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रहते हैं नगर पालिका में, बिजली ग्रामीण जैसी
Updated Wed, 07 Jun 2017 12:31 AM IST
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रिहाइश नगर पालिका में, बिजली गांवों से भी बदतर
फतेहपुर। नगर पालिका की पूरी आबादी को अभी भी शहरी विद्युत आपूर्ति नसीब नहीं है। ऐसे में बड़ी आबादी को ग्रामीण क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पर ही संतोष करना पड़ रहा है। पचास साल बीतने के बाद भी अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस समस्या को लेकर आवाज नहीं उठाई है।
नगर पालिका परिषद का 1962 में विस्तार हुआ था। इस दौरान उधन्नापुर, शेषपुर, उनवॉ, गड़रियनपुरवा, बीबीपुर, जयरामपुर, अस्ती, मिट्ठनपुर, हरगनपुर, मधुपुरी अंदौली समेत 49 गांव शामिल किए गए थे।
इन गांवों के मतदाता इसके बाद से निकाय चुनाव में भागीदार बनते आ रहे हैं। इस आबादी को अभी तक शहरी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। यहां तक कि इन गांवों की बिजली आपूर्ति का मानक भी ग्रामीण इलाके के हिसाब से ही तय है।
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यही कारण है कि इन गांवों की पेयजल योजनाएं या तो चल नहीं पाईं या ग्रामीण मानक से मिलने वाली बिजली आपूर्ति पर ही चल रही हैं।
इसकी वजह एक चेयरमैन को छोड़कर बाकी की रिहाइश शहर इलाके में ही होना रही है। तेरह साल पहले अंदौली के शब्बीर खान चेयरमैन चुने गए थे।
उन्होंने अपने गांव में पेयजल योजना का निर्माण कराया था। शासन में पहल कर शहरी बिजली आपूर्ति की सुविधा दिलाई थी। इसके अलावा अन्य सभी गांवों को अभी तक ग्रामीण बिजली आपूर्ति ही मिल रही है।
नगर पालिका परिषद की ईओ रश्मि भारती का कहना है कि उनके स्तर से समय-समय पर पूरे नगर क्षेत्र को शहरी बिजली आपूर्ति देने का प्रस्ताव भेजा जाता है। उधर, चेयरमैन चंद्रप्रकाश लोधी ने बताया कि सपा सरकार में पूरे नगर क्षेत्र को शहरी आपूर्ति दिलाने के लिए पूरी कोशिश की गई थी। पत्रावली शासन में विचाराधीन है।
- सीमा विस्तार के बाद सिर्फ अंदौली को मिली शहरी बिजली, जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से इलाकाई लोग परेशान
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फतेहपुर। नगर पालिका की पूरी आबादी को अभी भी शहरी विद्युत आपूर्ति नसीब नहीं है। ऐसे में बड़ी आबादी को ग्रामीण क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पर ही संतोष करना पड़ रहा है। पचास साल बीतने के बाद भी अभी तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस समस्या को लेकर आवाज नहीं उठाई है।
नगर पालिका परिषद का 1962 में विस्तार हुआ था। इस दौरान उधन्नापुर, शेषपुर, उनवॉ, गड़रियनपुरवा, बीबीपुर, जयरामपुर, अस्ती, मिट्ठनपुर, हरगनपुर, मधुपुरी अंदौली समेत 49 गांव शामिल किए गए थे।
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इन गांवों के मतदाता इसके बाद से निकाय चुनाव में भागीदार बनते आ रहे हैं। इस आबादी को अभी तक शहरी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। यहां तक कि इन गांवों की बिजली आपूर्ति का मानक भी ग्रामीण इलाके के हिसाब से ही तय है।
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यही कारण है कि इन गांवों की पेयजल योजनाएं या तो चल नहीं पाईं या ग्रामीण मानक से मिलने वाली बिजली आपूर्ति पर ही चल रही हैं।
इसकी वजह एक चेयरमैन को छोड़कर बाकी की रिहाइश शहर इलाके में ही होना रही है। तेरह साल पहले अंदौली के शब्बीर खान चेयरमैन चुने गए थे।
उन्होंने अपने गांव में पेयजल योजना का निर्माण कराया था। शासन में पहल कर शहरी बिजली आपूर्ति की सुविधा दिलाई थी। इसके अलावा अन्य सभी गांवों को अभी तक ग्रामीण बिजली आपूर्ति ही मिल रही है।
नगर पालिका परिषद की ईओ रश्मि भारती का कहना है कि उनके स्तर से समय-समय पर पूरे नगर क्षेत्र को शहरी बिजली आपूर्ति देने का प्रस्ताव भेजा जाता है। उधर, चेयरमैन चंद्रप्रकाश लोधी ने बताया कि सपा सरकार में पूरे नगर क्षेत्र को शहरी आपूर्ति दिलाने के लिए पूरी कोशिश की गई थी। पत्रावली शासन में विचाराधीन है।
- सीमा विस्तार के बाद सिर्फ अंदौली को मिली शहरी बिजली, जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से इलाकाई लोग परेशान