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मोक्षदायिनी के तट पर बढ़ता जा रहा श्रद्धा का सैलाब
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रामनगरिया मेले में कथा सुनतीं महिलाएं। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
पांचाल घाट स्थित मेला रामनगरिया में मोक्षदायिनी मां गंगा के तट पर आस्था की बयार बह रही है। मेला समापन की ओर है और इसके साथ ही आस्थावानों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
बुधवार को भी सूर्योदय से पहले ही भक्त पुण्य की डुबकी लगाने के लिए सुबह से ही उमड़ पड़े। पंडालों में लोग कथा सुनने से लेकर दान-पुण्य करने में व्यस्त रहे।
मेले में कल्पवासी दान-पुण्य के साथ साधु-संतों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ट्रैक्टरों से मेले में पहुंच रहे हैं। पतित पावनी मां गंगा के तट पर कल्पवासी व गंगा स्नान करने आने वाले श्रद्धालु कथा-भागवत कराने में लगे हुए हैं।
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बुधवार को साधु संतों को भोजन कराकर पुण्य कमाने की होड़ मची रही। मनोज भारती बब्बा गुरु से आशीर्वाद लेने वालों का तांता लगा रहा। बब्बा गुरु कहते हैं कि माता, पिता और गुरु से जो भी सेवा करवाते हैं। उनकी निशाचर जैसी प्रवृति होती है।
माता-पिता व गुरु का अपमान करने वाले कभी सुखी नहीं रहते हैं। माता-पिता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। जो उनके चरणों का आशीर्वाद लेते हैं। उनके लिए सारे तीर्थ घर में ही होते हैं। संत ढोलक व चिमटे की धुन पर भजन-कीर्तन में मस्त दिखाई दिए।
पवित्र माह माघ के चार दिन ही शेष बचे हैं। इससे गंगा तट पर श्रद्धा का सैलाब बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन गंगा स्नान करने वाले हजारों श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्राली व अन्य वाहनों से पहुंच रहे हैं। इससे मनोरंजन क्षेत्र भी खचाखच भरा रहता है।
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बुधवार को भी सूर्योदय से पहले ही भक्त पुण्य की डुबकी लगाने के लिए सुबह से ही उमड़ पड़े। पंडालों में लोग कथा सुनने से लेकर दान-पुण्य करने में व्यस्त रहे।
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मेले में कल्पवासी दान-पुण्य के साथ साधु-संतों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ट्रैक्टरों से मेले में पहुंच रहे हैं। पतित पावनी मां गंगा के तट पर कल्पवासी व गंगा स्नान करने आने वाले श्रद्धालु कथा-भागवत कराने में लगे हुए हैं।
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बुधवार को साधु संतों को भोजन कराकर पुण्य कमाने की होड़ मची रही। मनोज भारती बब्बा गुरु से आशीर्वाद लेने वालों का तांता लगा रहा। बब्बा गुरु कहते हैं कि माता, पिता और गुरु से जो भी सेवा करवाते हैं। उनकी निशाचर जैसी प्रवृति होती है।
माता-पिता व गुरु का अपमान करने वाले कभी सुखी नहीं रहते हैं। माता-पिता की सेवा करना सबसे बड़ा धर्म है। जो उनके चरणों का आशीर्वाद लेते हैं। उनके लिए सारे तीर्थ घर में ही होते हैं। संत ढोलक व चिमटे की धुन पर भजन-कीर्तन में मस्त दिखाई दिए।
पवित्र माह माघ के चार दिन ही शेष बचे हैं। इससे गंगा तट पर श्रद्धा का सैलाब बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन गंगा स्नान करने वाले हजारों श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्राली व अन्य वाहनों से पहुंच रहे हैं। इससे मनोरंजन क्षेत्र भी खचाखच भरा रहता है।