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बंद पड़ी चीनी मिल की डिस्टिलरी व एथेनॉल प्लांट फिर चलाने का प्रयास
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कायमगंज चीनी मिल की बंद पड़ी डिस्टिलरी यूनिट।
- फोटो : FARRUKHABAD
... तो फिर चलेगी चीनी मिल की डिस्टिलरी
कायमगंज। डिस्टिलरी व एथेनॉल प्लांट को फिर चलाने के लिए चीनी मिल प्रबंधन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया की जानी है।
कायमगंज सहकारी चीनी मिल को घाटे से उबारने के लिए पहले डिस्टिलरी, फिर एथेनॉल प्लांट लगाया गया था। यहां चीनी मिल से निकले शीरे से रेक्टिफाइड स्प्रिट व एथेनॉल (हर्बल पेट्रोल) बनाया जाता था।
गंगा स्वच्छता अभियान के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस पर मार्च 2017 में दोनों ही प्लांट बंद कर दिए गए थे। प्लांट तो बंद हो गए, लेकिन खर्च जारी रहा। इसे फिर से चालू करने की मंशा से मिल संघ ने जल प्रदूषण रोकने के लिए 26 करोड़ से जेडएलडी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) प्लांट लगवाया। इसमें भी काम तो पूरा नहीं हुआ, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया।
इस पर पिछले सत्र 30 नवंबर को डिस्टिलरी व एथेनॉल प्लांट का शुभारंभ किया गया। दोनों प्लांटों को चलाने के लिए मजदूरों का ठेका उत्तम एनर्जी के पास था। कुछ दिन प्लांट चला और फिर मजदूरी न मिलने पर मजदूर हड़ताल पर चले गए। जैसे तैसे उन्हें मजदूरी देकर फिर बुलाया गया, लेकिन अड़चनें आती गईं और सीजन में लगातार प्लांट नहीं चल सका।
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डिस्टिलरी के मैनेजर आरके मिश्रा ने बताया कि सीजन में 60 दिन दोनों प्लांट चले हैं। इससे 13 लाख लीटर रेक्टिफाइट स्प्रिट व 25 हजार लीटर एथेनॉल बना है। 31 मार्च को दोनों प्लांट पूरी तरह से बंद हो गए। डिस्टिलरी चलाने के लिए दोबारा टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।
बारिश के मौसम जुलाई, अगस्त, सितंबर में एथेनॉल प्लांट बंद रहता है। जीएम किशन लाल ने बताया कि मिल संघ से दोबारा टेंडर कराने का निर्देश मिला है। 24 जून तक टेंडर कराना है। इसके बाद डिस्टिलरी को नियमित चलाने का प्रयास किया जाएगा।
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कायमगंज। डिस्टिलरी व एथेनॉल प्लांट को फिर चलाने के लिए चीनी मिल प्रबंधन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया की जानी है।
कायमगंज सहकारी चीनी मिल को घाटे से उबारने के लिए पहले डिस्टिलरी, फिर एथेनॉल प्लांट लगाया गया था। यहां चीनी मिल से निकले शीरे से रेक्टिफाइड स्प्रिट व एथेनॉल (हर्बल पेट्रोल) बनाया जाता था।
गंगा स्वच्छता अभियान के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस पर मार्च 2017 में दोनों ही प्लांट बंद कर दिए गए थे। प्लांट तो बंद हो गए, लेकिन खर्च जारी रहा। इसे फिर से चालू करने की मंशा से मिल संघ ने जल प्रदूषण रोकने के लिए 26 करोड़ से जेडएलडी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) प्लांट लगवाया। इसमें भी काम तो पूरा नहीं हुआ, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया।
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इस पर पिछले सत्र 30 नवंबर को डिस्टिलरी व एथेनॉल प्लांट का शुभारंभ किया गया। दोनों प्लांटों को चलाने के लिए मजदूरों का ठेका उत्तम एनर्जी के पास था। कुछ दिन प्लांट चला और फिर मजदूरी न मिलने पर मजदूर हड़ताल पर चले गए। जैसे तैसे उन्हें मजदूरी देकर फिर बुलाया गया, लेकिन अड़चनें आती गईं और सीजन में लगातार प्लांट नहीं चल सका।
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डिस्टिलरी के मैनेजर आरके मिश्रा ने बताया कि सीजन में 60 दिन दोनों प्लांट चले हैं। इससे 13 लाख लीटर रेक्टिफाइट स्प्रिट व 25 हजार लीटर एथेनॉल बना है। 31 मार्च को दोनों प्लांट पूरी तरह से बंद हो गए। डिस्टिलरी चलाने के लिए दोबारा टेंडर की प्रक्रिया चल रही है।
बारिश के मौसम जुलाई, अगस्त, सितंबर में एथेनॉल प्लांट बंद रहता है। जीएम किशन लाल ने बताया कि मिल संघ से दोबारा टेंडर कराने का निर्देश मिला है। 24 जून तक टेंडर कराना है। इसके बाद डिस्टिलरी को नियमित चलाने का प्रयास किया जाएगा।