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Farrukhabad News: तीन हजार ड्राइविंग लाइसेंस अधर लटके
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फर्रुखाबाद। पिछले वर्ष अक्तूबर से तीन हजार ड्राइविंग लाइसेंस अधर में लटके हुए है। सड़क पर पुलिस प्रतिदिन चेकिंग कर रही है। वहीं आवेदक लाइसेंस के लिए कार्यालय के चक्कर लगाने का मजबूर है।
एआरटीओ कार्यालय में तीन हजार स्थाई लाइसेंस अधर में अटके हुए है। अक्तूबर से लेकर जनवरी तक के लाइसेंस बनकर नहीं आए है। आवेदक कार्यालय के चक्कर काट रहे है। कार्यालय के कर्मचारी भी इस मामले में कोई जवाब नहीं दे पा रहे है। उनका कहना कि यहां से लाइसेंस स्वीकृत कर बनने के लिए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के कार्यालय में भेज दिए जाते है। लाइसेंस प्राइवेट कंपनी से ठेके पर बनवाए जाते है। वहां से पहले 10 से 15 दिन में लाइसेंस डाक से आवेदक के घर पर आ जाते थे।
नवाबगंज के गांव सोना जानकीपुर निवासी आवेदक सुशील ने बताया कि वह तीन माह से कार्यालय के चक्कर काट रहे है। पुलिस चेकिंग में उसको आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। जहानगंज थाना क्षेत्र के गांव झसी निवासी अरविंद ने बताया कि उन्होंने नवंबर में फोटो खिंचवाकर टेस्ट दिया था। अभी तक लाइसेंस बनकर नहीं आया है।
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एआरटीओ कार्यालय में अस्थाई लाइसेंस को बनाने का काम काफी पहले बंद हो गया। अस्थाई लाइसेंस बाहर से फीस जमा करने व टेस्ट पास करने के बाद केवल अनुमोदन के लिए कार्यालय में आते है। स्थाई लाइसेंस में ऑनलाइन फीस जमा करने के बाद आवेदक को टेस्ट के निर्धारित तिथि पर बुलाया जाता है। वहां आवेदक की फोटो खिंचवाकर डिजिटल हस्ताक्षर करवाने के बाद टेस्ट पास करने पर लाइसेंस जारी करने के लिए एप के माध्यम से रिपोर्ट भेज दी जाती है। इसके बाद डाक से आवेदक के घर स्थाई लाइसेंस बनकर आ जाता है।
लाइसेंस में लगने वाली चिप की आपूर्ति यूक्रेन से होती थी। रूस और यू्क्रेन युद्ध के कारण चिप की आपूर्ति समय से नहीं हो पा रही है। इसके चलते लाइसेंस समय से नहीं आ रहे है। फिलहाल लाइसेंस बनाने वाली कंपनी दूसरे देश से चिप मंगवाकर काम करवा रही है। 25 जनवरी से जारी हुए लाइसेंस बनकर आने लगे है। पिछले लाइसेंस भी साथ में बनाए जाने की प्रकिया शुरू कर दी गई है।
ट्रोल फ्री नंबर पर आवेदक सीधे बात करके जानकारी कर सकते है। कंपनी के पास ठेका है। उसकी जानकारी विभाग के पास नहीं है।
बृजेंद्र चौधरी एआरटीओ प्रशासन
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एआरटीओ कार्यालय में तीन हजार स्थाई लाइसेंस अधर में अटके हुए है। अक्तूबर से लेकर जनवरी तक के लाइसेंस बनकर नहीं आए है। आवेदक कार्यालय के चक्कर काट रहे है। कार्यालय के कर्मचारी भी इस मामले में कोई जवाब नहीं दे पा रहे है। उनका कहना कि यहां से लाइसेंस स्वीकृत कर बनने के लिए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के कार्यालय में भेज दिए जाते है। लाइसेंस प्राइवेट कंपनी से ठेके पर बनवाए जाते है। वहां से पहले 10 से 15 दिन में लाइसेंस डाक से आवेदक के घर पर आ जाते थे।
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नवाबगंज के गांव सोना जानकीपुर निवासी आवेदक सुशील ने बताया कि वह तीन माह से कार्यालय के चक्कर काट रहे है। पुलिस चेकिंग में उसको आए दिन परेशानी का सामना करना पड़ता है। जहानगंज थाना क्षेत्र के गांव झसी निवासी अरविंद ने बताया कि उन्होंने नवंबर में फोटो खिंचवाकर टेस्ट दिया था। अभी तक लाइसेंस बनकर नहीं आया है।
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एआरटीओ कार्यालय में अस्थाई लाइसेंस को बनाने का काम काफी पहले बंद हो गया। अस्थाई लाइसेंस बाहर से फीस जमा करने व टेस्ट पास करने के बाद केवल अनुमोदन के लिए कार्यालय में आते है। स्थाई लाइसेंस में ऑनलाइन फीस जमा करने के बाद आवेदक को टेस्ट के निर्धारित तिथि पर बुलाया जाता है। वहां आवेदक की फोटो खिंचवाकर डिजिटल हस्ताक्षर करवाने के बाद टेस्ट पास करने पर लाइसेंस जारी करने के लिए एप के माध्यम से रिपोर्ट भेज दी जाती है। इसके बाद डाक से आवेदक के घर स्थाई लाइसेंस बनकर आ जाता है।
लाइसेंस में लगने वाली चिप की आपूर्ति यूक्रेन से होती थी। रूस और यू्क्रेन युद्ध के कारण चिप की आपूर्ति समय से नहीं हो पा रही है। इसके चलते लाइसेंस समय से नहीं आ रहे है। फिलहाल लाइसेंस बनाने वाली कंपनी दूसरे देश से चिप मंगवाकर काम करवा रही है। 25 जनवरी से जारी हुए लाइसेंस बनकर आने लगे है। पिछले लाइसेंस भी साथ में बनाए जाने की प्रकिया शुरू कर दी गई है।
ट्रोल फ्री नंबर पर आवेदक सीधे बात करके जानकारी कर सकते है। कंपनी के पास ठेका है। उसकी जानकारी विभाग के पास नहीं है।
बृजेंद्र चौधरी एआरटीओ प्रशासन