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Farrukhabad News: घरों में भरा पानी, रास्ते कटे, बाढ़ पीड़ितों का जीना दूभर
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संवाद न्यूज एजेंसी
अमृतपुर। गंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर (सेमी.) कम होने के बावजूद दुश्वारियां बरकरार हैं। घरों तक बाढ़ का पानी भरा है, रास्ते कटे होने आवागमन भी ठप है, इससे बाढ़ पीड़ितों का जीना दूभर हो गया है। गांव में बीमारी फैल रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं पहुंच रही हैं।
पहाड़ों पर बारिश के चलते हरिद्वार, बिजनौर, नरौरा बांध में लगातार पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर उफान पर है। गुरुवार को जलस्तर पांच सेमी कम होने के बावजूद खतरे के निशान 137.10 मीटर से 15 सेमी ऊपर 137.25 मीटर पर है। नरौरा बांध से गंगा में एक लाख 14909 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। वहीं
रामगंगा का जलस्तर 134.80 मीटर पर स्थिर है। रामनगर बैराज से 3994 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा नदी के किनारे के गांव कोला सोता, अलादपुर भटौली के खेतों में कटान हो रहा है। गंगा की बाढ़ से हर तरफ संकट खड़ा है। गांव नगला खुशहाली, डांडीपुर, भरखा, इमादपुर सोमवंशी, कनकापुर, दहेलिया आदि गांवों को जाने वाले रास्ते कट गए हैं। गांव तक वाहन न पहुंचने से ग्रामीण खाद्य सामग्री भी नहीं ले जा पा रहे हैं।
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दर्जनों लोग बीमार
गांव मंझा के ग्रामीण पानी से चारो ओर से घिरे हैं। इस गांव में दर्जनों लोग बीमार है, लेकिन स्वास्थ्य कर्मी नहीं पहुंचे। सुंदरपुर, कछुआ गाढ़ा, तीसराम की मड़ैया, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर आदि गांव के ग्रामीणों के कहना है कि एसडीएम सड़क किनारे गांव देखकर तहसील वापस चले जाते हैं।
विवाद होते देख थाने भेजी राहत सामग्री
फोटो - 25,
अमृतपुर। तहसील क्षेत्र के गांव फकरपुर में बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण होने की सूचना पर ग्राम पंचायत व पूर्व प्रधान अपने चहेतों को राहत सामग्री वितरण कराने के लिए सक्रिय हो गए। इससे गांव में विवाद होने लगा। यह देख तहसीलदार कर्मवीर सिंह ने लेखपाल से कहा जिन घरों में बाढ़ का पानी भरा है, उनमें से एक भी ग्रामीण न छूटे। सही से सूची बनाई जाए। लेखपाल ने पात्र बाढ़ पीड़ित 100 लोगों की सूची बनाई। पुलिस की देखरेख में राहत सामग्री वितरण की गई है। बाढ़ पीड़ितो को समोसा खिलाया और ठंडा पिलाकर घर भेजा है। प्रधान व पूर्व प्रधान को माला पहनाकर एक दूसरे से हाथ मिलवाकर घर भेज दिया।
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अमृतपुर। गंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर (सेमी.) कम होने के बावजूद दुश्वारियां बरकरार हैं। घरों तक बाढ़ का पानी भरा है, रास्ते कटे होने आवागमन भी ठप है, इससे बाढ़ पीड़ितों का जीना दूभर हो गया है। गांव में बीमारी फैल रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीमें नहीं पहुंच रही हैं।
पहाड़ों पर बारिश के चलते हरिद्वार, बिजनौर, नरौरा बांध में लगातार पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर उफान पर है। गुरुवार को जलस्तर पांच सेमी कम होने के बावजूद खतरे के निशान 137.10 मीटर से 15 सेमी ऊपर 137.25 मीटर पर है। नरौरा बांध से गंगा में एक लाख 14909 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया है। वहीं
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रामगंगा का जलस्तर 134.80 मीटर पर स्थिर है। रामनगर बैराज से 3994 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा नदी के किनारे के गांव कोला सोता, अलादपुर भटौली के खेतों में कटान हो रहा है। गंगा की बाढ़ से हर तरफ संकट खड़ा है। गांव नगला खुशहाली, डांडीपुर, भरखा, इमादपुर सोमवंशी, कनकापुर, दहेलिया आदि गांवों को जाने वाले रास्ते कट गए हैं। गांव तक वाहन न पहुंचने से ग्रामीण खाद्य सामग्री भी नहीं ले जा पा रहे हैं।
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दर्जनों लोग बीमार
गांव मंझा के ग्रामीण पानी से चारो ओर से घिरे हैं। इस गांव में दर्जनों लोग बीमार है, लेकिन स्वास्थ्य कर्मी नहीं पहुंचे। सुंदरपुर, कछुआ गाढ़ा, तीसराम की मड़ैया, हरसिंहपुर कायस्थ, ऊगरपुर आदि गांव के ग्रामीणों के कहना है कि एसडीएम सड़क किनारे गांव देखकर तहसील वापस चले जाते हैं।
विवाद होते देख थाने भेजी राहत सामग्री
फोटो - 25,
अमृतपुर। तहसील क्षेत्र के गांव फकरपुर में बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री वितरण होने की सूचना पर ग्राम पंचायत व पूर्व प्रधान अपने चहेतों को राहत सामग्री वितरण कराने के लिए सक्रिय हो गए। इससे गांव में विवाद होने लगा। यह देख तहसीलदार कर्मवीर सिंह ने लेखपाल से कहा जिन घरों में बाढ़ का पानी भरा है, उनमें से एक भी ग्रामीण न छूटे। सही से सूची बनाई जाए। लेखपाल ने पात्र बाढ़ पीड़ित 100 लोगों की सूची बनाई। पुलिस की देखरेख में राहत सामग्री वितरण की गई है। बाढ़ पीड़ितो को समोसा खिलाया और ठंडा पिलाकर घर भेजा है। प्रधान व पूर्व प्रधान को माला पहनाकर एक दूसरे से हाथ मिलवाकर घर भेज दिया।