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Farrukhabad News: पड़ोसी के पुत्र की बलि चढ़ाने में ग्रामीण पर दोष सिद्ध
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फर्रुखाबाद। 24 साल पहले आठ वर्षीय बालक की बलि चढ़ाकर हत्या कर दी गई थी। मामले में पीड़ित पिता ने गांव के पिता व पुत्र के खिलाफ हत्या कर शव छुपाने का मुकदमा दर्ज कराया था। शुक्रवार को मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट डॉ. अनिल कुमार सिंह ने आरोपी को हत्या करने के अपराध में दोषी ठहराया। आरोपी को तीन फरवरी को सजा सुनाई जाएगी।
शमशाबाद थाना क्षेत्र के गांव खुडिनाखार निवासी रामपाल ने गांव के पिता व पुत्र के खिलाफ आठ साल के पुत्र की बलि चढ़ाकर हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि छह मार्च 2001 को वह खेतों में काम करने गया था। घर पर उसका आठ साल का पुत्र प्रदीप कुमार उर्फ लालू था। लालू खेलते-खेलते पड़ोसी सतीश चंद्र के घर चला गया। शाम को जब वह खेत से घर लौटा तो पत्नी ने बताया कि पुत्र अभी तक घर नहीं आया है।
गांव में पुत्र की तलाश करने पर पड़ोसी रघुवीर व प्रेमचंद्र ने बताया कि उसके पुत्र को दोपहर में सतीश चंद्र के आंगन में खेलते देखा था। उस दौरान सतीश व उसके पिता मदनलाल भी थे। जब उसने सतीश चंद्र से पुत्र के बारे में जानकारी की तो सतीश ने बताया कि तुम्हारा पुत्र आया था। कुछ समय खेलने के बाद चला गया। उसने पुत्र की काफी तलाश की पर उसका कहीं पता नहीं चला। शक होने पर आठ मार्च को वह गांव वालों के साथ सतीश चंद के घर पहुंचा। ग्रामीणों के साथ उसे आता देख सतीश चंद्र व उसके पिता मदनलाल घर छोड़कर भाग गए।
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घर के अंदर जाकर देखा तो कमरे में उसके पुत्र का शव टांड़ पर रखी लकड़ियों के पटलों में छिपा मिला। रामपाल की तहरीर पर पुलिस ने हत्या कर शव छुपाने के मामले में सतीश चंद्र व मदन लाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की। विवेचक ने विवेचना पूरी कर हत्या कर शव छुपाने के मामले में दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। आरोपी मदनलाल को न्यायालय द्वारा पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
आरोपी सतीश चंद्र काफी समय से पागल बनने का नाटक कर न्यायालय की कार्रवाई से बचता रहा। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट डॉ. अनिल कुमार सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। गवाह व साक्ष्य के आधार पर हत्या कर शव छुपाने के मामले में आरोपी सतीश चंद्र को दोषी करार दिया। आरोपी को तीन फरवरी को सजा सुनाई जाएगी।
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शमशाबाद थाना क्षेत्र के गांव खुडिनाखार निवासी रामपाल ने गांव के पिता व पुत्र के खिलाफ आठ साल के पुत्र की बलि चढ़ाकर हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि छह मार्च 2001 को वह खेतों में काम करने गया था। घर पर उसका आठ साल का पुत्र प्रदीप कुमार उर्फ लालू था। लालू खेलते-खेलते पड़ोसी सतीश चंद्र के घर चला गया। शाम को जब वह खेत से घर लौटा तो पत्नी ने बताया कि पुत्र अभी तक घर नहीं आया है।
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गांव में पुत्र की तलाश करने पर पड़ोसी रघुवीर व प्रेमचंद्र ने बताया कि उसके पुत्र को दोपहर में सतीश चंद्र के आंगन में खेलते देखा था। उस दौरान सतीश व उसके पिता मदनलाल भी थे। जब उसने सतीश चंद्र से पुत्र के बारे में जानकारी की तो सतीश ने बताया कि तुम्हारा पुत्र आया था। कुछ समय खेलने के बाद चला गया। उसने पुत्र की काफी तलाश की पर उसका कहीं पता नहीं चला। शक होने पर आठ मार्च को वह गांव वालों के साथ सतीश चंद के घर पहुंचा। ग्रामीणों के साथ उसे आता देख सतीश चंद्र व उसके पिता मदनलाल घर छोड़कर भाग गए।
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घर के अंदर जाकर देखा तो कमरे में उसके पुत्र का शव टांड़ पर रखी लकड़ियों के पटलों में छिपा मिला। रामपाल की तहरीर पर पुलिस ने हत्या कर शव छुपाने के मामले में सतीश चंद्र व मदन लाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की। विवेचक ने विवेचना पूरी कर हत्या कर शव छुपाने के मामले में दोनों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। आरोपी मदनलाल को न्यायालय द्वारा पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
आरोपी सतीश चंद्र काफी समय से पागल बनने का नाटक कर न्यायालय की कार्रवाई से बचता रहा। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट डॉ. अनिल कुमार सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। गवाह व साक्ष्य के आधार पर हत्या कर शव छुपाने के मामले में आरोपी सतीश चंद्र को दोषी करार दिया। आरोपी को तीन फरवरी को सजा सुनाई जाएगी।