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12 दिन में छह जगह पर हुई खांदी
अमर उजाला/फतेहपुर
Updated Sun, 15 Jan 2017 11:36 PM IST
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खांदी
- फोटो : amarujala
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नहर की खांदी से बर्बाद हो रही फसलों का दोषी कौन है? रामगंगा नहर में 12 दिन में करीब छह स्थानों पर खांदी कट चुकी हैं। किसानों की गेहूं, आलू, राई, सरसों की फसलों में पानी भर जाने से बर्बाद हो गई हैं। सिंचाई विभाग के अधिकारी खांदी होने में किसानों को दोषी बता रहे हैं। उधर खांदी काटने का आरोपी बनाए जाने के भय से किसान अधिकारियों का विरोध खुल कर नहीं कर रहे हैं। वे चुपचाप सब कुछ जानते हुए यह पीड़ा सहने को मजबूर हैं। किसानों से बातचीत पर एक खबर।
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फोटो परिचय-14
मकनपुर गांव के किसान बालराज ने बताया कि खागा रजबहा उनके गांव के पास से निकला है। रबी की फसल में हर साल नहर में खांदी होती है। आरोप लगाया कि सिल्ट सफाई के नाम पर अधिकारी खानापूरी करते हैं। पटरी को मजबूत नहीं करते हैं। किसानों की दिन रात की मेहनत को नहर का पानी एक झटके में बर्बाद कर देता है।
फर्सी गांव के किसान अशोक दिवाकर की नहर के पास 10 बीघा खेत हैं। इनका कहना है कि धान और गेहूं की फसल सींचने के समय नहर में पानी नहीं आता है। फसलों की सिंचाई करने के बाद ही पानी आता है। गेहूं फसल के सीजन में खागा रजबहे में हर साल खांदी कटती है। इससे धान की फसल तो किसी तरह से हो जाती है। गेहूं की फसल तैयार करने मेें कभी पहली सिंचाई के समय तो कभी फसल तैयार होने तक पानी से खेत भर जाते हैं। पिछले साल खांदी से उसकी दो बीघा फसल बेकार हो गई। मुआवजा नहीं मिला, उल्टा हमीं लोगों को दोषी बताया गया। इसके नुकसान का विभाग किसानों को मुआवजा तक नहीं देता है।
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मोहद्दीपुर गांव के किसान गजराज लोधी ने बताया कि खांदी होने का विरोध करने में अधिकारी उल्टा किसानों पर नहर काटने का इल्जाम लगाते हैं। खांदी कटने वाले स्थान के आसपास के किसानों पर रिपोर्ट भी दर्ज करा देते हैं। जबकि खांदी कटने से आसपास के ही किसानों का अधिक नुकसान होता है। खांदी के पानी के बहाव से ही फसल बर्बाद हो जाती है। करीब ढाई बीघा फसल खांदी से बर्बाद हुई। जब पूछो तो कहते हैं कि इसमें विभाग की गलती नहीं। खुद ही पूरा नुकसान झेलना पड़ा।
रामगंगा नहर में खांदी होने वाली शाखा का नाम व नुकसान
रजबहा गांव नुकसान बीघा में
खागा कला मोहम्मदपुर 150 बीघा
खागा सचौली 100 बीघा
खागा मुरांव 50 बीघा
सरसई संग्रामपुर 300 बीघा
प्रेमनगर प्रेमनगर 250 बीघा
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रामगंगा नहर के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह ने बताया कि क्षमता से कम नहर में पानी आता है। किसान अपनी फसलों को सींचने के लालच में अवैध कुलाबा लगा लेते हैं। इससे पटरी कमजोर हो जाती है। पानी के बहाव में उसी लगाए गए कुलाबों की जगहों पर खांदी होती है। ऐसे में किसानों की गलती रहती है तो विभाग मुआवजा क्यों दे?
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फोटो परिचय-14
मकनपुर गांव के किसान बालराज ने बताया कि खागा रजबहा उनके गांव के पास से निकला है। रबी की फसल में हर साल नहर में खांदी होती है। आरोप लगाया कि सिल्ट सफाई के नाम पर अधिकारी खानापूरी करते हैं। पटरी को मजबूत नहीं करते हैं। किसानों की दिन रात की मेहनत को नहर का पानी एक झटके में बर्बाद कर देता है।
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फर्सी गांव के किसान अशोक दिवाकर की नहर के पास 10 बीघा खेत हैं। इनका कहना है कि धान और गेहूं की फसल सींचने के समय नहर में पानी नहीं आता है। फसलों की सिंचाई करने के बाद ही पानी आता है। गेहूं फसल के सीजन में खागा रजबहे में हर साल खांदी कटती है। इससे धान की फसल तो किसी तरह से हो जाती है। गेहूं की फसल तैयार करने मेें कभी पहली सिंचाई के समय तो कभी फसल तैयार होने तक पानी से खेत भर जाते हैं। पिछले साल खांदी से उसकी दो बीघा फसल बेकार हो गई। मुआवजा नहीं मिला, उल्टा हमीं लोगों को दोषी बताया गया। इसके नुकसान का विभाग किसानों को मुआवजा तक नहीं देता है।
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मोहद्दीपुर गांव के किसान गजराज लोधी ने बताया कि खांदी होने का विरोध करने में अधिकारी उल्टा किसानों पर नहर काटने का इल्जाम लगाते हैं। खांदी कटने वाले स्थान के आसपास के किसानों पर रिपोर्ट भी दर्ज करा देते हैं। जबकि खांदी कटने से आसपास के ही किसानों का अधिक नुकसान होता है। खांदी के पानी के बहाव से ही फसल बर्बाद हो जाती है। करीब ढाई बीघा फसल खांदी से बर्बाद हुई। जब पूछो तो कहते हैं कि इसमें विभाग की गलती नहीं। खुद ही पूरा नुकसान झेलना पड़ा।
रामगंगा नहर में खांदी होने वाली शाखा का नाम व नुकसान
रजबहा गांव नुकसान बीघा में
खागा कला मोहम्मदपुर 150 बीघा
खागा सचौली 100 बीघा
खागा मुरांव 50 बीघा
सरसई संग्रामपुर 300 बीघा
प्रेमनगर प्रेमनगर 250 बीघा
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रामगंगा नहर के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह ने बताया कि क्षमता से कम नहर में पानी आता है। किसान अपनी फसलों को सींचने के लालच में अवैध कुलाबा लगा लेते हैं। इससे पटरी कमजोर हो जाती है। पानी के बहाव में उसी लगाए गए कुलाबों की जगहों पर खांदी होती है। ऐसे में किसानों की गलती रहती है तो विभाग मुआवजा क्यों दे?