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दलहन की बुवाई का लक्ष्य नहीं हुआ पूरा
ब्यूरो/अमर उजाला, फर्रुखाबाद
Updated Fri, 23 Oct 2015 10:59 PM IST
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फर्रुखाबाद। इस सीजन में दलहन की बुवाई का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। कृषि महकमे के तय लक्ष्य के मुकाबले किसानों ने बुवाई ही नहीं की। अरहर के 2010-2011 में हुए उत्पादन के मुकाबले पिछले साल तगड़ी पैदावार हुई। इसके बाद फिर पैदावार गिर गई। इस बार भी यही अंदेशा है। बरसात कम होने से पैदावार में 20 से 30 फीसदी गिरावट की आशंका है। इससे दालों में दामों में गिरावट की बहुत उम्मीद नहीं है।
इस सीजन में कृषि महकमे ने 1483 हेक्टेयर में अरहर की बुवाई का लक्ष्य तय किया था। किसानों ने 1378 हेक्टेयर रकबा में ही बुवाई की है। वर्ष 2010-2011 में अरहर का 976 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। 2011-2012 में 1271 मीट्रिक टन पैदावार हुई थी। 2012-2013 में 1402 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ।
इस बार औसतन 14830 क्विंटल उत्पादन आंका जा रहा है। अरहर की तरह मूंग के रकबे में भी गिरावट हुई है। तय लक्ष्य 57 हेक्टेयर के बजाय 52 हेक्टेयर में किसानों ने बुवाई की है। मूंग का 2012-2013 में 911 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो इस बार का उत्पादन यह आंकड़ा नहीं छू पाएगा। मसूर, चना, मटर और उर्द का रकबा भी इस बार घटा है। किसान हर साल औसतन 1319 हेक्टेयर रकबा में उर्द की बुवाई करते थे। इस बार 1273 हेक्टेयर में ही बुवाई की है।
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पिछले सालों के मुकाबले भाव में बड़ा उछाल
वर्ष 2013-2014 में अरहर की दाल के भाव 61 से 70 रुपये किलो पर ठहरे रहे। अब भाव 180 से 185 रुपये किलो हैं। दो साल पहले चना की दाल के भाव 48 से 52 रुपये, मूंग की दाल के भाव 74 से 90 रुपये और उर्द की दाल के भाव 60 से 62 रुपये प्रति किलो पर टिके रहे। इन दिनों उर्द 110 से 135 रुपये, मूंग 100 रुपये और चना 65 से 70 रुपये किलो है।
सूखा के अंदेशे से बुवाई कम
जिना कृषि अधिकारी एकेे सचान का कहना है कि सूखे के अंदेशे से किसानों ने तय से कम रकबे में बुवाई की है। बरसात कम होने से बोए गए रकबे में भी उत्पादन गिरने क ी आशंका है।
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इस सीजन में कृषि महकमे ने 1483 हेक्टेयर में अरहर की बुवाई का लक्ष्य तय किया था। किसानों ने 1378 हेक्टेयर रकबा में ही बुवाई की है। वर्ष 2010-2011 में अरहर का 976 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। 2011-2012 में 1271 मीट्रिक टन पैदावार हुई थी। 2012-2013 में 1402 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ।
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इस बार औसतन 14830 क्विंटल उत्पादन आंका जा रहा है। अरहर की तरह मूंग के रकबे में भी गिरावट हुई है। तय लक्ष्य 57 हेक्टेयर के बजाय 52 हेक्टेयर में किसानों ने बुवाई की है। मूंग का 2012-2013 में 911 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो इस बार का उत्पादन यह आंकड़ा नहीं छू पाएगा। मसूर, चना, मटर और उर्द का रकबा भी इस बार घटा है। किसान हर साल औसतन 1319 हेक्टेयर रकबा में उर्द की बुवाई करते थे। इस बार 1273 हेक्टेयर में ही बुवाई की है।
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पिछले सालों के मुकाबले भाव में बड़ा उछाल
वर्ष 2013-2014 में अरहर की दाल के भाव 61 से 70 रुपये किलो पर ठहरे रहे। अब भाव 180 से 185 रुपये किलो हैं। दो साल पहले चना की दाल के भाव 48 से 52 रुपये, मूंग की दाल के भाव 74 से 90 रुपये और उर्द की दाल के भाव 60 से 62 रुपये प्रति किलो पर टिके रहे। इन दिनों उर्द 110 से 135 रुपये, मूंग 100 रुपये और चना 65 से 70 रुपये किलो है।
सूखा के अंदेशे से बुवाई कम
जिना कृषि अधिकारी एकेे सचान का कहना है कि सूखे के अंदेशे से किसानों ने तय से कम रकबे में बुवाई की है। बरसात कम होने से बोए गए रकबे में भी उत्पादन गिरने क ी आशंका है।