फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   The trend of growing Muslim community education

मुस्लिम समाज में बढ़ रहा तालीम का रुझान

Thu, 04 Feb 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद Updated Thu, 04 Feb 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
The trend of growing Muslim community education

फर्रुखाबाद। मुस्लिम समुदाय में तालीमी रुझान बढ़ रहा है। स्कूल, कालेज में छात्राओं की संख्या छात्रों से ज्यादा है। इतना ही नहीं मदरसे भी आधुनिकता की दौड़ में शामिल हो गए हैं। बदली सोच के साथ मदरसों में विद्यार्थी कंप्यूटर की शिक्षा लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

विज्ञापन


एक जमाने में मुस्लिम समुदाय के लोग मदरसों की दीनी तालीम के दायरे में सीमित थे। बच्चों के हाथों में पाठ्य पुस्तक के रूप में बुगदादी कायदा (पुस्तक) ही रहा। एक तरह से टाट-पट्टी पर बैठकर सबक रटने की मदरसे के छात्रों की नियत बनी रही लेकिन बदलते वक्त के साथ मुस्लिम समुदाय में तालीमी सोच बदलने लगी है। समाज को जागरूक करने में मुस्लिम समाजसेवी संस्थाएं भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रही हैं। पुरानी छवि से बाहर निकलने के लिए मदरसों के संचालकों ने शिक्षा के मंदिरों को आधुनिक रंग देना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


घेर शामू के मदरसा तालीम-ए-निस्वां एवं रजा इंस्टीट्यूट में लड़कियों के लिए दीनी तालीम के साथ कंप्यूटर में प्रशिक्षण के दरवाजे खोले गए हैं। प्रशिक्षिका सानिया जहरा मदरसे में आने वाली छात्राओं को कंप्यूटर की तालीम दे रही हैं। उनका कहना है कि मदरसों में आधुनिक तालीम कभी वर्जित नहीं रही। हां, कंप्यूटर की शिक्षा शुरू होने में देरी अवश्य हुई। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली जीनत फात्मा, रूबी, नाजरीन और फरबा आदि छात्राओं का कहना है कि आजकल कंप्यूटर का ज्ञान आवश्यक है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मदरसा प्रबंधक हाफिज शहीमुद्दीन कहते हैं कि जमाने के साथ चलना है तो मदरसों में दीनी तालीम के साथ गणित, भूगोल, साइंस, कंप्यूटर आदि विषयों की शिक्षा आवश्यक हो गई है। इसीलिए मदरसों का आधुनिकीकरण हो रहा है।

एजुकेशनल मूवमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष डा. अनवर अहमद कहते हैं कि पिछले सालों में मुस्लिम समुदाय में बेटों के मुकाबले बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में ज्यादा आगे बढ़ी हैं। ख्वाजा अहसन अली सोसाइटी प्रबंधक मकसूद अहसन कहते हैं कि दीनी शिक्षा के साथ हिंदी, अंग्रेजी, भूगोल, गणित और विज्ञान की तालीम भी अनिवार्य कर दी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed