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तीन साल बीते, 300 स्कूलों में बिजली नहीं
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फर्रुखाबाद। तीन साल पहले बजट आया लेकिन 300 स्कूलों में आज तक बिजली के कनेक्शन नहीं कराए जा सके। इसमें कुछ में विद्युत पोल से विद्यालय की दूरी अधिक है तो कई में प्रधानाध्यापकों के ऑनलाइन आवेदन न करने का पेच फंसा है। उच्च अधिकारियों ने शिकंजा कसा तो अब शिक्षक स्कूल में कनेक्शन कराने के लिए विद्युत निगम कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के 336 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बिजली कनेक्शन कराने के लिए प्रदेश सरकार से प्रति विद्यालय 6955 रुपये के हिसाब से वर्ष 2017-18 में 23 लाख 36 हजार 880 रुपये का बजट जिले को मिला था। ये बजट वर्ष 2018-19 में विद्युत वितरण ग्रामीण खंड कार्यालय भेजा गया। बजट ट्रांसफर कर बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। कुछ स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने कनेक्शन को आवेदन किया। इसमें जिन स्कूलों के पास विद्युत लाइन थी, उनको कनेक्शन दे दिया गया। जहां स्कूल से लाइन दूर थी, उनको कम पैसे में कनेक्शन नहीं मिल सका।
शिक्षा विभाग के अफसरों ने भी सुध नहीं ली। यह तक पता नहीं किया कि कितने स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने बिजली कनेक्शन को आवेदन किया और कितने स्कूलों में कनेक्शन हुए। 336 स्कूलों में से अभी तक करीब तीन सौ स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है। यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आया। उनकी नाराजगी पर अब प्रधानाध्यापक स्कूल में बिजली कनेक्शन कराने की प्रक्रिया जानने को बिजली कार्यालय के चक्कर लगाने लगे हैं।
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इस संबंध में बीएसए लालजी यादव ने बताया कि कितने स्कूलों में बिजली कनेक्शन हुआ और कितने में नहीं हुआ। इसकी जानकारी की जाएगी। जहां बिजली कनेक्शन नहीं होगा, वहां के प्रधानाध्यापक से कनेक्शन को आवेदन कराया जाएगा। वहीं हरिबरन सिंह, एक्सईएन ग्रामीण ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग से स्कूलों में कनेक्शन को जो बजट आया था उससे शिक्षकों के आवेदन करने पर कनेक्शन दिया गया है। कितने स्कूलों में कनेक्शन हो गया और कितनों में बकाया है। इसकी जानकारी की जाएगी।
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बेसिक शिक्षा विभाग के 336 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बिजली कनेक्शन कराने के लिए प्रदेश सरकार से प्रति विद्यालय 6955 रुपये के हिसाब से वर्ष 2017-18 में 23 लाख 36 हजार 880 रुपये का बजट जिले को मिला था। ये बजट वर्ष 2018-19 में विद्युत वितरण ग्रामीण खंड कार्यालय भेजा गया। बजट ट्रांसफर कर बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। कुछ स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने कनेक्शन को आवेदन किया। इसमें जिन स्कूलों के पास विद्युत लाइन थी, उनको कनेक्शन दे दिया गया। जहां स्कूल से लाइन दूर थी, उनको कम पैसे में कनेक्शन नहीं मिल सका।
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शिक्षा विभाग के अफसरों ने भी सुध नहीं ली। यह तक पता नहीं किया कि कितने स्कूलों के प्रधानाध्यापकों ने बिजली कनेक्शन को आवेदन किया और कितने स्कूलों में कनेक्शन हुए। 336 स्कूलों में से अभी तक करीब तीन सौ स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है। यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आया। उनकी नाराजगी पर अब प्रधानाध्यापक स्कूल में बिजली कनेक्शन कराने की प्रक्रिया जानने को बिजली कार्यालय के चक्कर लगाने लगे हैं।
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इस संबंध में बीएसए लालजी यादव ने बताया कि कितने स्कूलों में बिजली कनेक्शन हुआ और कितने में नहीं हुआ। इसकी जानकारी की जाएगी। जहां बिजली कनेक्शन नहीं होगा, वहां के प्रधानाध्यापक से कनेक्शन को आवेदन कराया जाएगा। वहीं हरिबरन सिंह, एक्सईएन ग्रामीण ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग से स्कूलों में कनेक्शन को जो बजट आया था उससे शिक्षकों के आवेदन करने पर कनेक्शन दिया गया है। कितने स्कूलों में कनेक्शन हो गया और कितनों में बकाया है। इसकी जानकारी की जाएगी।