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Farrukhabad News: 50 लाख का टेंडर, अब 43 लाख रुपये बढ़ाया बजट
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फर्रुखाबाद। रेलवे रोड को मॉडल बनाने का सपना दिखाने वाला पालिका प्रशासन नाला निर्माण में खर्च एस्टीमेट बनाने में भी चूक गया। इंजीनियर ने जो काम करीब 50 लाख पूरा कराने का टेंडर करवा था, मौके पर उससे आधा काम भी न हुआ। अब वही स्टीमेट रिवायज करके 43 लाख रुपये और बढ़ा दिया गया। काम शुरू होने से पांडेश्वरनाथ मंदिर के आसपास के दुकानदारों का व्यापार चौपट हो गया है।
शहर के मुख्यमार्गों में शामिल रेलवे रोड के दुकानदारों की दिक्कतें दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं। पालिका ने ढाई साल पहले अतिक्रमण हटवाने के लिए तीन-तीन मंजिल ऊंची इमारतों के अगले हिस्से को तुड़वाया। पालिका के इंजीनियरों ने चौक से रेलवे स्टेशन तक दोनों तरफ नाला निर्माण का करीब 50 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर टेंडर कर दिया। दो कार्यदायी संस्थाओं ने काम शुरू किया। रुक-रुक कर करीब एक साल चले काम में नाला आधी दूरी तक ही बन सका। संस्थाओं ने रकम खर्च होने की बात कह दी। इसके बाद पालिका ने उसी टेंडर को रिवायज करके 43 लाख रुपये और स्वीकृत कर काम शुरू करवा दिया। यहां सवाल उठता है कि पालिका के इंजीनियरों को पहले यह जानकारी नहीं थी कि इस काम में कितनी रकम खर्च होगी। जबकि सच तो यह है कि टेंडर में जिस काम को दो माह में पूरा होने था, उसे रोक-रोक कर एक साल तक किया जाता रहा। इसी के चलते पालिका को 43 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े।
पांडेश्वर नाथ मंदिर के नजदीक नाला खोदाई और निर्माण कार्य शुरू होने से दुकानदारों के यहां ग्राहकों का आना पूरी तरह से बंद हो गया है। काम की गति भी काफी धीमी बताई जा रही है। इससे साफ है कि अब फिर से दुकानदारों को महीनों तक हाथ पर हाथ रखकर बैठना होगा। पालिका के जिम्मेदारों की लापरवाही का दुकानदार खामियाजा भुगत रहे हैं।
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- नाला निर्माण में देरी की वजह से बजट रिवायज नहीं करना पड़ा। बल्कि कई स्थानों पर नाले की गहराई और चौड़ाई बढ़ने से निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। जो बजट रिवायज किया है, वह पुराने रेट पर ही है। सब काम नियमानुसार किया जा रहा है।
-विनोद कुमार, ईओ, नगर पालिका परिषद।
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शहर के मुख्यमार्गों में शामिल रेलवे रोड के दुकानदारों की दिक्कतें दूर होने का नाम नहीं ले रही हैं। पालिका ने ढाई साल पहले अतिक्रमण हटवाने के लिए तीन-तीन मंजिल ऊंची इमारतों के अगले हिस्से को तुड़वाया। पालिका के इंजीनियरों ने चौक से रेलवे स्टेशन तक दोनों तरफ नाला निर्माण का करीब 50 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर टेंडर कर दिया। दो कार्यदायी संस्थाओं ने काम शुरू किया। रुक-रुक कर करीब एक साल चले काम में नाला आधी दूरी तक ही बन सका। संस्थाओं ने रकम खर्च होने की बात कह दी। इसके बाद पालिका ने उसी टेंडर को रिवायज करके 43 लाख रुपये और स्वीकृत कर काम शुरू करवा दिया। यहां सवाल उठता है कि पालिका के इंजीनियरों को पहले यह जानकारी नहीं थी कि इस काम में कितनी रकम खर्च होगी। जबकि सच तो यह है कि टेंडर में जिस काम को दो माह में पूरा होने था, उसे रोक-रोक कर एक साल तक किया जाता रहा। इसी के चलते पालिका को 43 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े।
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पांडेश्वर नाथ मंदिर के नजदीक नाला खोदाई और निर्माण कार्य शुरू होने से दुकानदारों के यहां ग्राहकों का आना पूरी तरह से बंद हो गया है। काम की गति भी काफी धीमी बताई जा रही है। इससे साफ है कि अब फिर से दुकानदारों को महीनों तक हाथ पर हाथ रखकर बैठना होगा। पालिका के जिम्मेदारों की लापरवाही का दुकानदार खामियाजा भुगत रहे हैं।
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- नाला निर्माण में देरी की वजह से बजट रिवायज नहीं करना पड़ा। बल्कि कई स्थानों पर नाले की गहराई और चौड़ाई बढ़ने से निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। जो बजट रिवायज किया है, वह पुराने रेट पर ही है। सब काम नियमानुसार किया जा रहा है।
-विनोद कुमार, ईओ, नगर पालिका परिषद।