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Farrukhabad News: बारिश के कारण किल्ला न निकलने से बोए आलू को जोता
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कमालगंज। अगेती आलू की फसल में सबसे पहले बोआई करने वाले बिचपुरी गांव के किसानों ने बारिश के कारण किल्ला (अंकुर) न निकलने से बोए गए आलू के खेत को जोत दिया। इन खेतों में अब दोबारा आलू की बोआई की जाएगी।
क्षेत्र में सबसे पहले दरियावगंज रोड स्थित बिचपुरी गांव के खेतों में आलू की कच्ची फसल की बोआई होती है। इस बार भी 20 से 22 सितंबर के बीच हंसराम, अवधेश, मीरा आदि किसानों ने अपने खेतों में आलू बोया था। इसके बाद 20 से 22 सितंबर तक बारिश हुई। किसान इंतजार कर रहे थे कि आलू के बीजा में संतोषजनक किल्ले निकल आए लेकिन ऐसा न होने से सोमवार को बोए गए आलू को ट्रैक्टर से जोत दिया।
छह बीघा में 35 हजार की लागत डूबी
- किसान हंसराम ने बताया कि छह बीघा में 36 पैकेट पुखराज बीजा बोया था। छह बोरी डीएपी, पोटास, जोताई व बोआई में कम से कम खर्च किया तो भी 35 हजार लग गए। पूरा पैसा डूब गया।
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अब फिर बोआई शुरू
- ज्यादातर किसान अगले दो-तीन दिन बारिश की संभावना को परखना चाहते हैं। वहीं, कुछ किसानों ने पिछली बारिश के एक सप्ताह बाद बोआई शुरू कर दी। बिचपुरी के ही अशोक ने सोमवार को तीन बीघा ख्याती आलू बोया है। अशोक ने बताया कि वह हमेशा सितंबर के आखिरी में आलू बो देते हैं। इस बार पानी के कारण देरी हुई।
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क्षेत्र में सबसे पहले दरियावगंज रोड स्थित बिचपुरी गांव के खेतों में आलू की कच्ची फसल की बोआई होती है। इस बार भी 20 से 22 सितंबर के बीच हंसराम, अवधेश, मीरा आदि किसानों ने अपने खेतों में आलू बोया था। इसके बाद 20 से 22 सितंबर तक बारिश हुई। किसान इंतजार कर रहे थे कि आलू के बीजा में संतोषजनक किल्ले निकल आए लेकिन ऐसा न होने से सोमवार को बोए गए आलू को ट्रैक्टर से जोत दिया।
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छह बीघा में 35 हजार की लागत डूबी
- किसान हंसराम ने बताया कि छह बीघा में 36 पैकेट पुखराज बीजा बोया था। छह बोरी डीएपी, पोटास, जोताई व बोआई में कम से कम खर्च किया तो भी 35 हजार लग गए। पूरा पैसा डूब गया।
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अब फिर बोआई शुरू
- ज्यादातर किसान अगले दो-तीन दिन बारिश की संभावना को परखना चाहते हैं। वहीं, कुछ किसानों ने पिछली बारिश के एक सप्ताह बाद बोआई शुरू कर दी। बिचपुरी के ही अशोक ने सोमवार को तीन बीघा ख्याती आलू बोया है। अशोक ने बताया कि वह हमेशा सितंबर के आखिरी में आलू बो देते हैं। इस बार पानी के कारण देरी हुई।