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सात में से दो जगह लगे कैमरे, वह भी बंद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 25 Feb 2015 11:30 PM IST
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शहर में तीसरी आंख अंधी है। तिराहा व चौराहे पर लगे दोनो कैमरे बंद पड़े
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हैं। एक कैमरा साढ़े तीन लाख रुपये में खरीदा गया था। कैमरे बंद होने से
अराजक तत्वाें की निगहबानी नहीं हो पा रही है। सात लाख रुपया भी डंप हो गया
है। वर्ष 2014 में तत्कालीन एसपी जोगेंद्र सिंह यादव ने शहर में
कैमरे लगवाने का खाका तैयार करवाया था। शहर में सात जगह कैमरे लगने थे।
चौक, रेलवे स्टेशन फर्रुखाबाद, पांचाल घाट, आवास विकास तिराहा, घुमना को भी कैमरे लगाने के लिए चिन्हित किया गया था। यह काम बागपत की यूपीकोन एजेंसी को दिया गया था। एजेंसी ने मई 2014 में मिलेट्री चौराहा व लाल दरवाजा तिराहा पर कैमरे लगाए थे।
एक माह के बाद ही यह बंद हो गए। तब से इन्हें चालू नहीं किया जा सका है। तबसे कंट्रोल रूम भी ठप पड़ा है। यह कैमरे वायरलेस हैं। सेटेलाइट के जरिए यह रिकार्डिंग को पुलिस लाइन स्थित में भेजेंगे। यहां से मॉनीटरिंग की जानी है। मॉनीटरिंग टीम यहां से पुलिसकर्मियाें को संदेश प्रसारित करती। कैमरे बंद होने से पूरी योजना फे ल हो गई है।
यह होना था फायदा
- वारदात को अंजाम देकर भागने वालाें की निगहबानी।
- हंगामा करने वाले आते दायरे में।
- अराजक तत्वाें पर नजर।
- नोइंट्री तोड़ने वाले वाहनाें का देखना।
- यातायात का नियम उल्लंघन करने वालाें को ट्रेस करना।
क्या बोले जिम्मेदार
आरआई रेडियो एमके दुबे का कहना है कि कैमरों में तकनीकी खामी है। इसके लिए एजेंसी को लिखा गया है। एजेंसी से मैकेनिकाें के आते ही इन्हें ठीक करा लिया जाएगा। इसके बाद इनका विधिवत संचालन करके योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
चौक, रेलवे स्टेशन फर्रुखाबाद, पांचाल घाट, आवास विकास तिराहा, घुमना को भी कैमरे लगाने के लिए चिन्हित किया गया था। यह काम बागपत की यूपीकोन एजेंसी को दिया गया था। एजेंसी ने मई 2014 में मिलेट्री चौराहा व लाल दरवाजा तिराहा पर कैमरे लगाए थे।
एक माह के बाद ही यह बंद हो गए। तब से इन्हें चालू नहीं किया जा सका है। तबसे कंट्रोल रूम भी ठप पड़ा है। यह कैमरे वायरलेस हैं। सेटेलाइट के जरिए यह रिकार्डिंग को पुलिस लाइन स्थित में भेजेंगे। यहां से मॉनीटरिंग की जानी है। मॉनीटरिंग टीम यहां से पुलिसकर्मियाें को संदेश प्रसारित करती। कैमरे बंद होने से पूरी योजना फे ल हो गई है।
यह होना था फायदा
- वारदात को अंजाम देकर भागने वालाें की निगहबानी।
- हंगामा करने वाले आते दायरे में।
- अराजक तत्वाें पर नजर।
- नोइंट्री तोड़ने वाले वाहनाें का देखना।
- यातायात का नियम उल्लंघन करने वालाें को ट्रेस करना।
क्या बोले जिम्मेदार
आरआई रेडियो एमके दुबे का कहना है कि कैमरों में तकनीकी खामी है। इसके लिए एजेंसी को लिखा गया है। एजेंसी से मैकेनिकाें के आते ही इन्हें ठीक करा लिया जाएगा। इसके बाद इनका विधिवत संचालन करके योजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा।