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टेंडरों की हेराफेरी में आबकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा

Sat, 01 Apr 2017 11:06 PM IST
फर्रुखाबाद
फर्रुखाबाद Updated Sat, 01 Apr 2017 11:06 PM IST
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Trial against the Excise Officer in fudging tenders
सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : SELF
फर्रुखाबाद। शराब के ठेके के लिए डाले गए पांच टेंडरों में हेरफेरी कर दूसरे के नाम टेंडर निकाल देने के आरोप में जिला आबकारी अधिकारी व दो अन्य के खिलाफ जिलाधिकारी के निर्देश पर फतेहगढ़ कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ है।
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दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने कहा है कि 31 मार्च को देशी शराब दुकान सेंट्रल जेल चौराहा, मंडी रोड फर्रुखाबाद, सिविल लाइन मढ़ैया, खंता नाला फर्रुखाबाद सुल्तान नगर से टेंडर डाले गए थे
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। इसमें बहोरिकपुर अंग्रेजी शराब की दुकान का भी टेंडर शामिल था। सार्वजनिक लॉटरी के माध्यम से प्राप्त आवेदन पत्रों में से ठेकों का आवंटन होना था। इस मौके पर अशोक कुमार अपर पुलिस अधीक्षक मौजूद थे। एसके सोनकर जिला आबकारी अधिकारी ने उनके समक्ष एक आवेदन पत्र प्रस्तुत किया। आवेदन पत्रों की जांच नगर मजिस्ट्रेट शिवबहादुर सिंह से की तो गड़बड़ी पाई।
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डीएम के अनुसार देशी शराब दुकान सिविल लाइन मढ़ैया के लिए आवेदन पत्र में जिला आबकारी अधिकारी ने राकेश कुमार के स्थान पर छदम् व्यक्ति मिथलेश कुमार मन्नालाल निवासी शास्त्री नगर उन्नाव का हस्ताक्षर कराकर ऑफर प्रपत्र स्वीकृत करके प्रस्तुत किया। इससे अनुचित लाभ पहुंचाने की कुचेष्टा की गई है। मिथलेश कुमार से दुरभि संधि की गई है। इसलिए जिला आबकारी अफसर का यह कृत्य जालसाजी व अधिकारियों के साथ धोखाधड़ी करने की परिधि में आता है। इसी तरह अन्य मामलों में गड़बड़ी मिली है।

फतेहगढ़ के कार्यवाहक कोतवाल प्रदीप यादव ने बताया कि इस मामले की विवेचना उन्हें सौंपी गई है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी। आबकारी अधिकारी के साथ राकेश व मिथलेश को भी आरोपी बनाया गया है।  उधर आबकारी अधिकारी का कहना है कि उनका कोई दोष नहीं है। यदि टेंडर गलत प्रतीत हुआ था तो उसे पहले ही निरस्त कर देना चाहिए था। उन पर लगाए गए जालसाजी के आरोप गलत हैं।

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शासन को भी भेजी गई रिपोर्ट
डीएम के अनुसार 30 मार्च को जिला आबकारी अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र बिक्री में भी भूमिका संदिग्ध एवं राजकीय कार्य करने में पारदर्शिता न होने की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। नगर मजिस्ट्रेट शिवबहादुर सिंह की जांच आख्या व समस्त अभिलेखों की छाया प्रतियां भी भेजी गई हैं।
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