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Fatehpur News: 12 गांवों में भरा पानी, फसलें बर्बाद, राहत शिविरों में बदइंतजामी

Tue, 19 Aug 2025 02:19 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 19 Aug 2025 02:19 AM IST
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12 villages flooded, crops destroyed, mismanagement in relief camps
फोटो-24-जाड़े का पुरवा स्थित कंपोजित विद्यालय में भरा बाढ़ का पानी। संवाद
औंग (फतेहपुर)। मलवां ब्लॉक क्षेत्र में गंगा और पांडु नदी की बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। सदनहा, मदारपुर, बड़ाखेड़ा, नयाखेड़ा, जाड़े का पुरवा और बेनीखेड़ा समेत 12 गांवों में बाढ़ का पानी घरों तक घुस गया है। खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण अपने परिवार और मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। किसानों की सालभर की मेहनत पल भर में बह गई और अब वे बर्बादी के मुहाने पर खड़े हैं।
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प्रभावित लोगों के लिए महुआ घाटी में अस्थायी राहत शिविर बनाया गया है, जहां करीब 200 लोग टेंटों के नीचे रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राहत सिर्फ कागजों पर है। न बिजली की समुचित व्यवस्था है, न साफ पानी और न ही सुरक्षा।
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महिलाओं, बुजुर्गों और नवयुवतियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भोजन में दिन-रात एक जैसा खाना मिल रहा है। इससे लोग नाराज है। उनका कहना है कि सिर्फ दो वक्त की रोटी से नहीं, उन्हें मुआवजा और ठोस मदद चाहिए।
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ग्रामीणों का आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि जिला प्रशासन के अधिकारी अब तक मौके पर नहीं पहुंचे हैं। वहीं लेखपाल बृजेंद्र यादव का एक ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह पत्रकारों के सामने ग्रामीणों को अपशब्द कह रहे हैं। प्रशासन ने उन्हें जरूर हटा दिया है, लेकिन ग्रामीण कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सोमवार को जहानाबाद विधायक राजेन्द्र सिंह पटेल, सीडीओ पवन कुमार मीणा और बीडीओ ने बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा किया। सीडीओ ने शिविरों में जनरेटर, लाइट और पेयजल टैंकर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत अब भी बदहाल बनी हुई है।
बाढ़ का असर सिर्फ घरों और खेतों तक सीमित नहीं है। बिंदकी फार्म स्थित कंपोजिट जूनियर विद्यालय में पानी भर गया है। प्रधानाचार्य अभिषेक शुक्ला के अनुसार 138 में से केवल 80 छात्र ही विद्यालय पहुंच पाए हैं। बाकी बच्चे अब पास के दूसरे स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल परिसर में सांप-बिच्छुओं जैसे जहरीले जीवों का खतरा भी मंडरा रहा है।
गंगा नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान 100.86 मीटर से ऊपर 101.19 मीटर पर बह रहा है। रविवार तक जहां जलस्तर प्रतिदिन 15 से 20 सेंटीमीटर बढ़ रहा था। सोमवार को केवल दो सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब पानी का स्तर धीरे-धीरे घटेगा। कटरी क्षेत्र के जाड़े का पुरवा, कालीकुंडी, दरियापुर कटरी, मल्लूखेड़ा, बबुरीखेड़ा और अभयपुर जैसे गांव अब भी पूरी तरह बाढ़ से घिरे हुए हैं।


बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दोनों टाइम के नाश्ते और भोजन की व्यवस्था कर दी गई है। साथ ही कई इंतजाम किए जा रहे है। स्कूली बच्चों के लिए आशापुर और दरियापुर के विद्यालयों को संबंध कर दिया गया है।
अचलेश सिंह, तहसीलदार, बिंदकी
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