन कर यह कढ़ाई से घरेलू खर्च चला रही हैं।
मलिन बस्ती गढ़ीवा में डूडा ने गरीब परिवारों की 10 महिलाओं को स्वयं सहायता समूह का 17 महीने पहले गठन किया था। इनको डूडा ने सिलाई-कढ़ाई की प्रशिक्षण देने के बाद काम खोजने में मदद की। पहले इन महिलाओं ने अपनी छोटी सी निजी पूंजी से कढ़ाई का कच्चा माल खरीदा। इसके बाद कपड़ों की सिलाई के
दुकानदारों से संपर्क कर उन्हें विश्वास में लेकर काम प्रारंभ किया। एक कपड़े की कढ़ाई में इन्हें 60 से 65 रुपये की आय होती है। काम के प्रति बढ़ती रुचि को देखते हुए डूडा ने डेढ़ महीने पहले समूह को 10 हजार रुपये का अनुदान दिया। इस धनराशि के समूह ने कढ़ाई का कच्चा माल खरीदा है। वर्तमान में समूह के पास 25 से 30 हजार रुपये की जमा पूंजी हो चुकी है। जरूरत पडने पर समूह में शामिल महिलाओं की आर्थिक मदद भी की जाती
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है। वर्तमान समय में शाइस्ता बेगम, गुुुुलस्ता खान, शाइस्ता शरीफ, सगुस्ता बेगम, रुकइया बेगम, सरैया बेगम, फरजाना बेगम, रुकसाना, अकबरी, अनमसा फात्मा पर्दानसीन महिलाएं जुड़ी हैं। समूह की अध्यक्ष साइस्ता बेगम ने बताया कि कपड़ा सिलाई के दुकानदार उनके घरों में कपड़ा दे जाते हैं और दूसरे दिन कढ़ा हुआ कपड़ा तय राशि देकर वापस ले जाते हैं। बताया कि इन दिनों अतिक्रमण अभियान के कारण काम प्रभावित हुआ है। अब फिर से धीरे काम बढना प्रारंभ हुआ है।
घर के अंदर रह खोजा आय का जरिया
- महिला स्वयं सहायता समूह गठन करने से मिली राह
- घर बैठे मिल रहा काम और मेहनताना
अमर उजाला ब्यूरो
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मलिन बस्ती गढ़ीवा में डूडा ने गरीब परिवारों की 10 महिलाओं को स्वयं सहायता समूह का 17 महीने पहले गठन किया था। इनको डूडा ने सिलाई-कढ़ाई की प्रशिक्षण देने के बाद काम खोजने में मदद की। पहले इन महिलाओं ने अपनी छोटी सी निजी पूंजी से कढ़ाई का कच्चा माल खरीदा। इसके बाद कपड़ों की सिलाई के
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दुकानदारों से संपर्क कर उन्हें विश्वास में लेकर काम प्रारंभ किया। एक कपड़े की कढ़ाई में इन्हें 60 से 65 रुपये की आय होती है। काम के प्रति बढ़ती रुचि को देखते हुए डूडा ने डेढ़ महीने पहले समूह को 10 हजार रुपये का अनुदान दिया। इस धनराशि के समूह ने कढ़ाई का कच्चा माल खरीदा है। वर्तमान में समूह के पास 25 से 30 हजार रुपये की जमा पूंजी हो चुकी है। जरूरत पडने पर समूह में शामिल महिलाओं की आर्थिक मदद भी की जाती
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है। वर्तमान समय में शाइस्ता बेगम, गुुुुलस्ता खान, शाइस्ता शरीफ, सगुस्ता बेगम, रुकइया बेगम, सरैया बेगम, फरजाना बेगम, रुकसाना, अकबरी, अनमसा फात्मा पर्दानसीन महिलाएं जुड़ी हैं। समूह की अध्यक्ष साइस्ता बेगम ने बताया कि कपड़ा सिलाई के दुकानदार उनके घरों में कपड़ा दे जाते हैं और दूसरे दिन कढ़ा हुआ कपड़ा तय राशि देकर वापस ले जाते हैं। बताया कि इन दिनों अतिक्रमण अभियान के कारण काम प्रभावित हुआ है। अब फिर से धीरे काम बढना प्रारंभ हुआ है।
घर के अंदर रह खोजा आय का जरिया
- महिला स्वयं सहायता समूह गठन करने से मिली राह
- घर बैठे मिल रहा काम और मेहनताना
अमर उजाला ब्यूरो