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Farrukhabad News: नवजात की मौत, शव देने से इन्कार पर हंगामा व मारपीट

Thu, 17 Aug 2023 11:16 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 17 Aug 2023 11:16 PM IST
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Uproar and fight over death of newborn, refusal to give dead body
संवाद न्यूज एजेंसी
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फर्रुखाबाद। इलाज के दौरान नवजात की मौत के बाद शव देने से इन्कार करने पर परिजनों ने हंगामा कर दिया। शव लेने अंदर घुसने पर कर्मचारियों ने रोका, तो दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। परिजन जबरन शव निकाल लाए। अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस के सामने परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। करीब दो घंटे बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
अमृतपुर थाने के गांव कोला सोता निवासी राजन सिंह की पत्नी सुमन ने छह दिन पहले निजी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। तबियत खराब होने पर उसे लोहिया अस्पताल के सामने शरण अस्पताल में भर्ती करवा दिया। वहां उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजनों ने 18 हजार रुपये जमा कर दिए थे। गुरुवार दोपहर बच्चे की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने इलाज में खर्च बकाया बिल जमा करने की बात कही, तो हंगामा शुरू हो गया।
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कर्मियों ने बिल जमा न करने तक शव देने से इन्कार कर दिया। परिजनों की सूचना पर ग्राम प्रधान के पति राकेश परमार, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र परमार भी पहुंच गए। उन्होंने बात करने का प्रयास किया, तो कर्मचारियों ने अभद्र भाषा शुरू कर दी। इस पर सभी लोग अस्पताल में घुस गए और बच्चे को जबरन निकाल लाए। इस दौरान विरोध करने वाले कुछ अस्पताल कर्मियों की धुनाई भी हो गई।
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मारपीट की सूचना मिलते ही अस्पताल संचालक सिद्धार्थ गुप्ता उर्फ लिटिल ने पुलिस को सूचना दे दी। इस पर आवास विकास चौकी प्रभारी पहुंच गए। उन्होंने समझा बुझाकर शांत किया। बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया। अस्पताल ने जमा रुपये वापस करके बिल भी माफ कर दिया। अस्पताल प्रबंधक लिटिल ने बताया कि बच्चे की हालत गंभीर थी। परिजनों को बता दिया था। कोई विशेष बात नहीं है। उन्होंने पैसे वापस करके बिल माफ कर दिया। मामला निपट गया है।

दरोगा और जिला पंचायत सदस्य से हुआ विवाद
मामला निपटने वाला था, तभी जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र परमार और चौकी प्रभारी से विवाद शुरू हो गया। चौकी प्रभारी ने सीसीटीवी फुटेज में मारपीट दिखने पर मुकदमा लिखने की बात कही। देवेंद्र ने कहा कि ऐसा नहीं है कि पीड़ित पक्ष की न सुनी जाए। शव को अस्पताल में बंद कर लिया गया, तब पुलिस ने दिलवाने की कोशिश तक नहीं की। पैसे वालों से मिलीभगत के चलते पुलिस पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाती है।
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