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हादसे के बाद स्लीपर बसों को तलाशने निकले अफसर

Sun, 12 Jan 2020 12:30 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jan 2020 12:30 AM IST
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tokan ka khel
फर्रुखाबाद। छिबरामऊ में हुए भीषण हादसे के बाद हरकत में आए अफसर स्लीपर बसों की तलाश में मोहम्मदाबाद, कायमगंज से लेकर कई स्थानों पर गए। हालांकि एक भी बस पकड़ने में कामयाब नहीं हो सके। महीनों से पुलिस प्रशासन व एआरटीओ की संयुक्त चेकिंग नहीं हुई है। एआरएम ने तीन माह पहले विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाने पर डग्गामार वाहनों व स्लीपर बसों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई के लिए एसपी, डीएम, एआरटीओ को पत्र भेजा था। हुआ कुछ नहीं।
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शुक्रवार को हुए हादसे के बाद रात में ही एआरटीओ शांतिभूषण पांडेय व पीटीओ वीके आनंद घटनास्थल पर रवाना हो गए थे। सुबह चार बजे तक दोनों वहीं मौजूद रहे। शनिवार को डीएम मानवेंद्र सिंह ने एआरटीओ को तलब कर स्लीपर बसों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद एआरटीओ, पीटीओ, आरआई जीवन कुमार, एआरएम अकुंर विकास की टीमें स्लीपर बसों को तलाशने के लिए मोहम्मदाबाद और कायमगंज गईं पर एक भी स्लीपर बस नहीं पकड़ सके। तीन माह पहले स्लीपर बसों व डग्गामार वाहनों से परिवहन विभाग को लाखों का चूना लगने पर एआरएम ने एसपी, डीएम समेत एआरटीओ को पत्र भेजकर कार्रवाई को कहा था। किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया और स्लीपर बस व डग्गामार वाहन धड़ल्ले से फर्राटा भर रहे हैं। एआरटीओ ने बताया कि दिन में कई जगहों पर स्लीपर बसों की तलाश में गए पर कहीं भी बसें नहीं मिली हैं। रात में भी अभियान जारी रहेगा।
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कांट्रेक्ट कैरिज परमिट पर सवारियां भरने का खेल
फर्रुखाबाद। स्लीपर बसों को दिल्ली व जयपुर रूट पर चलाने के लिए बस मालिक एआरटीओ कार्यालय से कांट्रेक्ट कैरिज का परमिट लेते हैं। इसमें नियम है कि एक स्थान से बुक की गई सवारियों को दूसरे स्थान पर उतारना है। इसके विपरीत इसी परमिट पर बस मालिक धड़ल्ले से शहर के बीचोबीच काउंटर लगाकर सवारियों की बुकिंग करते हैं। सवारियों को लाने के लिए फ्री ई-रिक्शा मुहैया करवाते हैं। यहां से सवारियां को बैठाकर जगह-जगह से भी सवारियां बैठाते हुए जाते हैं। सब कुछ पुलिस व प्रशासन व एआरटीओ की नाक के नीचे ही चलता रहता है। किसी को भी कोई भनक नहीं लगती है। जब हादसा होता है तो अफसर अपनी कलम बचाने के लिए नैतिकता का पाठ पढ़ाने से नहीं चूकते हैं।
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