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गंगा में वजू कर मस्जिद में पढ़ी नमाज
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पांचालघाट गंगा तट पर बजू करते मुस्लिम समाज के लोग।
- फोटो : FARRUKHABAD
जिले की गंगा-जमुनी तहजीब यूं ही मिसाल नहीं बनी। यहां चेहरे से लेकर दिलों तक एकता की ही भावनाएं जाग्रत होती हैं। शुक्रवार को अयोध्या मंदिर पर फैसला आया तो सभी ने उसका स्वागत किया। दोपहर को नमाज का वक्त हुआ तो मुस्लिम भाइयों ने मां भागीरथी का रुख किया। गंगा जल से वजू करने के बाद मस्जिद में नमाज अदा कर मुल्क में अमन-चैन की दुआ की।
अयोध्या प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर प्रशासन की सतर्कता के चलते शनिवार को भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा। इसी क्रम में पांचाल घाट चौकी पर ग्राम पंचायत सोता बहादुरपुर के प्रधान जमील अहमद व नारद सेवा संस्थान पांचाल घाट अध्यक्ष रामकिशोर सारस्वत शांति व्यवस्था के सहयोग को डटे थे।
दोनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए तारीफ भी की। दोपहर में नमाज का वक्त हुआ तो प्रधान कुर्सी से उठे तो पूछने पर बताया कि वह गंगा तट पर वजू करने जा रहे हैं। कुछ आगे बढ़े तो अन्य मुस्लिम भाई भी उसी ओर जाते दिखे। पांचाल घाट पुल से नीचे पहुंचकर सभी ने एक साथ गंगाजल में वजू किया।
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वजू करने वाले मो.सलीम, शेर अली, नसीम अहमद, मेहराज, शहीद भाई, कुतुबुद्दीन, अरशद, अन्नू, अफजल, मुश्ताक, अख्तर मुल्लाजी ने कहा कि वह लोग नमाज के वक्त पांचाल घाट के पास होते तो अक्सर गंगा जल से ही वजू करते हैं।
जब घर पर होते हैं, तो घर से वजू कर नमाज पढ़ने जाते हैं। सभी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। जनपद में हिंदू-मुस्लिम एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे। इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।
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अयोध्या प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर प्रशासन की सतर्कता के चलते शनिवार को भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में पुलिस बल तैनात रहा। इसी क्रम में पांचाल घाट चौकी पर ग्राम पंचायत सोता बहादुरपुर के प्रधान जमील अहमद व नारद सेवा संस्थान पांचाल घाट अध्यक्ष रामकिशोर सारस्वत शांति व्यवस्था के सहयोग को डटे थे।
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दोनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए तारीफ भी की। दोपहर में नमाज का वक्त हुआ तो प्रधान कुर्सी से उठे तो पूछने पर बताया कि वह गंगा तट पर वजू करने जा रहे हैं। कुछ आगे बढ़े तो अन्य मुस्लिम भाई भी उसी ओर जाते दिखे। पांचाल घाट पुल से नीचे पहुंचकर सभी ने एक साथ गंगाजल में वजू किया।
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वजू करने वाले मो.सलीम, शेर अली, नसीम अहमद, मेहराज, शहीद भाई, कुतुबुद्दीन, अरशद, अन्नू, अफजल, मुश्ताक, अख्तर मुल्लाजी ने कहा कि वह लोग नमाज के वक्त पांचाल घाट के पास होते तो अक्सर गंगा जल से ही वजू करते हैं।
जब घर पर होते हैं, तो घर से वजू कर नमाज पढ़ने जाते हैं। सभी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। जनपद में हिंदू-मुस्लिम एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे। इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।