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Farrukhabad News: पांच सेमी गिरा जलस्तर, किसानों की मुश्किल बरकरार
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अमृतपुर। दो दिनों से गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पर बह रहा था। नरौरा बांध से से छोड़े जाने वाले पानी में कमी आते ही जलस्तर पांच सेमी नीचे आ गया। थोड़ा जलस्तर गिरने से ही किसानों को राहत की उम्मीद जगी है। खेतों में बाढ़ का पानी भरने से किसानों को मक्का की फसल घर तक लाने में लाले पड़ रहे हैं।
मंगलवार को गंगा के जलस्तर में शाम को कमी दर्ज की गई। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से कम होकर 136.55 मीटर पर पहुंच गया। नरौरा बांध से गंगा में 57677 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। कम मात्रा में पानी छोड़े जाने से किसानों को आशा बंधी है कि अब खेतों में भरा पानी उतर सकता है। फिलहाल बाढ़ का पानी तीसराम की मड़ैया, आशा की मड़ैया, ऊगरपुर, सुंदरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, कुंडरी सारंगपुर, करनपुर घाट, रामपुर, जोगराजपुर, लायलपुर, रतनपुर के पास पहुंचे गया है।
खेत में बाढ़ का पानी भरा होने से किसान मक्का के भुट्टा तोड़ कर नाव से ऊंचे स्थान पर लाने को मजबूर हैं। गांव तीसराम की मड़ैया के विपिन कुमार, विनोद कुमार, अभीताप राजपूत, राजाराम आदि ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल बाढ़ में कई जगह सड़क कट गई थी। लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा सही नहीं कराई गई। बालू डाल कर गड्ढे भर दिए गए। बाढ़ का पानी और बढ़ने पर बालू पानी में बह जाएगी जिससे रास्ता बंद हो जाएगा। ग्रामीणों को नाव का ही सहारा बचेगा। वहीं रामगंगा नदी में खो, हरेली, रामनगर बांध से 677 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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मंगलवार को गंगा के जलस्तर में शाम को कमी दर्ज की गई। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 136.60 मीटर से कम होकर 136.55 मीटर पर पहुंच गया। नरौरा बांध से गंगा में 57677 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। कम मात्रा में पानी छोड़े जाने से किसानों को आशा बंधी है कि अब खेतों में भरा पानी उतर सकता है। फिलहाल बाढ़ का पानी तीसराम की मड़ैया, आशा की मड़ैया, ऊगरपुर, सुंदरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, कुंडरी सारंगपुर, करनपुर घाट, रामपुर, जोगराजपुर, लायलपुर, रतनपुर के पास पहुंचे गया है।
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खेत में बाढ़ का पानी भरा होने से किसान मक्का के भुट्टा तोड़ कर नाव से ऊंचे स्थान पर लाने को मजबूर हैं। गांव तीसराम की मड़ैया के विपिन कुमार, विनोद कुमार, अभीताप राजपूत, राजाराम आदि ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल बाढ़ में कई जगह सड़क कट गई थी। लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा सही नहीं कराई गई। बालू डाल कर गड्ढे भर दिए गए। बाढ़ का पानी और बढ़ने पर बालू पानी में बह जाएगी जिससे रास्ता बंद हो जाएगा। ग्रामीणों को नाव का ही सहारा बचेगा। वहीं रामगंगा नदी में खो, हरेली, रामनगर बांध से 677 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
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